आपने इस बात पर गौर किया है कि एक व्यवसाय द्वारा किसी उत्पाद की जानकारी आप तक कैसे पहुंचाई जाती है? जानकारी को खरीददार तक पहुंचाने के लिए व्यवसाय कई मार्ग अपनाते है । उन्हीं सब मार्ग में से सबसे सफल सटीक मार्क होता है विज्ञापन के द्वारा जानकारी पहुंचाना । विज्ञापन कई तरीके के होते हैं, जैसे टीवी पर आने वाले जिन्हें हम देख पाते हैं, रेडियो पर बजने वाले जिन्हें हम केवल सुन पाते हैं, तथा अखबार व अन्य पत्रिकाओं में आने वाले जिन्हें हम पढ़ पाते हैं । जिस प्रकार प्राचीन काल में ढोल नगाड़ों के साथ किसी भी नई ताजी खबर का ऐलान किया जाता था, दरअसल आजकल के समय में विज्ञापन की भी वही भूमिका है ।

एक विज्ञापन बनाते समय व्यवस्थाओं को यह ध्यान में रखना चाहिए की वह कम से कम शब्दों प्रयोग करके उत्पाद की ज्यादा से ज्यादा जानकारी दे पाए । यह ही नहीं बल्कि विशेष ध्यान विज्ञापन के आकर्षक होने पर भी देना चाहिए । अगर कोई विज्ञापन उबाऊ होगा व उसके अंदर रोचकता का अभाव होगा तो वह खरीददार का ध्यान अपनी तरफ खींचने में और असफल रहेगा ।

अगर वह विज्ञापन टीवी या अखबार पत्रिका आदि के लिए बनाया गया है तो उसमें उचित रंगों का प्रयोग करना आवश्यक है । जो रंग व्यवसाय के लोगो से मिलते जुलते हो तथा उत्पाद की प्रवृत्ति के संग जाएं ऐसे रंगों का प्रयोग करना लाभदाई रहता है । और यदि वह विज्ञापन रेडियो के लिए हो तो उसके अंदर प्रयोग में लाए जाने वाली ध्वनियों पर खास ध्यान देना जरूरी है । व्यवसाय की टैगलाइन का विज्ञापन में प्रयोग करना खरीददार के मन में अपनी छाप छोड़ जाता है, जिससे उत्पाद की एक छवि उसके मन में पड़ जाती है ।

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इस बात में कोई दो राय नहीं कि मार्केटिंग खरीददार एवं व्यवसाय दोनों के लिए फायदेमंद होती है । मार्केटिंग के ज़रिये उपभोक्ता अपनी सारी ज़रूरतों को पूरा कर सकता है वह भी सही कीमत देकर। मार्केटिंग व्यवसाय के लिए उनकी बिक्री की क्षमता बढ़ाती है वहीं दूसरी ओर खरीदारों का जीवन आरामदायी होता है। यही नहीं बल्कि मार्केटिंग निम्नलिखित कई और रूपों से खरीददार के लिए सहायक होती है ।

1. उत्पाद की जानकारी:

मार्केटिंग द्वारा खरीददार को बाजार में आने वाले नए-नए उत्पादों के बारे में जानकारी निरंतर मिलती रहती है । इस जानकारी के द्वारा खरीदार अलग-अलग उत्पादों को इस्तेमाल कर उनमें से अपना मनपसंद उत्पाद का चुनाव कर सकते हैं ।

2. उत्पाद की पहचान:

मार्केटिंग का एक भाग होता है ब्रांडिंग । ब्रांडिंग उस उत्पाद को एक अलग पहचान देती है । उस उत्पाद के रंग आकार वजन अथवा का निर्णय ब्रांडिंग के अंतर्गत ही किया जाता है । इसी भिन्नता के कारण कई उत्पादों के बीच खरीददार अपना मनपसंद उत्पाद आसानी से ढूंढ सकते हैंl

