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माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगाएं। बच्चे ज्यादा से ज्यादा समय पढ़ाई पर लगाएं, इसलिए माता-पिता अक्सर उनके खेल के समय में कटौती कर देते हैं । कई माता-पिता तो खेलकूद को केवल समय की बर्बादी मात्र मानते हैं। पढ़ाई के लिए बच्चों को प्रेरित करना अच्छी बात है, पर उन्हें खेलकूद से दूर रखना आपकी भूल साबित हो सकती है।

कैसे?

इसका जवाब आपको नीचे लिखे बिंदुओं में मिलेगा। इस लेख में हम बच्चों के जीवन में खेलकूद के महत्व के बारे में बात कर रहे हैं। इन बिंदुओं पर गौर करने के बाद आप की सोच जरूर बदल जाएगी, और आप स्वयं बच्चों को खेल के लिए प्रेरित करेंगे :

शारीरिक मजबूती

खेल बच्चों को मजबूत बनाते हैं। इससे उनकी शारीरिक श्रम करने की क्षमता बढ़ती है, एवं वह अधिक सक्रिय रहते हैं। श्रम करने की आदत आगे जाकर उनके लिए फायदेमंद साबित होगी, जिससे किसी भी काम को करने में शारीरिक कमजोरी उनके लिए बाधा नहीं बनेगी। खेल के दौरान गिरना एवं चोट लगना उनके दर्द सहने की क्षमता को बढ़ाता है, उन्हें अधिक सहनशील बनाता है।

मानसिक विकास

भविष्य में जीवन के संघर्षों के सामने टिक पाने के लिए आवश्यक है कि बच्चे मानसिक रूप से भी मजबूत हो। खेल की रणनीति पर चिंतन - मनन बच्चों में बच्चे मानसिक श्रम करते हैं। खेल से मिली हार उन्हें चुनौतियों का सामना करने, एवं हार स्वीकार करने के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।

आजकल की फास्ट लाइफ में हमारी प्राथमिकताएं बदल गयी है। सुबह उठते ही हम अपनी ज़रूरतों को पूरा करने में जुट जाते हैं, और इसमे इतने व्यस्त हो जाते हैं, कि बाकी चीजों का ख्याल ही नहीं आता। ऐसे में जो चीज़ें सबसे ज्यादा नज़रंदाज़ की जाती हैं, वो है स्वास्थ। न सोने का ठिकाना, न खाने का। हम सोचते हैं इससे फर्क ही क्या पड़ जाएगा। लेकिन फर्क तो बहुत पड़ता है। इसीलिए आज ही एक अच्छी आदत बनाइये, और अपने खाने का समय निश्चित करें

यदि आपको भी लगता है कि इसका कोई फायदा नहीं, तो नीचे बताये गए तथ्यों को पढ़कर आप अपने खान पान के समय को लेकर अवश्य सजग होंगे।

✴ खाने को ग्रहण करने से पहले पेट उसके पाचन के लिए स्वयं को तैयार करता है। जब हम रोज़ निश्चित समय पर भोजन करते हैं, तब पेट उस समय भोजन ग्रहण करने के लिए पूरी तरह तैयार होता है जिसके परिणाम स्वरूप भोजन का पूर्णतः पाचन होता है। वहीं कभी भी किसी भी समय खा लेने से पेट में आंशिक रूप से पचा हुआ भोजन पहले से मौजूद होता है, उसके उपर से दोबारा भोजन कर लेने से पाचन शक्ति कमज़ोर होती है और वायु, अफरा, पेट फूलना, खट्टी डकारें जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

✴ खाने का समय तय करने से आपकी दिनचर्या में स्थिरता आती है। इसे एक उदाहरण से समझिये। जब यह तय होगा कि सुबह 9 बजे आपको नाश्ता करना ही है, तब आपको उसके हिसाब से उठने, नहाने आदि का समय भी निश्चित करना ही होगा। इसी प्रकार दोपहर और रात के खाने के समय को बरकरार रखने के लिए बाकी काम आपको समय पर करने होंगे। इससे आपका पूरा दिन अनुशासित हो जाएगा जिसका अच्छा असर आपके स्वास्थ पर पड़ेगा।

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अकसर हम अपनी मुश्किलों, अपने सवालों का हल बाहर (दुनिया) में तलाशने की कोशिश करते हैं। जबकि सच तो ये है कि सारे जवाब ख़ुद आपके अंदर ही छिपे होते हैं। ज़रूरत है सही तरीके से ढूँढने की। और इसमे आपकी मदद करेगा, ध्यान।।

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ध्यान वह क्रिया है, जो अंतर्मन को जागृत कर इसे अवचेतन स्तर पर विचरवान बनाती है। ध्यान शरीरिक एवं मानसिक स्वास्थ दोनों का परिचायक है।

सुबह के सुंदर समय में ध्यान लगा कर बैठने से आप कई लाभ उठा सकते हैं। क्यों करना चाहिए ध्यान, आइए जानें :

