Pallavi Thakur
596 अंक
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अपने मन के भावों को काग़ज़ पर उकेर कर संजो लीजिए!

नमस्कार! मैं आकाशवाणी की युवा कलाकार हूँ। लेखन एवं हिंदी भाषा में मेरा अत्यधिक रुझान है। इस रुचि को एक ब्लॉगर के रूप में साकार करने के की कोशिश है।

दोस्तों आप सभी अपनी किसी न किसी बुरी आदत से परेशान ज़रूर होंगे। आपने यह भी गौर किया होगा कि अकसर सिर्फ एक बुरी आदत भी हमें एक से ज्यादा तरह से प्रभावित करती है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि आदतों का प्रभाव जीवन के हर पहलू पर पड़ता है। और यदि हम इन्हें सुधार लें, तो जीवन का हर पहलू बेहतर बन सकता है।

तो चलिए मिलकर जानते हैं उन 5 स्वस्थ आदतों के बारे में, जो हर पहलू में काफी सुधार लाएंगी।

1. स्वस्थ खाना खाएँ, खाने का समय निश्चित करें !

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खाने के रंग रूप से अधिक पौष्टिक तत्वों की मात्रा को दें महत्व। हरी फल-सब्ज़ियाँ, अनाज, दूध इत्यादि को अधिक से अधिक अपने खान-पान का हिस्सा बनाइए। साथ ही, भोजन केवल एक निश्चित समय पर ही करें। कभी भी कुछ भी खा लेने की आदत तुरंत बदल दें।

2. स्वच्छता को बनाएं आदत !

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हमेशा स्वस्थ और तरोताज़ा रहने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता बहुत ज़्यादा ज़रूरी है। बाहर से आने पर अच्छी तरह से हाथ-पैर धोएं, गंदे कपड़ों को अलग रखें और उसके बाद ही कुछ छुएं।

3. व्यायाम को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा !

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व्यायाम के एक नहीं, अनेकों फायदे हैं। रोज़ केवल 20 मिनट का व्यायाम आपको दिन भर उर्जावान, उत्पादक और संतुलित रखने में सक्षम है।

4. मोबाइल कंप्यूटर की आभासिक दुनिया से निकल कर बढ़ायें अपना सामाजिक दायरा !

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हमारा सामाजिक घेरा जितना छोटा होता है, हम उतने अकेले होने लगते हैं। लोगों से घुलने मिलने से आत्मविश्वास बढ़ता है, नए अनुभवों से दो चार होने का अवसर मिलता है, जो की मोबाइल हमें नहीं सिखा सकता।

5. सकरात्मक विचार की आदत विकसित करें !

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यह आपकी पूरी जिंदगी बदल कर रख सकती है। यदि आपके मन में केवल सकरात्मक विचारों के लिए जगह है, तो आप दुनिया में कुछ भी हासिल कर सकते हैं!

पोस्ट

मित्रों, आपने तेनालीराम की कई कहानियां सुनी होंगी। उनकी हाजिर-जवाबी और बुद्धिमता के किस्से घर-घर में मशहूर हैं। आज हम एक ऐसी ही कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो आपको गुदगुदाएगी भी, और एक महत्वपूर्ण सीख भी देगी।

विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय अति उदार स्वभाव के थे। वह अपनी प्रजा की हर आवश्यकता पूरी करते थे। राजा के इसी उदार स्वभाव के कारण विजयनगर के ब्राम्हण बड़े ही लालची हो गए थे। वह हमेशा किसी ना किसी बहाने से अपने राजा से धन वसूल किया करते थे। एक दिन राजा कृष्ण देव राय ने उनसे कहा - "मरते समय मेरी मां ने आम खाने की इच्छा व्यक्त की थी, जो उस समय पूरी नहीं की जा सकी थी। क्या अब ऐसा कुछ हो सकता है जिससे उनकी आत्मा को शांति मिले? " यह सुनते ही एक ब्राम्हण ने कहा- " यदि आप 108 ब्राह्मणों को सोने का एक-एक आम दान दें तो आपकी मां की आत्मा को शांति अवश्य ही मिल जाएगी। ब्राह्मणों को दिया दान मृत आत्मा तक अपने आप ही पहुंच जाता है।" सभी ब्राह्मणों में ने इस पर हां में हां मिलाई।

राजा कृष्णदेव राय ब्राह्मणों के इस प्रस्ताव से सहमत हुए। उन्होंने ब्राह्मणों को 108 सोने के आम दान कर दिए। इन आमों को पाकर ब्राह्मणों की तो मौज हो गई। जब तेनालीराम को इस घटना की सूचना मिली, तब ब्राह्मणों के इस लालच पर उन्हें बहुत क्रोध आया। उन्होंने इन लालची ब्राह्मणों को सबक सिखाने की ठान ली।

जब तेनालीराम की मां की मृत्यु हुई, तो 1 महीने बाद उन्होंने ब्राह्मणों को अपने घर आने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि वह भी अपनी मां की आत्मा की शांति के लिए कुछ करना चाहते हैं । खाने-पीने और बढ़िया माल पानी के लालच में 108 ब्राह्मण तेनालीराम के घर पर जमा हुए।

क्रोध न करने के लिए प्रेरित करते सुवचन.jpg

✴ जिस प्रकार रोग शरीर का छय करता है, उसी प्रकार क्रोध मनुष्य के पतन का कारण बनता है।