3. जरूरतों की पूर्ति

मार्केटिंग के अंतर्गत उत्पाद का निर्माण खरीदारों की जरूरतों को मध्य नजर रखकर किया जाता है । ऐसे में जो भी नया उत्पाद बाजार में लाया जाता है वह खरीददारों की जरूरत को अवश्य ही पूरा करता है । अतः जो भी उत्पाद ज्यादा से ज्यादा खरीदारों की ज्यादा से ज्यादा जरूरतों को पूरा कर पाता है वह बाजार का सर्वश्रेष्ठ उत्पाद साबित हो जाता है ।

4. उचित कीमत:

मार्केटिंग ऐसा यंत्र है जो व्यवसाय उनको उत्पाद के लिए उचित कीमत करने पर मजबूर कर देता है । इसी कारण वह अपने फायदे के लिए खरीददार से सीमा के ऊपर कीमत नहीं मांग सकते । अवश्य ही मार्केटिंग कीमत के मामले में खरीदार के लिए फायदेमंद साबित होती है ।

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1. बिक्री में बढ़ोतरी:

मार्केटिंग के अंतर्गत बनने वाले उत्पाद खरीदारों की जरूरतों को जानकर बनाए जाते हैं । ऐसे में वह खरीदारों की उम्मीदों पर खरे उतरते हैं । इसी कारण व्यवसाय अपनी बिक्री में बढ़ोतरी देख पाते हैं । यह तो जाहिर सी बात है, अगर कोई उत्पाद खरीददार की जरूरत के मुताबिक नहीं होगा तो खरीददार द्वारा वह उत्पाद इस्तेमाल किए जाने का सवाल ही नहीं उठता ।

2. अधिक मुनाफा:

यह बात प्राकृतिक है कि यदि उत्पाद को बनाने की पर यूनिट लागत एक समान रहे तथा बिक्री में बढ़ोतरी हो तो कोई भी व्यवसाय अधिक मुनाफा कमाने से नहीं चूकेगा । मार्केटिंग द्वारा बढ़ी हुई बिक्री का लाभ व्यवस्थाओं को फायदे के रूप में अवश्य ही प्राप्त होता है l

3. अन्य व्यवसाय से प्रतिस्पर्धा

एक व्यवसाय की मार्केटिंग स्ट्रेटजी उसे अन्य व्यवस्थाओं के उत्पाद को टक्कर देने की क्षमता प्रदान करती है । जब बाजार में चल रहे बदलावों को समझ कर एक मार्केटिंग स्ट्रेटजी बनाई जाती है तो वह उत्पाद को एक अलग पहचान देने में काबिल रहती है । ऐसा इसलिए क्योंकि सूझबूझ द्वारा निर्मित स्ट्रेटजी अन्य उत्पादों की कमियों की पूर्ति अपने उत्पाद मैं पूर्ण करती है जिससे एक व्यवसाय के उत्पाद को प्रतिस्पर्धा में बढ़त का मौका देती है ।

4. नए उत्पादों की रचना:

मनुष्य की जरूरत है अनंत होती हैं तथा उन पर रोक लगाना नामुमकिन होता है । अगर व्यवसाय इन्हीं बदलती जरूरतों को समझते जाएं तो वह आसानी से बाजार में नए-नए उत्पादों को ला सकते हैं । ऐसा करने से एक व्यवसाय सबसे पहले मनुष्य की जरूरत को पूरा करने की और प्रथम चरण उठा सकता है । इसे फर्सट मूवर एडवांटेज कहा जाता है, यानी बाजार में होने वाले बदलावों को सबसे पहले पहचान कर, सबसे पहले उसका फायदा उठाना ।

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अगर आप बाजार में सामान खरीदने जाते हैं तो आपको दुकान से कौन से ब्रांड का चयन करना है और कौन सा ब्रांड नहीं खरीदना यह सब छोटी छोटी बातें पहले से ही आपके मन में निर्मित होती हैं । उपभोक्ता व्यवहार को समझना दरअसल खरीददारों के उत्पाद के प्रति राय तथा व्यवहार को समझना होता है । किसी भी नए उत्पाद को बाजार में उतारने से पहले विपणन विशेषज्ञ उपभोक्ता व्यवहार को गहराई से पर रखते हैं । इसमें विपणन अनुसंधान बहुत काम आती है ।

