गौतम बुद्ध के 25 विचार

गौतम बुद्ध के 25 विचार

  

विश्व के प्रसिद्द धर्म सुधारकों एवं दार्शनिकों में अग्रणी महात्मा बुद्ध ने अपनी शिक्षाओं के आधार पर बौद्ध धर्म की स्थापना की | आज Buddhism विश्व के प्रमुख धर्मों में से एक है और चाइना, जापान, श्रीलंका समेत 10 से अधिक देशों में माना जाता है |

आइये आज हम भगवान बुद्ध के अनमोल वचनों को जानते हैं और इन्हें पढ़कर शांति का अनुभव करते हैं |

Ø बिना सेहत के जीवन जीवन नहीं है:- सेहत सबसे जरुरी होती है हर कार्य को करने के लिए इसलिए अपनी सेहत और स्वस्थ का ध्यान रखना जरुरी है |

Ø बस पीड़ा की एक स्थिति है- मौत की छवि है:- मौत को एक दिन आना ही है निश्चित है परन्तु प्रतिदिन उसके बारे में सोचना कष्ट लेना व्यर्थ है |

Ø शक की आदत से भयावह कुछ भी नहीं है | शक लोगों को अलग करता है | यह एक ऐसा ज़हर है जो मित्रता ख़त्म करता है और अच्छे रिश्तों को तोड़ता है | यह एक काँटा है जो चोटिल करता है, एक तलवार है जो वध करती है :- शक सबसे गलत बीमारी है इंसान की एक बार यह हो जाती है तो सब कुछ नष्ट कर देती है |

Ø सत्य के मार्ग पे चलते हुए कोई दो ही गलतियाँ कर सकता है, पूरा रास्ता ना तय करना, और इसकी शुरआत ही ना करना :- सत्य का रास्ता इतना आसान नहीं बताया है बुद्ध ने इसपर चलना यदि हम शुरू कर देते है तो परेशानियों का आना निश्चित है, इससे डर कर या तो हम डर जाए या रास्ते में ही हार मान ले |

Ø किसी विवाद में हम जैसे ही क्रोधित होते हैं हम सच का मार्ग छोड़ देते हैं,और अपने लिए प्रयास करने लगते हैं:- क्रोध हमारा सबसे बड़ा दुश्मन होता है अच्छे अच्छे काम भी बिगड़ जाते है हमारी बुद्धि नष्ट कर देता है क्रोध |

Ø तुम अपने क्रोध के लिए दंड नहीं पाओगे,तुम अपने क्रोध के द्वारा दंड पाओगे :- क्रोध एक मानसिक क्रिया है जो हमें परेशानियों का अनुभव करती है क्रोध से बहुत से कार्य खराब हो जाते है |

Ø घृणा घृणा से नहीं प्रेम से ख़त्म होती है,यह शाश्वत सत्य है :- घृणा अर्थात नफरत खत्म करने के लिए हमें प्रेम का सहारा लेना पड़ता है |

Ø आपके पास जो कुछ भी है उसे बढ़ा-चढ़ा कर मत बताइए, और ना ही दूसरों से ईर्ष्या कीजिये | जो दूसरों से ईर्ष्या करता है उसे मन की शांति नहीं मिलती :- दिखवा हमें कभी सही साबित नहीं करता है, दुसरो के पास जो है वो उनकी किस्मत है और हमारे पास जो है वो हमारी किस्मत है इसलिए जो है उसी में खुश रहना सीखना चाहिए |

Ø हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं :- हमारी सोच का आसार हमारे विचारो पर और हमारे विचारो का असर हमारी जिंदगी पर पड़ता है |

Ø मैं कभी नहीं देखता कि क्या किया जा चुका है,मैं हमेशा देखता हूँ कि क्या किया जाना बाकी है:- हमें भी हमेशा अपने लक्ष्य और योजना पर इसी तरह काम करना चाहिए समय प्रबंधन के अनुसार कार्य का अनुमान लगते रहना चाहिए |

Ø जैसे मोमबत्ती बिना आग के नहीं जल सकती,मनुष्य भी आध्यात्मिक जीवन के बिना नहीं जी सकता:- मानव जीवन को आध्यात्मिक जीवन का आधार बताया गया है |

Ø एक जग बूँद-बूँद कर के भरता है:- हमेशा छोटा छोटा हिस्सा ही बड़ी श्रंखला का निर्माण करता है |