✴ क्रोध से मूढ़ता उत्पन्न होती है, मूढ़ता से स्मृति भ्रांत हो जाता है, स्मृति भ्रांत हो जाने से बुद्धि का नाश हो जाता है, और बुद्धि नष्ट होने से प्राणी स्वयं ही नष्ट हो जाता है।

✴ क्रोधी एवं अहंकारी व्यक्ति को दुनिया में कोई अधिक क्षति नहीं पहुंचा सकता, क्योंकि यह 2 गुण ही उसे बर्बाद करने के लिए पर्याप्त हैं।

✴ एक क्रोधी व्यक्ति में तीन गुण गौंण होते हैं - धैर्य, बुद्धि, एवं संवेदनशीलता। इन तीन गुणों के नाश के कारण उसकी सफलता, प्रतिष्ठा, एवं संबंधों का नाश हो जाता है।

✴ जब ज्ञान की वर्षा होती है, तब क्रोध की अग्नि धुआं बनकर उड़ जाती हैं। अतः ज्ञान अर्जित करें।

सफलता के लिए सुबह की पांच अच्छी आदतें.jpg

क्या आपने गौर किया है कि जिस दिन आप बहुत सुबह उठ जाते हैं, उस दिन आप तरोताजा और अधिक ऊर्जावान महसूस करते हैं?

साथ ही सुबह के वातावरण में घूमने से एक अजीब सी ख़ुशी का एहसास होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सुबह का समय बहुत अद्भुत होता है। यदि आप जल्दी उठते हैं, तो अन्य दिनों के मुकाबले आपके पास दिन के कुछ घंटे और बढ़ जाते हैं, जिसे आप सफलता पाने के लिए निवेश कर सकते हैं।

जी हां दोस्तों ऐसा बहुत कुछ है जो सुबह के समय करने से आप लाभान्वित हो सकते हैं। इसी कड़ी में हम आपके लिए लेकर आए हैं सुबह की वह पांच आदतें जो सफलता पाने में आपकी मदद कर सकते हैं :

अत्यधिक सोचनें की आदत से कैसे छुटकारा पाएँ.jpg

कई बार ऐसा होता है कि कुछ चीजों या घटनाओं को लेकर हम इतना अधिक चिंतन मनन करने लगते हैं, कि वह विचार हमें परेशान करने लग जाते हैं। कभी कभार ऐसा होना कोई बड़ी बात नहीं है, किंतु यदि आप हर छोटी-बड़ी घटनाओं पर देर तक सोचनें लगे, तो यह आपके लिए समस्या बन जाएगी।

कुछ लोग तो इस आदत से इस तरह प्रभावित होते हैं, कि छोटी से छोटी चीज़ करने से पहले अनावश्यक ही हजारों बार सोचते हैं, और कुछ कर देने के बाद भी उस पर घंटों तक विचार करते रह जाते हैं। इस तरह अति अधिक सोचने से न जाने कौन-कौन से विचार मन में आने लगते हैं, और व्यक्ति पूरी तरह व्याकुल हो जाता है। साथ ही, आपका आत्मविश्वास भी धीरे-धीरे कम होने लगता है, क्योंकि आप हर कार्य को लेकर संशय में रहने लग जाते हैं।

इस आदत को छोड़ देना ही बेहतर होगा। लेकिन लोग ऐसा नहीं कर पाते। वे अपने ही विचारों में उलझ कर रह जाते हैं। इसीलिए हम आपके लिए कुछ ऐसे बिंदु लेकर आए हैं, जिन पर गौर करने पर आप अपनी इस आदत से छुटकारा पा सकते हैं :

झगड़े से बचने के लिए सुझाव.jpg

दोस्तों, कई बार ऐसा होता है कि क्रोध के आवेश में आकर हम लड़ाई - झगड़े में कूद पड़ते हैं, लेकिन जब शांत दिमाग से इस बारे में सोचते हैं, तब हमें अपने कृत्य का पछतावा होता है।

केवल यही नहीं दोस्तों, झगड़े के परिणाम हमेशा बुरे ही होते हैं। बाद में पछताने से अच्छा है कि हम यह स्थिति आने ही ना दें। अक्सर ऐसी स्थितियों में हम समझ नहीं पाते की क्या उचित है, इसीलिए अंततः हम झगड़े में कूद पड़ते हैं। लेकिन आपको कोशिश करनी चाहिए कि जितना हो सके आप झगड़े को टाल सके, क्योंकि यह किसी के लिए भी अच्छी नहीं है।

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दोस्तों आज हम आपको एक बहुत ही रोचक कहानी सुनाने वाले हैं। यह कहानी है दो बहनों, हल्दी और सोंठ की। हल्दी स्वभाव से परोपकारी और दयालु थी लेकिन सौंठ घमंडी और स्वार्थी स्वभाव की थी। वह हमेशा अपनी बड़ी बहन हल्दी पर हुक्म जमाया करती थी। दिन यूं ही बीते रहे।

1 दिन दोनों बहनों के घर उनकी बूढ़ी नानी का संदेशा आया। बूढ़ी नानी ने अपनी मदद के लिए एक बहन को बुलाया था। संदेशा पढ़ते ही सौंठ समझ गई कि वहां जाकर उसे ढेरों काम करने पड़ेंगे, इसीलिए उसने तुरंत ही बहाना बनाकर जाने से मना कर दिया। जब हल्दी ने संदेश पढ़ा, वह तुरंत वहां जाकर उनकी सेवा करना चाहती थी। इसीलिए माता पिता की आज्ञा लेकर वहां अपनी नानी के घर के लिए निकल पड़ी।