कितने खरीदार मध्यमवर्गीय हैं, कितने खरीददार बुजुर्ग हैं, खरीददार वैवाहिक हैं आदि ऐसे प्रश्नों के उत्तर को खोज कर ही विपणन विशेषज्ञ अपने नए उत्पाद के ' कस्टमर बेस ' का बखान कर सकते हैं ।

विपणन अनुसंधान बहुत ही गहराई से सारी बारीकियों को मध्य नजर रख करी जाती है । अगर ऐसा करने में हल्की सी भी भूल होती है तो उपभोक्ता व्यवहार को समझने में गलतियां होना लाजमी है । और अंततः उपभोक्ता व्यवहार को समझने में की गई गलतियां उत्पाद के असफल हो जाने को बुलावा देती हैं । यह रिसर्च का कार्य बाजार में उत्पाद के लाने तक ही सीमित नहीं होता । एक बार अगर खरीददार वह उत्पाद खरीदें तो अनुसंधान उत्पाद के बारे में उपभोक्ता की राय जानने में भी सहायक होती है । यह राय आगे चलकर उत्पाद में बदलाव लाने के लिए बहुत काम आती है ।

यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि विपणन अनुसंधान का सटीक होना ही एक व्यवसाय के सफल होने का मार्ग है । इसीलिए इस अनुसंधान के चलते उत्तम से उत्तम तरीके वह तकनीक का इस्तेमाल करना भी अनिवार्य होता है । विपणन अनुसंधान ही मामूली से उत्पाद को विश्व प्रसिद्ध बनाने की क्षमता रखता है ।

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किसी भी उत्पाद या सेवा का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति उसका उपभोक्ता कहलाता है । उपभोक्ता व्यवहार विपणन का वह भाग है जिसके अंतर्गत मनुष्य के एक उपभोक्ता होने के व्यवहार वह बाजार में लेनदेन के व्यवहार को गहराई से पढ़ा जाता है । उपभोक्ता कैसी वस्तु, कितनी मात्रा में, खरीदता है वह कैसे रंग, कैसा आकार उसे उत्पाद की ओर आकर्षित करता है यह सब उपभोक्ता व्यवहार का ही भाग है ।उपभोक्ता व्यवहार, सम्पूर्ण मानवीय व्यवहार का एक अभिन्न हिस्सा है जिसके अंतर्गत उपभोक्ता अपनी अपेक्षित इच्छाओं को पूरा करने के लिए बाजार में वस्तुओं तथा सेवाओं को खोजते है । उत्पाद या सेवा चयन तथा उनके बारे में निर्णय लेने की प्रक्रिया में उपभोक्ता का व्यवहार अनेक घटकों से प्रभावित हेाता है। जैसे- आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक आदि।

यह इस तरह के लोगों की आवश्यकताओं को समझने की कोशिश में जनसांख्यिकी और व्यवहार चर के रूप में व्यक्तिगत उपभोक्ताओं की विशेषताओं का अध्ययन करता है। जनसंख्या को छोटे-छोटे भाग में बांटकर उनका अध्ययन किया जाता है और इस अध्ययन के अनुसार ही शोध का फल उत्पाद व सेवा के विपणन में सहायक होता है । अगर कोई व्यवसाय या व्यापारी बिना अपने खरीददार की जरूरतों व व्यवहार को जाने बिना ही उत्पाद या सेवा प्रदान करना शुरू करेगा तो उसके इतने मेहनत द्वारा बनाए गए उत्पाद के बाजार में विफल हो जाने की संभावना बढ़ जाती है ।