जीवन की अस्थिरता को स्थिरता प्रदान करता है ध्यान।

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इस भागदौर भरी जिंदगी में मानसिक असंतुभ स्वभाविक है। सुबह सुबह ध्यान की मुद्रा में बैठकर जब आप अंतर्मन में झांकते हैं, तब आपको आपकी सारी उलझनों के हल मिलते दिखेंगे। यह स्पष्टता जीवन में स्थिरता का आधार बनेगी।

तनाव और शरीरिक दर्द से राहत

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केवल ध्यान ही आपके तनाव को काफी हद तक कम कर सकने में कारगर है। तनाव तब पैदा होता है जब किसी कारणवश आप दुःख, चिंता, अथवा असमंजस की स्तिथि में होते हैं। ध्यान आपको शांत करता है, चिंताओं से मुक्त कर शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है। साथ ही मानसिक खीचातानी के परिनामस्वरूप उत्पन्न शरीरिक दर्द से भी राहत दिलाता है।

✴ जिन बुरी आदतों से हैं आप परेशान, उन्हें छोड़ना बन जाएगा आसान

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ध्यान की स्तिथि में मन में सकरामकता का प्रवाह होता है। आप अच्छी चीजों से मिले सुख की तरफ खिचे चले जाते हैं। इससे स्व जागरुकता आती है, जिससे बुरी आदतों को छोड़ देने की इच्छाशक्ति और प्रबल हो जाती है।

तो आज से ही, ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

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सो कर जागने के बाद आप क्या करते हैं? कितने बजे हैं यह देख कर फिर सो जाते हैं? या मोबाइल चेक करते हैं?अथवा चाय या कॉफी लेते हैं?

अगर आप यह सब करते हैं, तो छोड़ दीजिये। अब आप पूछेंगे क्यों? तो वो इसीलिए, क्योंकि कुछ बहुत अच्छा है, जो आपका इंतज़ार कर रहा है।

वह है ध्यान।।

ध्यान वह क्रिया है, जिसमें आप अपने अंदर के तत्व को जानने, समझने एवं साधने की कोशिश करते हैं। आयुर्वेद ने हज़ारों साल पहले जिस ध्यान के महत्व को समझाया, आज उसे आधुनिक विज्ञान ने भी मना है। ज़िंदगी में कई ऐसे सवाल, कई ऐसी उलझनें होती हैं, जिनका हल हमें नहीं मिलता, ध्यान उन सभी का उत्तर देता है।

ध्यान का सबसे उत्तम समय सुबह का समय है। सुबह के समय ध्यान करने के है अनेकों लाभ:

⚫ सुबह के ध्यान से मिलेगा श्वास संबंधी बिमारियों से निजात

सुबह सुबह वायुमंडल में प्रदूषण बहुत कम होता है। इस समय आपको साफ वातावरण में सांस लेने का मौका मिलता है। ध्यान करते वक़्त श्वास पर नियंत्रण रखने से कई बिमारियाँ, जैसे दमा, उच्च रक्तचाप इत्यादि जैसी बीमारियों से आराम मिलेगा।

⚫ सकारात्मकता की ओर जाने की प्रेरणा मिलती है।

पहले केवल एक दिन सुबह जल्दी उठ कर ध्यान करें। आप ख़ुद अनुभव करेंगे कि वह समय इतना अद्भुत होता है, कि आपको अंदर से प्रसनता का आभास होगा, ईश्वर और प्रकृति के करीब होने का एहसास होगा। खुद ब खुद आपका मन कुछ अच्छा करने, स्वास्थ्य वर्धक भोजन करने को करेगा।

⚫ तनाव दूर होता है, बढ़ती है एकाग्रता

ध्यान के अनेको लाभ हैं। इससे तनाव दूर होकर मन को शांति मिलती है, शरीर के दर्द दूर होते हैं, एकाग्रता बढ़ती है एवं आप खुद को शांत, सुलझे और स्थिर पाते हैं।

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आजकल के समय में जहाँ सब इतने जागरूक हैं, योग एवं व्यायाम की अहमियत कौन नहीं जानता। हम सब जानते हैं कि नियमित व्यायाम हमें बीमारियों से बचा कर रखता है, उत्तम स्वास्थय के लक्ष्य तक पहुंचाता है, और हमें मानसिक शांति प्राप्त कराता है। इतने सारे फायदों को जानने के बावजूद भी हम इसे अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में शामिल नहीं कर पाते हैं।

कुछ लोग शुरुआत तो करते हैं, पर कुछ दिन बाद वे भी पीछे हट जाते हैं। इसका कारण है सही दिशा एवं प्रेरणा का आभाव। यदि आप सच्ची कोशिश करेंगे, तो सफल ज़रूर होंगे। इसी सफलता को प्राप्त करने के लिए, नज़र डालें कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर, जो आपको बताती हैं कि कैसे हम व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं:

प्रतिदिन जल्दी उठें और निकालें कम से कम आधा घंटा।
व्यायाम के लिए सबसे अनुकूल समय सुबह का है। सवेरे जल्दी उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त हो कर कम से कम आधे घण्टे व्यायाम करें। यदि आप जल्दी नहीं उठ पाते तो हर दिन 10 मिनट जल्दी जागने का प्रयास करें