रास्ते में उससे एक गाय दिखाई दी । हल्दी को देखकर उस गाय ने मदद के लिए उसे पुकारा। हल्दी तुरंत वहां गई और उसने गाय से पूछा कि उसे क्या कष्ट है। इस पर गाय ने कहा कि उसके आस पास बहुत सारा गोबर इकट्ठा हो गया है। तो क्या हल्दी इससे साफ कर देगी। हल्दी अपने परोपकारी स्वभाव के कारण तुरंत गाय की मदद के लिए मान गई और सारा गोबर साफ कर दिया। गाय बहुत प्रसन्न हुई । अब हल्दी ने गाय से विदा ली और आगे चल पड़ी। फिर उसे एक बेर का पेड़ दिखा जिसके आस पास बहुत से पत्ते बिखरे पड़े थे। हल्दी को वहां से गुजरता देख बेर ने भी उस से मदद मांगी, हल्दी ने उसके सभी बिखरे पत्तों को साफ कर दिया और बेर अति प्रसन्न हुआ। फिर कुछ दूर आगे बढ़कर उससे एक पर्वत दिखा जिसके आसपास कई ईट पत्थर थे। हल्दी ने पूरे मन से सभी ईंटों को साफ कर दिया और फिर नानी के घर की ओर चल पड़ी।

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जीवन में कभी न कभी हम सबको आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, ऐसे में इनसे घबराने की ज़रूरत नहीं है। कमज़ोर आर्थिक स्तिथि से निपटने के लिए आपको बहुत धैर्य एवं सकारात्मकता के साथ कदम बढ़ाने होंगे। हालातों से हार मान लेने से काम नहीं चलेगा। आपको इनसे उबरने के लिए अपने हौसले को बनाये रखना होगा। दोस्तों, भूले नहीं कि रात के बाद दिन ज़रूर आता है, इसी तरह दुःख के बाद सुख आना भी निश्चित है। तो आइये जानते हैं, कमज़ोर आर्थिक स्थिति से आप किस तरह निपट सकते है :

✴ आवश्यकताओं को सीमित करें

जब आर्थिक स्थिति कमजोर हो, तब आपको पैसे बचाने पर ज्यादा जोर देना चाहिए। आर्थिक हालत चरमरा जाने पर आवश्यकताएं तो उतनी ही रहती हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए पूंजी कम पड़ जाती है। ऐसे में सभी पैसे खर्च कर देना बुद्धिमानी नहीं होगी । अपनी जरूरतों को कम करें, पैसे केवल वहीं लगाएं जहां बहुत जरूरी है। जिसके बिना काम चलाया जा सकता है, उसमें पैसे खर्च ना करें ।

✴ केवल सोंचे नहीं, करें भी

हमारे पास पैसे नहीं है, अब क्या होगा क्या? क्या करना चाहिए? ऐसे सवाल मन में आने स्वभाविक हैं, लेकिन केवल इन पर सोचतें रहने से कुछ बदलने वाला नहीं है।आपको उस दिशा में काम करना होगा। अपनी माली हालत को वापस पटरी पर लाने के लिए आपको मेहनत करनी होगी, या फिर यह कहे कि दोगुना परिश्रम करना होगा। ऐसे में आलस्य का पूर्णतः त्याग कर दें । याद रखें कि आप आज काम करेंगे, तभी कल बेहतर होगा। फिर कभी आप ऐसी स्थिति में ना पहुंचें, इसके लिए कठोर परिश्रम कीजिए और सफल बनिए।

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पेश है खेलकूद में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के उपाय:

☸ सही पोषण

खेलकूद में शारीरिक श्रम होता है। आप खेल के मैदान में अधिक देर तक टिके रहें, इसके लिए आपके शरीर में पर्याप्त ऊर्जा होनी चाहिए। यह ऊर्जा वसा एवं कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन से प्राप्त होती है। यदि आप स्वस्थ नहीं होंगे, तो खेल में बेहतर प्रदर्शन करना संभव नहीं है। इसीलिए आपको अपने खान-पान पर खास ध्यान देने की जरूरत है। खाने में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों जैसे दूध, अंडे, पनीर, अंकुरित बीज इत्यादि शामिल करें। पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करें ताकि आपका शारीरिक विकास सही ढंग से हो, और खेल में अधिक ऊर्जा की खपत को आप पूरा कर पाए।

☸ अभ्यास एवं प्रशिक्षण

हीरा जितना घिसा जाता है, उसकी चमक उतनी ही बढ़ती जाती है। ठीक उसी प्रकार आप जितना अभ्यास करेंगे, उतना ही अपने खेल में अच्छे होते जाएंगे । केवल 1 दिन खेल लेने से आप बेहतर खिलाड़ी नहीं बन सकते। आपको निरंतर खेल के कौशल को निखारने की जरूरत है। खेल के मैदान में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए आपको कड़ी मेहनत और अभ्यास करना होगा। जिन जगहों पर आप कमजोर हैं, अभ्यास करके उसे अच्छा करें। रोज कुछ घंटे अभ्यास के लिए निकालें। साथ ही एक अच्छे शिक्षक से बकायदा प्रशिक्षण प्राप्त करें, ताकि आपको अपने खेल के सभी नियम, सभी बारीकियाँ समझ में आए और आपके अभ्यास को सही दिशा मिले।