मनुष्य की सोच विचार आयु आए आदि में बदलाव आना स्वाभाविक है ऐसे, कंपनियां आम तौर पर उन्हें बदलने की कोशिश करने के बजाय अपने उत्पादों या सेवाओं को मौजूदा विचारों में समायोजित करने का प्रयास करती हैं। ऐसा करने से उनके उत्पाद का स्वागत बाजार में अभिनंदन पूर्वक किया जाता है और विपणन विशेषज्ञों की मेहनत का फल व्यवसाय को हुए फायदे में अवश्य ही दिखता है ।

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इस कांसेप्ट का मतलब समझने के लिए इसके नाम का खंडन करना आवश्यक है l यह नाम दो महत्वपूर्ण शब्दों के मेल से बनाया गया है

पहला, सोसाइटल जिसका अर्थ है हमारी समाज यानी कि आसपास के वातावरण से संबंधित होना ।

दूसरा मार्केटिंग, जिसका अर्थ है खरीददारों की जरूरतों को नजर में रखकर उत्पाद बनाना, उन्हें उन तक पहुंचाना तथा उनकी उत्पाद संबंधित सभी समस्याओं को हल करना l

इसीलिए सोसाइटल मार्केटिंग का अर्थ है किसी भी व्यवसाय को अपने उत्पाद की मार्केटिंग, उत्पादन एवं प्रमोशन इस प्रकार करनी चाहिए कि वह हमारे आस पास के वातावरण के ऊपर भारी न पड़े । इसको बेहतर तरीके से समझने के लिए एक उदाहरण यह होगा कि कई सारे व्यवसाय अपने उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रकृति से अधिक मात्रा में संसाधन ले लेते हैं जैसे खनिज, तेल आदि इसी कारण कई सारे देशों में इनकी कमी पैदा होने लगी है । ऐसी परिस्थिति में सोसाइटल मार्केटिंग कॉन्सेप्ट व्यवस्थाओं को प्रकृति से खिलवाड़ करने से रोक सकता है ।

सोसाइटल मार्केटिंग कॉन्सेप्ट मार्केटिंग फिलॉस्फी का पांचवा कांसेप्ट है । यह कॉन्सेप्ट मार्केटिंग कॉन्सेप्ट के बाद बनाया गया है । आजकल के समय में हर व्यवसाय को इस कांसेप्ट को ध्यान रख अपने कार्यों को संचालित करना चाहिए । ऐसा ना करने से और नियमों का उल्लंघन करने से व्यापारियों को कड़ा जुर्माना भी भरना पड़ सकता है । सोसाइटल मार्केटिंग कॉन्सेप्ट को अपने संचालन में लाना एक व्यवसाय की जिम्मेदारी होती है और संचालन के समय या फिर निर्णय लेने के समय पर देश की जनता, संसाधन, वातावरण, व अन्य अहम चीजों का ध्यान रखना चाहिए । इस कांसेप्ट के अंतर्गत ना केवल व्यवसाय के विकास को बढ़ावा दिया गया है बल्कि पूरे समाज की उन्नति को भी महत्वपूर्ण माना गया है ।

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मार्केटिंग एक ऐसा विषय है जो समय के साथ धीरे-धीरे विकसित हुआ है । मार्केटिंग कॉन्सेप्ट के आने से पहले तीन और कांसेप्ट आए और उन कांसेप्ट में आए हुए बदलाव के कारण ही हम आज मार्केटिंग से परिचित हैं । मार्केटिंग कांसेप्ट मार्केटिंग फिलॉसफी का चौथा कांसेप्ट है ।

1. प्रोडक्शन कांसेप्ट यानी उत्पादन कॉन्सेप्ट

यह कॉन्सेप्ट मार्केटिंग फिलॉसफी का सबसे पुराना कॉन्सेप्ट है । इसकी शुरुआत तेजी से बढ़ रही जनसंख्या व औद्योगिकरण के चलते हुई । इस कांसेप्ट का मूल अर्थ यही था कि बढ़ती हुई मांग को पूरा किया जाए ।