संकल्प करें।
जो लोग व्यायाम नहीं करते, उनके लिए इसे नियम बनाना मुश्किल होता है। अतः पहले खुद को मानसिक रूप से तैयार करें कि "मुझे यह करना है"। जैसे दफ्तर जाए बिना आपकी रोज़ी रोटी नहीं चलेगी, समझिये वैसे ही व्यायाम के बिना आपका दिन पूरा नहीं होगाा ।

सरल आसनों से करें शुरुआत।
याद रखें, आसनों को साधने में समय लगेगा। एक ही दिन में सब कुछ कर लेना संभव नहीं है। इसीलिए पहले वही आसान करें, जो आसानी से आपसे हो सकें। एक बार में ही कठिन आसनों को चुन लेना, और उनमे सफलता नहीं मिलने पर आप हतोत्साहित हो सकते हैं। धीरे धीरे निरंतर अभ्यास से जैसे जैसे आपकी प्रगति होगी, वैसे वैसे आपका उत्साह भी बढ़ेगा।

योग करने से चेहरा सूर्य रूपी तेजवान होता है। शरीर बलशाली बनता है तथा शरीर मे लचीलापन आता है।

मस्तिष्क का विकास होता है। जिससे की पढाई मे लगन बनती है ।

रोज़ाना योग करने से शरीर के विकार धीरे-धीरे मिट जाते है।

मासपेशियाँ मज़बूत होती है तथा आलस्य दूर होता है। शरीर मे फूर्ती आती है।

मोटापा कम होता है तथा जीवन आयु काल तक बनी रहती है।

योग करने से पाचन शक्ति बढती है। जिससे पेट के रोग नही होते तथा हमारे शरीर से जहरीले पदार्थ निकल जाते है ।

योग करने से एकागर्ता बढती है। योग हमारे मन मे स्थितरता प्रदान करता है।

योग हमारे मन को शांत रखता है तथा मन को रोकने मे सहायक है।

योग करने से परेशानियाँ, हमारे दिमाग की थकावट दूर होती है।

योग से हमारे शरीर मे शारिरिक शक्तियो का विकास होता है।

योग हमारे शैक्षिक योगयता को बढा देता है जैसै याद करने की क्षमता।

योग का अर्थ है आत्मा का परमात्मा से मिलन।

योग मानव के शरीर को रोग मुक्त करता है तथा आयु बढाता है। योग को सभी उर्म के लोग कर सकते है। योग को घर पर भी किया जा सकता है, आरामदायक कपडो मे और सेहतमंद रहा जा सकता है।

योग बच्चों के लिए बहुत लाभदायक है। बच्चे पढाई मे मन लगा सकते है। उनमे एकाग्रता और याद करने की क्ष्मता बढ जाती है।

योग बडो तथा जवानो के लिए भी फायदेमंद है, बडो की हड्डियों की मरम्मत होती है तथा जवान लोगो मे उर्जा आती है। तथा परेशानियो से लडने की हिम्मत मिलती है।

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हमारे शरीर को पूरी तरह स्‍वस्‍थ रहने के लिए कई सारे पोषक पदार्थों की जरूरत होती है। ये पोषक तत्व अलग-अलग तरह के भोजन से हमें प्राप्त होते हैं, जैसे ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, मेवे, डेयरी उत्‍पाद और मीट आदि से। इनमें सभी की अपनी अहमियत है, इसलिए एक संतुलित आहार में ये सब चीजें होनी चाहिए । यदि इन तत्वों की मात्रा हमारे शरीर में ऊंची नीची हो जाती है तो हमारे स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव दिखना शुरू हो जाता है । जैसे कैल्शियम की कमी से हमारे शरीर में कमजोर आने लग जाती हैं तथा विटामिन ए की कमी के कारण हमारी आंखों पर इसका बुरा प्रभाव होने लग जाता है । इसीलिए हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि हमारी डाइट यानी खान पान सभी तरह के तत्वों से ओतप्रोत होना चाहिए । यही नहीं इन तत्वों की बढ़ी हुई मात्रा प्रभाव बुरा होता है उदाहरण के लिए अगर शरीर में कैल्शियम व प्रोटीन अधिक हो जाए तो मनुष्य को पथरी की बीमारी हो सकती है । इसीलिए हमारा खान-पान पर नियंत्रण रखना अति आवश्यक है ।

हमारा शरीर अपनी ऊर्जा के लिए भोजन पर निर्भर रहता है। हमें अपनी जरूरी शारीरिक गतिविधियों के लिए तमाम तत्‍वों की आवश्‍यकता होती है। ऐसा भोजन जो इन सभी जरूरतों को पूरा कर सके वह संतुलित आहार कहलता है। और यही संतुलित आहार हमारे जीवन का संतुलन बनाने में सहायक होता है । जब तक हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा तब तक हम अन्य गतिविधियां भी अच्छे से कर पाएंगे । इसीलिए अच्छा आहार खाना एक अच्छे शरीर के लिए आवश्यक है ।