☸ अनुशासन

खिलाड़ी का अनुशासित होना अत्यावश्यक है। बिना अनुशासित जीवन शैली के आप बेहतर खिलाड़ी नहीं बन सकते। अनुशासन आपको हर चीज में स्थापित करना होगा। कड़ी दिनचर्या का पालन करें, अभ्यास प्रतिदिन एवं समय पर करें, 1 दिन भी अभ्यास छूटने नहीं पाए, समय के पाबंद बनें, आज का काम खत्म करें, भोजन में अनुशासन रखें। तभी जाकर आप अपने खेल में बेहतरीन प्रदर्शन कर पाएंगे ।

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दोस्तों, हम यह तो जानते हैं कि सकारात्मकता जब आवश्यकता से अधिक हो जाए, तब वह विषाक्त सकारात्मकता का रूप ले लेती है, जो कि हानिकारक है। हम कब इसके शिकार हो जाते हैं, पता भी नहीं चल पाता। यही नहीं, हमारे आसपास लोग इस से ग्रसित हैं, यह पहचानना भी मुश्किल है। ऐसी स्थिति में यह जरूरी हो जाता है कि हम विषाक्त सकारात्मकता की उपस्थिति को पहचानें, और उसे खत्म करें । आइये जानते हैं विषाक्त सकारात्मकता के लक्षण :

☸ यदि किसी समस्या के आ जाने पर आप उसका सामना नहीं कर पाते, और समस्या से भागने लगते हैं, लेकिन साथ ही आप खुद को और दूसरों को यह दिखाने की कोशिश करते हैं आप बिल्कुल सकारात्मक हैं, पूरी तरह से ठीक हैं, तो यह विषाक्त सकारात्मकता का लक्षण है। इसीलिए अवलोकन करें कि कोई समस्या आपको अंदर ही अंदर बहुत ज्यादा परेशान तो नहीं कर रही। यदि आप ऐसी स्थिति में भी केवल दिखावे के लिए सकारात्मक रहने की कोशिश कर रहे हैं, तो इसे तुरंत बदलें।

☸ यदि कोई व्यक्ति अधि तनावपूर्ण बातें नहीं सुन पाता, और हमेशा उनसे भागने की कोशिश करता रहता है, तो यह भी विषाक्त सकारात्मकता का ही 1 लक्षण है। ऐसे लोगों में यह डर होता है कि नकारात्मक बात सुनने से उनकी सकारात्मकता पर प्रभाव पड़ेगा, इसीलिए सबसे अच्छी बातें कहने को कहते हैं, और यदि कोई अपनी समस्या लेकर आए, तो वह उससे मुंह मोड़ लेते हैं।

☸ यदि कोई व्यक्ति बहुत ही बुरी परिस्थितियों में, जहां समस्या की गंभीरता पर बात करनी चाहिए, वहां भी "सब अच्छा है" ऐसा कहता रहता है, तो वह भी विषाक्त सकारात्मकता से ग्रसित है। ऐसा व्यक्ति सकारात्मकता से समस्या को हल करने पर जोर नहीं देता, बल्कि सकारात्मकता के नाम पर उस समस्या को दबाने की कोशिश करता रहता है।

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माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगाएं। बच्चे ज्यादा से ज्यादा समय पढ़ाई पर लगाएं, इसलिए माता-पिता अक्सर उनके खेल के समय में कटौती कर देते हैं । कई माता-पिता तो खेलकूद को केवल समय की बर्बादी मात्र मानते हैं। पढ़ाई के लिए बच्चों को प्रेरित करना अच्छी बात है, पर उन्हें खेलकूद से दूर रखना आपकी भूल साबित हो सकती है।

कैसे?

इसका जवाब आपको नीचे लिखे बिंदुओं में मिलेगा। इस लेख में हम बच्चों के जीवन में खेलकूद के महत्व के बारे में बात कर रहे हैं। इन बिंदुओं पर गौर करने के बाद आप की सोच जरूर बदल जाएगी, और आप स्वयं बच्चों को खेल के लिए प्रेरित करेंगे :

शारीरिक मजबूती

खेल बच्चों को मजबूत बनाते हैं। इससे उनकी शारीरिक श्रम करने की क्षमता बढ़ती है, एवं वह अधिक सक्रिय रहते हैं। श्रम करने की आदत आगे जाकर उनके लिए फायदेमंद साबित होगी, जिससे किसी भी काम को करने में शारीरिक कमजोरी उनके लिए बाधा नहीं बनेगी। खेल के दौरान गिरना एवं चोट लगना उनके दर्द सहने की क्षमता को बढ़ाता है, उन्हें अधिक सहनशील बनाता है।

मानसिक विकास

भविष्य में जीवन के संघर्षों के सामने टिक पाने के लिए आवश्यक है कि बच्चे मानसिक रूप से भी मजबूत हो। खेल की रणनीति पर चिंतन - मनन बच्चों में बच्चे मानसिक श्रम करते हैं। खेल से मिली हार उन्हें चुनौतियों का सामना करने, एवं हार स्वीकार करने के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।

अच्छा कैसे लिखें - लेखन कौशल निखारने के सर्वश्रेष्ठ सुझाव.jpg

कभी नया लिखना होता है तो हम 10 बार सोचते हैं, क्या लिखें? कैसे लिखें? शुरू कैसे करें?