2. प्रोडक्ट कॉन्सेप्ट यानी उत्पाद कांसेप्ट

यह उत्पादन कॉन्सेप्ट के बाद आया कॉन्सेप्ट था और इसका मूल अर्थ यही था मांग को तो पूरा किया ही जाए मगर जितने भी उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हो वह सब बेहतर तरीके से व साधनों द्वारा ही बनाया जाए ।

3. सेलिंग कांसेप्ट यानी बिक्री कॉन्सेप्ट

इस कांसेप्ट के अंतर्गत यह माना जाता था कि जब तक खरीददार को बाजार में आए उत्पाद तक लाया ना जाए उसके बारे में बताया ना जाए, तब तक वह उस उत्पाद को नहीं खरीदेगा । इसी के चलते सेलिंग कॉन्सेप्ट में व्यापारियों ने छूट, विज्ञापन, पोस्टर आदि का इस्तेमाल कर खरीदारों को अपने उत्पाद की ओर आकर्षित किया । इस कांसेप्ट का केंद्र इसलिए सेलिंग ही रहा ।

4.मार्केटिंग कॉन्सेप्ट यानी विपणन कॉन्सेप्ट

मार्केटिंग कॉन्सेप्ट के अंतर्गत पिछले सारे कॉन्सेप्ट की भूलों को सुधारा गया । इस कांसेप्ट मैं खरीददारों की जरूरतों को पहचान कर उत्पाद निर्मित किया गया वह उचित प्रमोशन तकनीक द्वारा उत्पाद के बारे में खरीददार को बताया और बेचा । यह ही नहीं बिक्री के बाद व्यवस्थाओं में कस्टमर सर्विस का चलन भी शुरू किया गया । ' खरीददार एक राजा है ' इस बात का चलन मार्केटिंग कॉन्सेप्ट के बाद आया ।

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इस बात में कोई दो राह नहीं की एक व्यवसाय की सफलता का कारण उसके विपणन के लिए गए निर्णय पर निर्भर करता है l मगर ऐसा क्यों होता है यह जानना भी अति आवश्यक है l आखिर क्यों मार्केटिंग या विपणन व्यवसाय की एक सशक्त नीव डालने में सहायक होती है l इसके कई कारण हैं:

1. खरीदारों की जरूरत को समझना:

एक विपणन योजना बनाने से पहले अपने उत्पाद के खरीददार की जानकारी होना बहुत जरूरी है l उनकी पसंद ना पसंद उनके खर्च करने की क्षमता आदि यह कुछ ऐसी चीजें हैं जो विपणन योजना बनाने से पहले जानी चाहिए l और तब ही कोई व्यवसाय एक ऐसा उत्पाद बाजार में ला सकेगा जो खरीददार की जरूरत को पूर्ण करेगा l

2. लागत में बचाव:

एक उपयोग वितरण योजना अगर बहुत ही सावधानी से बनाई जाए तो वह उत्पादन में आने वाली लागत को कम से कम रख सकती है l इससे व्यवसाय में खर्चों में गिरावट आएगी l

3. अन्य व्यवस्थाओं से प्रतिस्पर्धा:

बाजार में एक उत्पाद के अनेक विक्रेता मौजूद होते हैं l एक उत्तम विपणन योजना किसी भी व्यवसाय के उत्पाद को विभिन्न विशेषताएं प्रदान करती है जिससे उस उत्पाद को बाजार में एक अलग ही पहचान मिल पाती है और अन्य विक्रेता से वह आगे निकल सकता है l

4. बिक्री में बढ़ोतरी:

जब एक उत्पाद खरीदार की जरूरतों को देखकर बनाया जाता है तो वह बाजार में सफल साबित होता है l यही नहीं इसी कारण खरीदार भी अन्य उत्पादों के ऊपर उनके जरूरत के उत्पाद को ही महत्व देते हैं l



5. नए उत्पाद का बाजार में आना:

एक अच्छी विपणन योजना के लिए बाजार पर नजर रखना अनिवार्य हैl इससे किसी भी व्यवसाय को भविष्य में होने वाले बदलावों का पता पहले ही लग सकता है और वह उसी अनुसार नए उत्पाद की रचना का कार्य आरंभ कर सकते हैंl