अतः हमारा भोजन ऐसा होना चाहिए जिसमें हर तत्व की मात्रा हमारे शरीर के जरूरत के मुताबिक हो ना उससे कम ना उससे ज्यादा । अच्छा खान-पान, स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक है ।

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शरीर के विकास के लिए दो तरीके के तत्व आवश्यक हैं, पहला मैक्रोन्यूट्रिएंट । माइक्रोन्यूट्रिएंट्स वह न्यूट्रिएंट्स या तत्व होते हैं जिनकी जरूरत हमारे शरीर को अधिक मात्रा में होती है । निम्नलिखित वह माइक्रोन्यूट्रिएंट्स है जो हमारे स्वास्थ के लिए अति आवश्यक है ।

प्रोटीन :

प्रोटीन हमारे शरीर में मैकेनिक का काम करता है अर्थात हमारे शरीर होने वाली टूट-फूट की मरम्‍मत और शरीर का विकास करता है। मांसपेशियों से लेकर हमारी नर्व सेल भी प्रोटीन पर निर्भर हैं। यदि किसी हादसे द्वारा हमारी मांसपेशियां या हड्डियों को नुकसान पहुंचता है तो उसे ठीक करने का कार्य प्रोटींस का ही होता है । प्रोटीन न मिले तो गठिया, हार्ट डि‍जीज, गंजापन जैसी तमाम बीमारियां हो जाएं। हमें मीट, अंडों, सी फूड, दूध, दही, दालों, सूखे मेवों से प्रोटीन मिलता है।

कार्बोहाइड्रेट:

शरीर को कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा मिलती है। हमें अपनी हर डाइट में इन्‍हें शमिल करना चाहिए। हमारी दिन भर की गतिविधियों के लिए हमारे खानपान में कार्बोहाइड्रेट का होना आवश्यक है । हमें ऐसे कार्बोहाइड्रेट खाने चाहिए जो धीरे-धीरे शुगर में टूटें। इनमें साबुत अनाज, ब्राउन राइस, दालें, शामिल हैं। इनमें एंटी ऑक्सिडेंट भी भरपूर मात्रा में होते हैं इसलिए ये कैंसर जैसे रोगों से भी हमारी रक्षा करते हैं।

शुगर और फैट:

एक संतुलित आहार में इनकी भी भूमिका है। बहुत सारे विटमिन ऐसे हैं (ए,डी,ई और के) जो फैट के जरिए ही शरीर में अवशोषित होते हैं। फैट और शुगर शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को भी मजबूत करते हैं। मगर इसका अर्थ यह नहीं है कि हम क्षमता को बढ़ाने के लिए शुगर और फैट की मात्रा अपने खान-पान में बढ़ाते जाएं, क्योंकि ऐसा करना कई रोगों को निमंत्रण देने मैं सफल हो सकता है । फैट को घी, तेल, मक्‍खन और शुगर को गुड़, शहद वगैरह से हासिल किया जा सकता है।

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माइक्रोन्यूट्रिएंट्स वह न्यूट्रिएंट्स है जिनकी आवश्यकता हमारे शरीर को कम मात्रा में होती है । मगर इनकी जरूरत की मात्रा का कम होना इनकी अनावश्यकता को सिद्ध नहीं करता । भले ही इनकी आवश्यक मात्रा अन्य नुट्रिएंट्स कम क्यों ना हो मगर हमारे शरीर के स्वास्थ्य के लिए यह मैक्रोन्यूट्रिएंट जितने ही जरूरी है । इनकी कमी होने से भी शरीर का स्वास्थ्य संतुलन बिगड़ सकता है । आइए जाने कुछ बुनियादी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के बारे में, जो एक स्वस्थ शरीर और जीवन का आधार हैं ।

विटामिन :

ताजे फलों और सब्जियों से हमें जरूरी विटामिन मिलते हैं । विटामिन्स शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। विटामिन ए बी सी एवं के कुछ ऐसे विटामिन है जो हमारे शरीर को बहुत प्रभावित करते हैं । विटामिन ए ना होने के कारण हमारी आंखों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है वह हमें नाइट ब्लाइंडनेस यानी रात में ना देख पाने की परेशानी हो सकती है । विटामिन के हमारे खून को पतला व गाढ़ा रखने में सहायक होता है । विटामिन सी की कमी के कारण हमें खासी जुखाम व निमोनिया हो सकता है ।

आयरन

आयरन ही वो खनिज है जिसकी सहायता से रक्त में मौजूद हिमोग्लोबिन ऑक्सीजन को हमारे शरीर में संचारित करता है । आयरन हमारे सम्पूर्ण शरीर में ये ऑक्सीजन पहुँचाने का काम करता है ।

जिंक

आयरन और कैल्शियम की तरह शरीर के कार्य के लिए बहुत जरूरी मिनरल है। जिंक से हमें कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। यह हमारी रोग-प्रतिरोधक प्रणाली, त्वचा के स्वास्थ्य तथा जख्मों के उपचार में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मैग्नीशियम:

खून में मैग्नीशियम की बहुत कम मात्रा में रोकथाम और उपचार के लिए उपयोग किया जाने वाला एक खनिज पूरक है। हमारे हृदय के सही तरीके से काम करने के लिए मैग्नीशियम अतिआवश्यक है ।

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जो चीज खाने में जितनी स्वादिष्ट होती है, वो हमारी सेहत के लिए उतनी ही नुकसानदायक भी होती हैl इनका सेवन करने से कई सारी बीमारियां हमारे शरीर में घर कर जाती हैं । पेट से जुड़ी बीमारियां, हृदय रोग मधुमेह आदि कई घातक बीमारियां जंक फूड के सेवन से होती हैं । उसके बावजूद भी कई लोगों को जंक फूड खाना बेहद पसंद होता है. बाजार में कई तरह के जंक फूड मौजूद हैं, जो कि बच्चों से लेकर नौजवानों तक को खाना खूब पसंद हैंl यह मानना यहां पर गलत नहीं होगा कि जंक फूड के स्वादिष्ट होने के कारण दुनिया भर के लोगों को इसको खाने की लत लग गई है ।

जंक फूड को बनाने के लिए कई तरह की चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. जिससे की ये खाने में काफी स्वादिष्ट बन जाता हैं. लेकिन हम भूल जाते हैं कि जिन चीजों का इस्तेमाल इनको बनाने में किया गया है. वो हमारी सेहत के लिए काफी हानिकारक होती है । उदाहरण के लिए डबल हैमबर्गर खाना हर किसी को पसंद हैं. लेकिन जब आप इसका सेवन करते हैं, तो आप 942 कैलोरी का सेवन कर लेते हैं. यानी बेशक बर्गर खाने में स्वादिष्ट हो लेकिन हानिकारक फैट होने के कारण वो सेहत के लिए उतना ही खतरनाक है. यह ही नहीं बल्कि मिठाइयां खाने में बेहद ही स्वाद लगती हैं मगर एक मात्रा के अधिक उनका सेवन करना मनुष्य को मधुमेह की ओर धकेल देता है ।

जंक फूड उस खाने को कहा जाता है जिसमें अधिक मात्रा में खराब पोषण वाली चीजें, ट्रांस वसा, चीनी, सोडियम और इत्यादि तरह के पदार्थ पाए जाते हैं. आमतौर पर जंक फूड को स्वादिष्ट, आकर्षित, बनाने के लिए उसमें कई खाद्य पदार्थों और रंगों को जोड़ा जाता है जो हमारी सेहत पर बुरा प्रभाव डालती है ।

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ईश्वर से जुड़ने से पहले हमें अपनी अंतरात्मा से जुड़ना होता है या यूं कहें कि जब हम अपनी अंतरात्मा से जुड़ जाते है तो उस अद्भुत ईश्वरीय शक्ति से स्वत: ही जुड़ जाते है और ध्यान हमें अपनी अंतरात्मा से जोड़ता है और हमें ईश्वर के और करीब ले जाता है ।

ध्यान मग्न रहना हमें अद्भुत प्रकाश की ओर बढ़ा ले जाता है जिसको हम अपने शब्दों द्वारा बयां नहीं कर सकते । ध्यान हमारे अनसुलझे प्रश्नों का उत्तर देता है जिनसे हमारा मन तनाव मुक्त रहता है ।

ध्यान मन की एक सहज अवस्था है जिससे हमारे भीतर का खालीपन दूर होता है | ध्यान हमें हमारे वातावरण में छिपी खुशियों से परिचित कराने की क्षमता रखता है और हमारे जीवन का हर पल खुशनुमा हो जाता है जिससे हम वर्तमान में जीना सीख जाते है| जब हमारा मन शांत एंव संतुष्ट होता है तो हमारा मन और एकाग्र हो जाता है जिससे हम कठिनाई की परिस्थितियों को आसानी से पार कर सकते हैं ।

शोध के द्वारा यह बात सामने आई है कि ध्यान लगाना कैंसर हृदय रोग अवसाद समेत कई रोगों में लाभकारी है और ध्यान से कई तरह के रोगों को दूर किया जा सकता है क्योंकि ज्यादातर रोग तनाव और बेचैनी के कारण ही हमारे शरीर में घर कर जाते हैं । ध्यान के माध्यम से हम मन को सकारात्मक एंव तनावमुक्त बना सकते है जिससे की सकारात्मक उर्जा हमारे शरीर में प्रवेश करती है और कई सारे मानसिक व शारीरिक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करने की क्षमता रखता है । ध्यान मग्न रहना वास्तव में ही मनुष्य के जीवन के मार्ग को अत्यंत ही सुखद बना देता है इसी कारण मानव को ध्यान को अपने जीवन का अटूट हिस्सा बनाना चाहिए ।

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योग हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। साथ ही साथ इसके शारीरिक, मानसिक और आधयात्मिक लाभ भी अद्भुत हैं। योग के कुछ लाभ इस प्रकार हैं -