कभी-कभी आपके मन में किसी घटना के बारे में लिखने का विचार आता होगा। आप सहमत होंगे कि बोलना जितना आसान है, लिखना उतना नहीं क्योंकि लिखने का प्रभाव बोलने से अधिक स्थाई और प्रभावी होता है, परंतु शर्त यह है कि हमें प्रभावी ढंग से लिखना आए। जी हाँ, क्योंकि लेखन एक कौशल है। इस लेख में हम यही जानेंगे कि प्रभावी ढंग से कैसे लिखा जा सकता है:

विचारों की अभिव्यक्ति और भाषा

लिखित अभिव्यक्ति में हमें चाहिए कि विचारों को क्रमबद्ध करके अपने भावों के अनुकूल भाषा का प्रयोग करें । स्वाभाविक और स्पष्ट लिखने का प्रयास करें। स्वच्छता, सुंदरता और सुडौल अक्षर का निर्माण, चौथाई छोड़कर लिखना, अक्षर, शब्द और वाक्य से वाक्य के बीच की दूरी को ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। अर्थात्, लेखन सुंदर और शब्दों की वर्तनी शुद्ध हो। वाक्य की बनावट भी ठीक होनी चाहिए। साथ ही उसमें व्याकरण संबंधी कोई त्रुटि ना हो। जो आप कहना चाहते हैं, वही अर्थ निकले और वही दूसरों तक पहुंचे।

अपने अंदर की झिझक को कैसे मिटाएं.jpg

दोस्तों, झिझक या शर्म हम सबों में होती है। किसी में अधिक, तो किसी में कम, लेकिन सब लोग कभी न कभी किसी न किसी स्थिति में शर्माते हैं। किंतु कुछ व्यक्ति तो ज्यादा लोगों के सामने कुछ बोल ही नहीं पाते।

यह झिझक चिंता का कारण तब बनती है, जब यह आपके विकास में बाधा बन जाती है। तब, जब झिझक के कारण आपकी हानि होने लगे, पढ़ाई या नौकरी में आपका प्रदर्शन खराब होने लगे, या रोजमर्रा के कामों में भी परेशानी खड़ी हो जाए, तब आपको सजग हो जाने की आवश्यकता है। इसे इतना न बढ़ने दें कि आप कुछ भी करना चाहें तो शर्म के कारण पीछे हट जाए।

स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब यह शर्म बीमारी का रूप ले लेती है, जिसे ऐरिथ्रोफोबिया कहते हैं। इस अवस्था में व्यक्ति बात-बात पर शर्म आने लग जाता है। तो अपनी शर्म को खत्म करें, ताकि आप हर क्षेत्र में शत-प्रतिशत प्रदर्शन कर पाएं।

आत्मविश्वास को बल दे :

झिझक का मुख्य कारण है खुद पर विश्वास की कमी। हम हमेशा खुद को कम करके आंकते हैं । हमें लगता है कि हम में कुछ भी अच्छा नहीं है, और सामने वाले हम पर हसेंगे। पर यह केवल आपकी सोच है। सच्चाई ऐसी नहीं है। खुद पर विश्वास रखें और हीन भावना मन में ना आने दे। अपनी कमजोरियों को भी आत्मविश्वास के साथ स्वीकार करें, और अपनी क्षमताओं पर भी भरोसा रखें। यह मानें कि आप अपने आप में खास हैं।

लोगों को प्रभावित कैसे करें

हर कोई चाहता है कि वह अपनी अलग पहचान बनाए, लोगों के बीच पसंदीदा बने। जब भी हम किसी से मिलते हैं, तो किसी न किसी रूप में उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। लोगों के ऊपर अपनी छाप छोड़ना एक कला है जो सबको नहीं आती। आप सोचते होंगे कि कैसे कुछ लोग भीड़ में इतने अलग दिखते हैं, जो कि सबके आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं।

मित्रों! कुछ लोगों में यह गुण पहले से होता है, उनका व्यक्तित्व ही ऐसा होता है, और कुछ लोग इसे अपने अंदर विकसित करते हैं। आप भी इस कला को सीख सकते हैं और लोगों पर अपना प्रभाव छोड़ सकते हैं। तो आइए जानते हैं कैसे आप खुद को भीर से अलग दिखा सकते हैं I

पहनावे पर ध्यान देना

लोगों की नजर में जो सबसे पहली चीज आती है, वह है आपकी वेशभूषा। अच्छे दिखने वाले व्यक्ति पर स्वतः ही लोगों का ध्यान केंद्रित हो जाता है। किंतु यहाँ अच्छे दिखने का तात्पर्य सुंदर दिखने से नहीं है।

खुद को साफ रखें, वह कपड़े पहने जिन्हें आप पूरे आत्मविश्वास के साथ वहन कर सकें, और जो आपके व्यक्तित्व को निखारे।

बेहतरीन संचार कौशल

अच्छे पहनावे से जितनी जल्दी लोगों का ध्यान आप पर केंद्रित होता है, खराब बातचीत के ढंग से उतनी ही जल्दी लोग आपसे मुंह मोड़ लेते हैं। लोगों को प्रभावित करने के लिए जरूरी है कि आपकी बातें उन्हें आपकी तरफ आकर्षित करें। इसके लिए संचार की बारीकियों पर ध्यान दें। शुद्ध एवं साफ भाषा का प्रयोग करें, आकर्षक शब्दों का प्रयोग करें, आवाज़ के उतार चढ़ाव पर ध्यान दें, शारीरिक हाव-भाव का ख्याल रखें, और बात करते समय आई कांटैक्ट बना कर रखें।

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दिन भर सोते रहना कितना अच्छा लगता है ना !