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मार्केटिंग मिक्स! मार्केटिंग मिक्स विपणन मिश्रण किसी भी व्यवसाय की सफलता की कुंजी है! कुल मिलाकर यह मिक्स मार्केटिंग के अंतर्गत आने वाले 4 अहम चीजों का उपयुक्त मिश्रण है l यह मिश्रण हर व्यवसाय के लिए उसके संसाधन, वित्तीय क्षमता, उत्पादन को देखकर ही बनाया जाता है! इसके अंदर आने वाले 4 भाग हैं:

1. उत्पाद मिश्रण (प्रोडक्ट)

उत्पाद यानी वह वस्तु जो एक व्यवसाय अपने खरीददारों तक पहुंचाने की आशा रखता है l हर व्यवसाय का उत्पाद एक दूसरे से रंग, आकार, वजन आदि के आधार पर भिन्न होता है l और यही सब विभिन्न विशेषताओं के कारण उत्पादों को एक अलग पहचान मिलती है l

2. कीमत मिश्रण (प्राइस)

मार्केटिंग मिश्रण के अंतर्गत प्राइस या कीमत आने का अर्थ है अपने उत्पाद की कीमत को तय करना l यह कीमत बाजार में चल रहे बदलावों को मद्देनजर रखकर तय की जाती है l यह ही नहीं बल्कि उत्पाद पर मिलने वाली अलग-अलग तरीकों की छूट का निर्णय भी कीमत मिश्रण के अंतर्गत लिया जाता है l

3. स्थान मिश्रण (प्लेस)

स्थान मिश्रण का अर्थ है हमारे उत्पाद की जगह-जगह पर मौजूदगी रहना l किस-किस जगह पर हमारा उत्पाद किस-किस के द्वारा पहुंचाया व बेचा जाएगा इस सब का निर्णय स्थान मिश्रण के अंतर्गत लिया जाता है l यदि हमें थोक विक्रेता या खुदरा विक्रेता द्वारा अपना उत्पाद बाजार में बेचना है तो इस बात का निर्णय स्थान मिश्रण के जानकार ही लेंगे l

4. प्रमोशन मिश्रण

प्रमोशन मिश्रण विपणन मिश्रण का वह भाग है जो हमारे उत्पाद की जानकारी लोगों तक पहुंचाता है l यह विपणन मिश्रण का सबसे महत्वपूर्ण भाग है l ऐसा इसलिए क्योंकि हमने अपने उत्पाद को कितनी ही विशेषताओं से नवाजा हो, कितनी ही उत्तम कीमत क्यों ना तय की हो, जब तक लोगों को उसके बारे में जानकारी ही नहीं होगी तो उसकी बिक्री भी नहीं हो पाएगी l

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एक व्यवसाय का विपणन करना कोई खेल की बात नहीं है l उनका कौशल आने के लिए तजुर्बे तथा सतर्कता की अत्यंत आवश्यकता होती है l अगर विपणन के निर्णय ढंग से ना लिए जाएं तो किसी भी व्यवसाय को नुकसान की ओर धकेल सकता हैl एक विपणन विशेषज्ञ के लिए निम्नलिखित कौशलों की अत्यंत आवश्यकता होती है:

1. बातचीत का कौशल:

अगर कोई व्यक्ति ढंग से बातचीत नहीं कर पाता तो उसका एक विपणन विशेषज्ञ बनना मुश्किल हो जाता है l एक विपणन विशेषज्ञ को उत्पाद की जानकारी देना तथा लोगों के प्रश्नों का उत्तर देना आना चाहिए, वरना व्यवसाय पर से लोगों का विश्वास उठता जाएगा l

2. आकर्षक व्यक्तित्व:

विशेषज्ञ बनने के लिए मनुष्य का व्यक्तित्व बहुत ही आकर्षक होना चाहिए l एक प्रभावशाली व्यक्ति ही लोगों को मोह कर उन्हें अपने उत्पाद की ओर खींच सकता है l जब कोई उत्तम व्यक्तित्व वाला व्यक्ति पूरे व्यवसाय का प्रतिनिधित्व करता है तो इससे व्यवसाय का नाम ऊंचा होता है l