चिकित्सा शोधों से यह साबित हो चुका है कि योग शारीरिक और मानसिक रूप से मानव जाति के लिए वरदान है। जिम में शरीर के खास खास अंगों के लिए व्यायाम किया जाता है परन्तु योग से समस्त अंगों, प्रत्यंगो, ग्रंथियों का व्यायाम होता है जिस से सभी अंग सुचारू रूप से कार्य करते हैं।

योग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते ही हैं। साथ बुढ़ापे ने भी जवान बने रह सकते है। त्वचा चमकदार बनती है। योग मांसपेशियों को पुष्टता प्रदान करते हैं जिस से दुबला व्यक्ति ताकतवर और बलवान बनता है वहीं मोटे व्यक्ति अपना मोटापा काम कर सकते हैं। इस प्रकार योग कृष और स्थूल दोनो पर काम करता है।

योग से मांसपेशियों का व्यायाम होता है जिसके कारण नींद अच्छी आती है तनाव कम होता है और पाचन सही होता है।

प्राणायाम के लाभ-

प्रणायाम में श्वास तथा प्रश्वास पर नियंत्रण किया जाता है। जिससे श्वसन तंत्र संबंधी रोगों में लाभ मिलता है। दमा, एलर्जी, साइनोसाईटिस नजला जुकाम इत्यादि रोगों में लाभ प्राप्त होता है। फेफड़ों की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है जिसका सम्पूर्ण शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कोशिकाओं को ज्यादा प्राण वायु मिलती है।

ध्यान के लाभ-

ध्यान भी योग का ही अतिमहत्वपूर्ण अंग है। आजकल ध्यान अथवा मेडिटेशन का प्रचलन देश ही नहीं विदेशों में भी खूब बढ़ा है। आज के इस भौतिक युग में प्रत्स्पर्धा, भाग दौड़, काम के दबाव में आकर, रिश्तों में अविश्वास के कारण तनाव बढ़ता ही जा रहा है। ऐसी स्थिति में ध्यान से बेहतर कुछ भी नहीं। ध्यान से मानसिक तनाव दूर होकर आत्मिक शांति का अनुभव होता है। एकाग्रता बढ़ती है।

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सम्पूर्ण सृष्टि योग का ही परिणाम है। योग का अर्थ है जोड़ना। गणित की भांति योग हमारे गुणों में अभिवृद्धि करता है। हमारी आंतरिक चेतना को जगाकर हमें संस्कारवान तथा हृष्ट पुष्ट बनाता है। आंतरिक सम्पदा ही हमें वास्तविक धनी बनाएगी।

योग केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं अपितु जीवन ही योगमय है। समस्त प्राणी किसी ना किसी रूप में योगी हैं। योग ही हमारी उन्नति का कारक है चाहे शारीरिक हो या आत्मिक। हर व्यक्ति एक दूसरे से जुड़ा है और किसी ना किसी रूप में योग कर रहा है। जिस प्रकार मां और बच्चे को आत्मीयता का भाव जोड़े रखता है। यह ममत्व योग है। गृहस्वामी अपने परिवार को परस्पर जोड़े रखता है, सबको एक सूत्र में पिरोए रखता है। किसी को कोई परेशानी ना हो, कोई बिछुड़े ना यही प्रयत्न करता रहता है। तो यहां प्रयत्न योग है।

सम्पूर्ण संसार योग का ही परिणाम है। अध्यात्म के अनुसार यह सृष्टि पंच तत्वों से मिलकर बनी है ( पृथ्वी, आकाश, जल, अग्नि और वायु)। यह भी एक सम्यक योग ही है। पुरुष और प्रकृति के योग से ब्रह्मांड का सृजन हुआ। जड़ चेतन के योग से जीव जगत का निर्माण हुआ। प्राणियों के परस्पर योग से परिवारों का सृजन हुआ। परिवारों के योग से समाज का निर्माण हुआ। यही विकास है। योग से ही सृष्टि है तथा उसका संचालन भी योग पर आधारित है।

व्यवहार विचारो के योग पर आधारित है। व्यवसाय विश्वास के योग पर चलता है अगर आपस में तालमेल और विश्वास नहीं तो ना व्यवहार चलेगा नाही व्यवसाय। केवल ठगी और बेईमानी में योग नहीं चलता उसमे अलगाव तथा विघटन होता है।

ईमानदारी, सच्चाई ये सब योग का गुण है। कोई भी प्राणी चाहे आस्तिक हो या नास्तिक सभी अपनी दिशाओं और दृष्टि में योगी हैं। योग ही है जो हमें संतुलित कर संस्कारवान बनाता है।

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भारत और योग का संबंध लगभग दो हजार साल पुराना है। योग के लाभ को देखते हुए अब विदेशी में भी इसकी लोकप्रियता में वृद्धि लगातार बढ़ती जा रही है। योग से आंतरिक स्वास्थ्य में तो फायदा होता ही है अपितु बाहरी स्वास्थ्य लाभ भी अनेकों हैं जो इस प्रकार हैं-