Ø अपने मोक्ष के लिए खुद ही प्रयत्न करें,दूसरों पर निर्भर ना रहे :- इंसान अपने कर्मो से ही अपना रास्ता चुनता है, दुसरो पर निर्भर नहीं रहना चाहिए |

Ø क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकडे रहने के सामान है; इसमें आप ही जलते हैं:- क्रो कभी हमें अपने मन में नहीं रखना चाहिए, इससे दुसरो के साथ साथ खुद का भी नुकसान हो सकता है |

Ø अतीत पे ध्यान मत दो,भविष्य के बारे में मत सोचो,अपने मन को वर्तमान क्षण पे केन्द्रित करो:- हमें अपने अतीत को भूल कर वर्तमान में जीना चाहिए और हमेशा भविष्य के बारे में सोचना चाहिए |

Ø तीन चीजें ज्यादा देर तक नहीं छुप सकती,सूरज, चंद्रमा और सत्य :- सूर्य, चन्द्रमा जैसे की अपनी प्रकृति के अनुसार ज्यादा समय तक छुपे नहीं रह सकते उसी तरह सत्य को भी आप ज्यादा समय तक किसी से छुपा नहीं सकते |

Ø हजारों खोखले शब्दों से अच्छा,वह एक शब्द है जो शांति लाये:- किसी से भी कुछ बोलने से पहले हमें बार-बार सोचना चाहिए क्युकी एक भी अशब्द आपकी जिंदगी बर्बाद कर देगा |

Ø चाहे आप जितने पवित्र शब्द पढ़ लें या बोल लें, वो आपका क्या भला करेंगे जब तक आप उन्हें उपयोग में नहीं लाते? :- पवित्र शब्द सिर्फ सुनने और समझने से कुछ नहीं होता, हमें उनको अपनी जिंदगी में अपनाना चाहिए |

Ø किसी जंगली जानवर की अपेक्षा एक कपटी और दुष्ट मित्र से अधिक डरना चाहिए, जानवर तो बस आपके शरीर को नुक्सान पहुंचा सकता है, पर एक बुरा मित्र आपकी बुद्धि को नुक्सान पहुंचा सकता है:- मित्र हमेशा सोच समझ कर बनाना चाहिए क्युकी मित्र हमारा हर अच्छा बुरा जानते है हमारी हर बात से बाक़िफ़ होते है |

Ø स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है, वफ़ादारी सबसे बड़ा सम्बन्ध है :- स्वस्थ सबसे जरुरी है सबसे बड़ा उपहार है वो हमारा, संतोष को धन बोला गया है और वफ़ादारी को सबसे बड़ा सम्बन्ध, यह हमेशा हमारी जिंदगी को रौशनी देते है |

Ø अंत में ये चीजें सबसे अधिक मायने रखती हैं :- आपने कितने अच्छे से प्रेम किया? आपने कितनी पूर्णता के साथ जीवन जिया? आपने कितनी गहराई से अपनी कुंठाओं को जाने दिया :- जीवन में प्रेम बहुत जरुरी है, बुद्ध जी के विचार जीवन को नई पहचान देते है |

Ø सीखना जरुरी है जिंदगी में :- चलिए ऊपर उठें और आभारी रहे, क्योंकि अगर हमने बहुत नहीं तो कुछ तो सीखा, और अगर हमने कुछ भी नहीं सीखा, तो कम से कम हम बीमार तो नहीं पड़े, और अगर हम बीमार पड़े तो कम से कम हम मरे नहीं; इसलिए चलिए हम सभी आभारी रहे |

Ø स्वयं से अधिक प्रेम आपको कोई कभी नहीं कर सकता :- पूरे ब्रह्माण्ड में किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश कर सकते हैं जो आपसे अधिक आपके प्रेम और स्नेह के लायक है, और वह व्यक्ति आपको कहीं नहीं मिलेगा | जितना इस ब्रह्माण्ड में कोई और आपके प्रेम और स्नेह के अधिकारी है, उतना ही आप खुद हैं |

Ø ज्ञान का सही मतलब सिर्फ हमें पता है:- कोई व्यक्ति इसलिए ज्ञानी नहीं कहलाता क्योंकि वह सिर्फ बोलता रहता है; लेकिन अगर वह शांतिपूर्ण, प्रेमपूर्ण और निर्भय है तो वह वास्तव में ज्ञानी कहलाता है |


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