हम उन दिनों की कल्पना करते हैं, जब हम सिर्फ आराम करें। न जाने कितने ही कामों को न करने की इच्छा के कारण हम बहाने बना लिया करते हैं। यह अनिच्छा ही आलस्य है, जिसे हमारे शास्त्रों में मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु कहा गया है। आइए इस श्लोक को पढ़ें :

अलसस्य कुतो विद्या, अविद्यस्य कुतो धनम्

आधनस्य कुतो मित्रम्, अमित्रस्य कुतो सुखम्

अर्थात आलस करने वाले को विद्या कहां? जिसके पास विद्या नहीं, उसके पास धन कहां? निर्धन व्यक्ति के पास मित्र कहां? और मित्र के बिना सुख कहां?

इसीलिए आप भी सावधान हो जाएं, और आलस करना छोड़ें।

उपाय :

अनुशासन में रहें और नियम बनाएं

आलस को खत्म करने के लिए आपको स्वयं को अनुशासित करना होगा। खुद के लिए कड़े नियम बनाएं, और उन नियमों को तोड़ने की इजाजत खुद को ना दें। मन के बहकावे में बहकने से खुद को रोकें, और मन ना होने पर भी किसी भी काम को नजरअंदाज ना करें।

नियम टूटने पर सजा के लिए तैयार रहें

खुद के बनाए नियम तोड़ना आसान है, क्योंकि आपको सजा देने वाला कोई नहीं होता। हम बड़ी आसानी से तय किए गए नियमों को नजरअंदाज कर देते हैं इसीलिए नियमों के साथ सजा भी तय करें। जब भी नियम टूटें, तो खुद को कड़ा दंड दें। इससे आपको ना चाहते हुए भी आलस को त्यागना ही होगा।

खुद को सक्रिय बनाएं

ऐसी क्रियाओं में स्वयं को संलग्न करें, जिनमें आपकी सक्रियता बढे। सुबह दौर लगाएं, शारीरिक कार्य करें, खेल खेले इत्यादि। इससे आपकी आलसी प्रवृत्ति बदलेगी और आप सक्रिय हो पाएंगे।

दृढ़ संकल्प

बिना दृढ़ संकल्प के आपके सारे प्रयास निरर्थक रह जाएंगे। इसीलिए मन में ठान लीजिए, कि आपको आलस छोड़ना है। साथ ही बीच-बीच में स्वयं को इस दिशा में बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करें।

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आजकल हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी रोग का शिकार है। पहले की तुलना में अब लोग ज्यादा बीमार पड़ने लगे हैं। यहां तक कि नवजात शिशु भी जन्म के साथ ही जॉन्डिस, निमोनिया जैसे रोगों से ग्रसित हो जाते हैं। यदि आज से कुछ दशक पहले की तस्वीर देखी जाए, तो लोग अधिक स्वस्थ हुआ करते थे, और कहीं अधिक लंबा जीवन जिया करते थे। स्वास्थ्य के स्तर में इतनी गिरावट का सबसे मुख्य कारण है बदलती जीवनशैली।

आधुनिक जीवनशैली उपकरणों से घिरी हुई है। हम प्रकृति से दिन-ब-दिन दूर होते जा रहे हैं।

घर में पेड़ पौधे नहीं, बल्कि मोबाइल फ्रिज जैसे ढेरों उपकरण हैं। सूर्य एवं चंद्रमा की रोशनी छोड़ हम बनावटी लाइटों के बीच रहते हैं, पैकेट बंद खाद्य पदार्थ हमारा भोजन हैं, कच्चे फल सब्जियों की जगह हम जंक फूड खाना पसंद करते हैं, व्यायाम की जगह स्थूल जीवन शैली के हम आदी हो गए हैं, यहां तक कि जिस हवा में हम सांस लेते हैं, और जिस जल को ग्रहण करते हैं, वह भी शुद्ध नहीं है। ऐसे में कैसे स्वास्थ्य की गुणवत्ता बनाई रखी जा सकती है?

अपने आसपास देखिए। प्रकृति है?

नहीं!

जिस प्रकृति का हम हिस्सा हैं, जिसने हमें बनाया है, उससे दूर होकर हम कैसे ठीक रह सकते हैं ? अपने शरीर की संरचना को समझिये। यह मशीनों के लिए नहीं बनी है। इसीलिए स्वस्थ रहना तब तक पूरी तरह संभव नहीं है, जब तक आप खुद को प्रकृति से नहीं जोड़ेंगे।

यह सच है कि आप पूरी तरह से आधुनिकता के इस मशीनी माहौल से नहीं बच सकते हैं, लेकिन अभी भी ऐसा बहुत कुछ है जो आप कर सकते हैं। आइए जानते हैं प्रकृति की गोद में फिर से लौटने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं:

युवा पीढ़ी मोबाइल और सोशल मीडिया की लत से कैसे छुटकारा पा सकते हैं.jpg
आज या आप में से कितने हैं जो फोन के बिना 1 मिनट भी नहीं रह पाते? और ऐसे कितने हैं जो बिना मतलब सोशल मीडिया के पोस्ट को स्क्रॉल करते रहते हैं?