कुछ लोगों के चेहरे पर बढ़ती उम्र का असर साफ नजर आने लगता है, झुर्रियां नजर आने लगती हैं। योग की मदद से शरीर में से विषैले पदार्थों और फ्री रैडिकल्स का सफाया हो जाता है, तनाव दूर होता है और त्वचा हमेशा चमकदार बनी रहती है।

गलत तौर तरीको से शरीर का आकार बिगड़ जाता है हड्डियां कमजोर हो जाती हैं परन्तु योग की सहायता से मांसपेशियों में सुडोलता आती है, मजबूती आती है जिस से शारीरिक संतुलन बेहतर होता होता है। वजन संतुलित रहता है। आजकल हर कोई मोटापे का शिकार है, और मोटापा ही अधिकतर बिमारियों की जड़ है। पेट खराब रहता है और पाचन क्षमता बिगड़ जाती है। योग इस सब से छुटकारा दिलाता है।

शरीर सुडौल बनता है। योग सिर से लेकर पांव तक शरीर को संतुलित करता है उस से शरीर मजबूत बनता है और कार्य क्षमता बेहतर होती है। कोर की कार्यक्षमता बढ़ती है। कोर यानि के मुख्य मांसपेशियों का समूह। शरीर तभी बेहतर कार्य कर सकता है जब कोर मजबूत हो। शरीर का कार्यभार कोर पर ही निर्भर है। योग से यह बिल्कुल संभव है।

मांसपेशियों में गतिविधियों में सुधार आता है । उनके लचीलापन बढ़ता है। योग मानसिकता पर भी कार्य करता है। तो सहनशक्ति में वृद्धि होती है। धैर्य बढ़ता है।

सभी के लिए मानसिक स्वास्थ्य भी बेहद जरूरी है। मानसिक तौर पर मजबूती संकट की स्थिति में निर्णय की क्षमता को बढ़ाती है। तनाव से मुक्ति मिलती है। सकारात्मकता बनी रहती है।

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सुखपूर्वक स्थिरता से बैठने का नाम ही योग कहलाता है। परन्तु आज के इस आधुनिक दौर में जीवन में सुख चैन और स्थिरता, दोनो का ही अभाव है।

इस आधुनिक युग में कंप्यूटर के बिना कोई कार्य संभव नहीं। कोई कार्यालय हो, कोई भी नौकरी पेशा या व्यवसाय हो हर चीज कंप्यूटर और मोबाइल फोन से जुड़ी है। कार्य की अधिकता के कारण मनुष्य लगातार आठ से दस घंटे कंप्यूटर के आगे बैठकर बीता रहे हैं और इसका दुष्परिणाम उनके शरीर पर साफ दिखाई दे रहा है। वो नेत्र, रीढ़ और पेट संबंधी रोगों के शिकार हो रहे हैं। तनाव भी जीवन में बढ़ता जा रहा है जिस कारण स्वभाव में चिढ़चिढ़ापन भी आता जा रहा है। परिणामस्वरूप गृहक्लेश बढ़ रहे हैं।

इन सबसे स्मृति दोष, दृष्टि दोष, पीठ दर्द, थकान आदि की शिकायतें बढ़ रही है। कंप्यूटर की वजह से मनुष्य को भारी शारीरिक और मानसिक हानि हो रही है।

इसके बचाव के लिए कंप्यूटर को निर्धारित दिशा, दूरी और कमरे में प्रकाश की स्थिति के अनुसार रखना चाहिए। लगातार एक साथ काफी समय तक कंप्यूटर में आंखे गड़ा के काम नहीं करना चाहिए। बीच बीच में थोड़ा कार्य को विराम भी देना चाहिए। कंप्यूटर में ब्लू लाइट फिल्टर आदि का प्रयोग करना चाहिए।

योग में भी इन सब से बचने के कई उपाय है।कंप्यूटर पर कार्य करते हुए सुविधानुसार दूर की चीजों को भी देखते रहें इस से दूर दृष्टि बाधित नहीं होगी। स्मृति दोष से बचने के लिए दिन भर के कार्यों को उल्टे क्रम में याद करें। ध्यान योग का सहारा लें, पूर्ण निद्रा लें।

अंग संचालन का सहारा लें। आंखो की पुतलियों को दाए बाएं ऊपर नीचे गोल गोल घुमाएं, इसी प्रकार बाजू कोहनी कमर गर्दन और पैरों के अंग संचालन क्रियाएं करते रहें। इस से शरीर में लचीलापन बना रहेगा ।

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सूर्य नमस्कार सभी योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग तथा व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। इसके अभ्यास से साधक का शरीर स्वस्थ, निरोगी और तेजस्वी बन जाता है। सूर्य नमस्कार को स्त्री, पुरुष, बाल, युवा और वृद्ध कोई भी कर सकता है और यह सभी के लिए बेहद फायदेमंद है। सूर्य नमस्कार में बारह मंत्र बोले जाते हैं। प्रत्येक मंत्र में सूर्य के है भिन्न भिन्न नाम हैं। हर मंत्र में सूर्य को अलग अलग नाम से पुकारा जाता है और इसका सरल शब्दों में अर्थ है कि सूर्य को (मेरा) नमस्कार है। इसके प्रारंभ में सूर्य से प्रार्थना और अंत में नमस्कार किया जाता है। सूर्य नमस्कार के बारह स्तिथियों अथवा चरणों में इन बारह मंत्रो का उच्चारण किया जाता है। सूर्य नमस्कार के मंत्र इस प्रकार हैं -