3. शारीरिक स्वच्छता का होना:

कोई व्यक्ति अगर अस्त-व्यस्त ढंग से आपके समक्ष प्रस्तुत हो तो उसके व्यक्तित्व की छवि आपके मन में नकारात्मक ही बनेगी l इसीलिए विपणन विशेषज्ञ बनने के लिए एक व्यक्ति को अपने शारीरिक स्वच्छता तथा तैयार रहने के ढंग पर खासतौर से ध्यान देना चाहिए l

4. बाजार की जानकारी:

विपणन विशेषज्ञ वही व्यक्ति बन सकता है जिसको बाजार में चल रहे बदलावों की जानकारी हो और वह उस जानकारी को प्रयोग में लाकर व्यवसाय की सफलता के लिए उत्तम निर्णय ले l एक सतर्क व्यक्ति ही एक सफल विपणन विशेषज्ञ बन सकता है l

5. रचनात्मक सोच :

उत्पाद को बाजार में उतारने से पहले बहुत से सोच विचार आने की जरूरत पड़ती है जिसके लिए व्यक्ति का रचनात्मक होना अनिवार्य है l कोई उबाऊ खयालो वाला व्यक्ति एक अच्छा विपणन विशेषज्ञ नहीं बन सकता l

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अगर मैं आपके सामने यह प्रश्न रखूं की सेल्स और मार्केटिंग में से क्या ज्यादा महत्वपूर्ण है तो आपका उत्तर क्या होगा? अगर आप कहते हैं सेल्स तो आप चूक गए हैं वह इसलिए क्योंकि सेल्स मात्र उत्पाद का लेन देन है और वहीं दूसरी ओर मार्केटिंग ऐसी गतिविधि है जिसके अंतर्गत सेल्स नहीं बल्कि और भी कई सारी गतिविधियां शामिल है जैस ब्रांडिंग, प्रमोशन, तथा एडवरटाइजिंग I

मार्केटिंग और सेल्स के विषय में जो लोग इतना ज्ञान नहीं रखते उनके लिए सेल्स ही महत्वपूर्ण होगी क्यूंकि असल में व्यापार को फायदा तो सेल से ही होता है लेकिन उन सेल्स तक पहुंचने के लिए उत्पादन की मार्केटिंग करना भी उतना ही जरूरी है जितना शरीर के अंगों को चलने के लिए रक्त का रगों में बहना l मार्केटिंग एक ऐसा यंत्र है जिसके द्वारा एक व्यापारी अपने खरीददार के मन में झांक अपने उत्पादन में बदलाव ला सकते हैं l इस बदलाव के कारण खरीददारों की सेवा बड़ी ही आसानी से कर पाएंगे अगली बार वह खरीददार उसी व्यापारी के उत्पादन का चयन करेगा l

इसीलिए बार-बार एक खरीददार को अपने उत्पादन की ओर खींच लाने के लिए मार्केटिंग अत्यंत ही आवश्यक है l मगर यह कार्य भी ध्यान पूर्वक करना जरूरी है क्योंकि कुछ गलती के कारण ही व्यापारी अपना व्यापार खो सकता है l सेल्स और मार्केटिंग व्यवसाय के वह दो अटूट भाग हैं जिनके बिना व्यवसाय में फायदा होना तो दूर की बात, बाजार में टिके रहना भी बड़ी बात होगी l इतना ही नहीं बल्कि इनकी महत्ता इतनी ज्यादा है कि देश भर के महाविद्यालयों में यह दो विषयों की तरह पढ़ाए जाते हैं विश्व भर में कई सारी किताबें इन दो श्रेणियों को ही समर्पित है एक अच्छी मार्केटिंग और सेल्स नीति ही एक डूबते हुए व्यवसाय की नौका को पार लगा सकती है l