आपने से अधिकांश लोग इनमें से किसी ना किसी आदत के आदी होंगे। आजकल हर दूसरा व्यक्ति इस आदत का शिकार है। सोते, जागते, खाते, पढ़ते, हर वक्त लोग सोशल मीडिया पर जमे रहते हैं, जहां घंटों कब बीत जाते हैं, पता भी नहीं चलता। कुछ खाया, या पिया इसकी भी सुध नहीं रहती। अब तो स्थिति ऐसी हो गई है कि लोग एक दूसरे से बात करने से ज्यादा फोन पर चैटिंग करना पसंद करते हैं।

ऐसा नहीं है कि इस स्थिति से हम अनभिज्ञ हैं, हम सभी सोशल मीडिया की आदत के बुरे प्रभावों से पूरी तरह वंचित हैं, लेकिन फिर भी कुछ नहीं कर पा रहें। मानो जैसे हम इस जाल में बुरी तरह से फंस गए हों। यह लत बिल्कुल नशे की लत की जैसी है, जो बुरी है यह तो हम जानते हैं, पर इसे छोड़ नहीं पा रहे। इस के चक्कर में पढ़ाई, कैरियर, परिवार, संबंध, सब पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

आखिर करें तो क्या करें ?

हम जानते हैं कि आप इस लत से परेशान हैं, लेकिन करना क्या है यह नहीं समझ पा रहे। तो घबराइए नहीं। कहते हैं ना, जहां चाह वहां राह !

यही राह दिखाने के लिए हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ बेहद सरल किंतु प्रभावी उपाय जो आपको इस लत को छोड़ने में मदद कर सकते हैं I

अधिक पढ़ने पर भी अच्छे अंक क्यों नहीं आते - उपाय.jpg

आपके मन में यह प्रश्न जरूर आता होगा, कि कुछ बच्चे कम पढ़कर भी अच्छे अंक कैसे ले आते हैं?

जबकि कुछ बच्चे जी तोड़ मेहनत करते हैं, पर उनके अंक उस मेहनत के अनुरूप नहीं होते। जब बच्चे साल भर पूरी मेहनत से पढ़ाई करते हैं, और तब भी उनके अंक संतोषजनक नहीं होते, तब उनका मनोबल टूट जाता है। वह बहुत निराश हो जाते हैं। ऐसे में बच्चे तनावग्रस्त भी हो सकते हैं। बच्चों के कोमल मन पर निराशा की यह छाया नहीं पड़नी चाहिए, नहीं तो वह नन्हे फूल मुरझा जाएंगे।

इस स्थिति में फंसे बच्चों की मदद करने के लिए आज के लेख में हम बताने जा रहे हैं, कि आपको अच्छे अंक लाने के लिए कहां-कहां बदलाव करने की जरूरत है :

☸ सबसे पहली सीख, रटे नहीं, कंठस्थ करें।

रटंत विद्या बहुत हानिकारक है। बिना भावार्थ समझें केवल शब्दों या वाक्य को याद कर लेने से आपके ज्ञान में कोई वृद्धि नहीं होती। ऐसी चीजें आपको बस कुछ समय तक ही याद रहती है। इस तरह से याद करने वाले बच्चे, तब पूरी तरह ब्लॉक हो जाते हैं, जब सवाल थोड़ा भी घुमा दिया जाता है। क्योंकि आपने जो रट लिया, आपको बस उतना ही आता होता है। इसीलिए याद रखे बच्चों, आप जो भी पढ़ रहे हैं, उससे रटे नहीं, बल्कि समझे कि पाठ में आपको क्या समझाया जा रहा है। एक बार जब विषय वस्तु आपके समझ में आ जाएगी, तब आप उससे संबंधित प्रश्नों को हर तरह से हल कर पाएंगे ।

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पूरे साल हमें कई विषय पढ़ने होते हैं, उन विषयों में न जाने कितने ही पाठ होते हैं, और पाठों में न जाने कितने ही प्रश्न-उत्तर। इतनी सारी चीजों को याद रखने के क्रम में जो मुश्किल छात्रों के सामने आती है, वह यह है कि उन्होंने जो-जो पढ़ा है उन सब को कैसे याद रखा जाए। कुछ छात्र पाठ याद करने के कुछ समय बाद ही उसे भूल जाते हैं। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो आइए जानते हैं ऐसे उपाय, जिससे आप पढ़ी हुई चीजों को बेहतर याद रख पाएंगे I

याद करने के पश्चात लिखे।

यह सीख हमारे बूढ़े बुजुर्ग हमेशा से देते आए हैं। इसके पीछे विज्ञान यह है कि किसी भी क्रिया को करने में आप जितनी ज्ञानेंद्रियां अथवा शरीर के जितने अंगों को संलग्न करते हैं, वह क्रिया आप पर उतना ही गहरा प्रभाव छोड़ती है। याद करने के बाद उसी चीज को लिख लेने से आपके ज्यादा अंग संलग्न होते हैं, इसीलिए वह चीज आपको अधिक समय तक याद रहती है। तो जो भी याद करें, उसे दोबारा जरूर लिखें।

सुबह के समय पढ़ें।

आसपास का वातावरण जब शांत होता है, तब आपका मस्तिष्क चीजों को बेहतर रूप से ग्रहण कर पाता है। इसके लिए भोर का समय सबसे उत्तम है। सुबह के समय आपकी एकाग्रता भी अच्छी रहती है। छात्रों को प्रतिदिन जल्दी उठकर पढ़ना चाहिए।

छोटे-छोटे हिस्सों में काम करना

एक ही बार सब कुछ याद कर लेने का विचार अच्छा नहीं है। यदि आप एक ही साथ सारे विषयों को पढ़ना चाहेंगे तो स्वभाविक है कि ना आप ढंग से समझ पाएंगे, ना ही ज्यादा देर तक पढ़े हुए पाठ को याद रख पाएंगे। इसीलिए एक समय में एक ही विषय, अथवा एक ही पाठ पढ़ें। जो भी पढ़ें, जितना भी पढ़ें, पूरा मन लगा कर पढ़ें।

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कृतज्ञता अथवा ग्रैटिट्यूड का अर्थ है उन लोगों या चीजों के प्रति शुक्रगुजार होना, जिन्होंने आपके लिए कुछ अच्छा किया हो।

जिंदगी में कई बुरे वक्त आते हैं, जब आप कमजोर पड़ने लगते हैं, ऐसे में वे लोग जिन्होंने आपकी मदद की हो, आपके मुस्कुराने की वजह बने हों, उनके प्रति अपनी कृतज्ञता दिखाना ही ग्रैटीट्यूड कहलाता है। आभार प्रकट करने की आदत ना सिर्फ आपको अच्छा व्यक्ति बनाती है, बल्कि इसका आपकी जिंदगी पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यदि आप रोज लोगों एवं चीजों को आभार प्रकट करें, तो आपको इससे जबरदस्त फायदे मिलेंगे।

तो आइए जानते हैं आभार प्रकट करने से आपके जीवन में क्या बदलाव आते हैं :

सुधरता है मानसिक स्वास्थ्य

मनोवैज्ञानिक तौर पर आभार प्रकट करना आपके लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हो सकता है। आभार प्रकट करने से नकारात्मक विचारों, क्रोध, असंतोष, झुंझलाहट, दुख आदि बहुत हद तक कम होते हैं, क्योंकि जब आप शुक्रिया अदा करते हैं, तब आपका मन उन घटनाओं को याद कर खुश होता है। दूसरे द्वारा की गई मदद आपके दुखी मन पर औषधि की तरह काम करती है, जिससे तनाव दूर होता है और आप अधिक सकारात्मक बनते हैं।

अच्छी नींद

अच्छी नींद का सीधा संबंध आपकी मनः स्थिति से है। तनावग्रस्त लोगों में अक्सर नींद की कमी देखी जाती है। आभार प्रकट करने के दौरान आपके विचारों में सकारात्मकता आती है, जिससे मन शांत एवं स्थिर होता है। परिणामस्वरूप आपकी नींद और बेहतर होती है। सोने से पहले 10 मिनट भी ऐसा करने से आप अच्छी नींद का लुफ्त उठा सकते हैं।

बेहतर संबंंध

लोगों के प्रति कृतज्ञता का अर्थ है उनके लिए विश्वास, आदर, एवं प्रेम विकसित करना। इन भावनाओं को जब आप लोगों से व्यक्त करते हैं, तब लोगों के मन में भी आपके लिए यही भावना पनपती है, जिससे संबंध बेहतर बनते हैं।

पढ़ाई में ध्यान कैसे लगाएँ.jpg

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि आप बैठते तो पढ़ने के लिए हैं, लेकिन पढ़ाई को छोड़कर आपके दिमाग में दुनिया भर के ख्याल आने लगते हैं?

हां पाठकों! कई छात्रों की शिकायत होती है, कि वह पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाते। वे पढ़ना तो चाहते हैं, लेकिन पढ़ नहीं पाते। कई सारे कारक हमारे मन को भटका देते हैं, जैसे दोस्त, मौज मस्ती करने की चाहत, खेलकूद, शोर-शराबा इत्यादि। इसके साथ एक और चीज़ है जिसने आजकल युवाओं को सबसे ज्यादा डिस्ट्रेक्ट किया है, वह है मोबाइल और सोशल मीडिया। जहां कब घंटो बीत जाते हैं, पता भी नहीं चलता। इतने सारे डिस्ट्रेक्शंस के बीच पढ़ाई में ध्यान लगा पाना मुश्किल हो जाता है। इसीलिए आपको कुछ उपाय करने होंगे। ऐसे ही उपाय हम आज आपके लिए लेकर आए हैं, जो आपको पढ़ाई के प्रति अधिक समर्पित बनाने में कारगर हैं।

टाइम टेबल बनाएं

छात्रों, पढ़ाई करने के लिए आपको एक निश्चित समय तय करना होगा। किसी भी वक्त पढ़ लेने से बात नहीं बनेगी। और यदि आप कभी आधे घंटे, कभी 15 मिनट, इस तरह पढ़ाई करते हैं तो ध्यान लगा पाना लगभग असंभव है। खुद को पूरी तरह एकाग्र करने के लिए जरूरी है कि आप विषयों को अच्छी तरह समय दें। इसीलिए हर विषय के लिए टाइम टेबल बनाएं और नियम से उसका पालन करें।

राय

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नमस्कार! मैं आकाशवाणी (All India Radio) की कलाकार पल्लवी ठाकुर हूँ। लेखन में मेरा रुझान है और यह मेरा काम भी है। मैं बिहार की रहने वाली हूँ। धन्यवाद!

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