ॐ ध्येयः सदा सवितृ-मण्डल-मध्यवर्ती, नारायण: सरसिजासन-सन्निविष्टः।

केयूरवान् मकरकुण्डलवान् किरीटी, हारी हिरण्मयवपुर्धृतशंखचक्रः ॥

ॐ मित्राय नमः।

ॐ रवये नमः।

ॐ सूर्याय नमः।

ॐ भानवे नमः।

ॐ खगाय नमः।

ॐ पूष्णे नमः।

ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।

ॐ मरीचये नमः। (वा, मरीचिने नम: - मरीचिन् यह सूर्य का एक नाम है)

ॐ आदित्याय नमः।

ॐ सवित्रे नमः।

ॐ अर्काय नमः।

ॐ भास्कराय नमः।

ॐ श्रीसवितृसूर्यनारायणाय नमः।

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने।

आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥

अर्थात् इसका अर्थ है जो लोग प्रतिदिन सूर्य को नमस्कार करते है, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल वीर्य और तेज बढ़ता है।

सूर्य नमस्कार के आसन इस प्रकार हैं। इन्हें क्रमशः इसी प्रकार किया भी जाता है -

1. प्रणामासन

2. हस्त उत्तानासन

3. उत्तानासन

4. अश्व संचालनासन

5. चतुरंग दण्डासन

6. अष्टांग नमस्कार

7. भुजंगासन

8. अधोमुक्त श्वनासन

9. अश्व संचालनासन

10. उत्तानासन

11. हस्त उत्तानासन

12. प्रणामासन

सूर्य नमस्कार अत्यंत ही अद्भुत क्रियाविधि है। इसका नियमपूर्वक प्रतिदिन अभ्यास किया जाना चाहिए ।

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योग के कुछ नियम भी होते है। इनकी शुरुआत करने से पहले इनके बारे में जान लेना अत्यंत आवश्यक है अन्यथा इनका गलत प्रयोग परेशानी में भी डाल सकता है। नियम इस प्रकार हैं-

नियमानुसार योग सूर्योदय से पहले एवं सूर्यास्त के बाद करना चाहिए। प्रातः काल करना अत्यंत लाभकारी है।

योगासन से पहले हल्का वार्मअप करना जरूरी है ताकि शरीर खुल जाए।

शुरुआत हमेशा ताड़ासन से करनी चाहिए।

योग क्रियाएं सुबह खाली पेट करनी चाहिए।

जो लोग पहली बार योग आसान कर रहे हों उन्हें प्रारंभ में हल्के फुल्के आसन करने चाहिए तथा की निरीक्षक की देख रेख में करने चाहिए।

धीरे धीरे अभ्यस्त होने पर उनका स्तर बढ़ाते जाना चाहिए।

शाम को अगर योग कर रहे हैं तो भोजन और योग के बीच में तीन से चार घंटे का अंतराल जरूरी है। और योग के आधे घंटे बाद ही कुछ खाएं।

योग के तुरंत बाद नहाना वर्जित है।

योग हमेशा सुखद एवं आरामदायक वस्त्रों में करना चाहिए।

योग का स्थान साफ सुथरा तथा शांत होना चाहिए।

योग क्रियाएं धैर्य के साथ करें, अधिक जोर ना लगाएं तथा क्षमता अनुसार ही करें।

सभी योगासन सांस लेने तथा छोड़ने पर निर्भर करते हैं, इसलिए इनका सही से ज्ञान होना अनिवार्य है। पहले सीखें फिर करें।

अगर आप बीमार या गर्भवती हैं तो केवल चिकित्सक की सलाह से और योग शिक्षक की देख रेख़ में ही योग करें।

योगासन के अंत में हमेशा शवासन अवश्य करें, इसे करने से तन और मन एकदम स्थिर तथा शांत ही जाते हैं। इसी से योग का पूर्ण लाभ मिलता है।

योग के दौरान ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि योग के समय शरीर गरम होता है, ठंडा पानी गरम शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसलिए हमेशा साधारण या हलका गुनगुना पानी ही पिएं।

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शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य जितना महत्त्वपूर्ण है उतना ही भावनात्मक तौर पर स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है। योग इसमें विशेष रूप से भूमिका निभाता है। योग के भावनात्मक स्वास्थ्य लाभ कुछ इस प्रकार हैं:

अच्छा मूड: जीवन में आगे बढ़ने तथा सफलता हासिल करने के लिए अच्छा स्वभाव होना बहुत जरूरी है। योग इसमें अहम भूमिका निभाता है। जो लोग योग करते हैं उन्हें अंदर से ही प्रसन्नता का अहसास होता और हर समय खुशी झलकती है।

तनाव में कमी: तनाव हर किसी के लिए नुकसनदायक है। तनाव में कोई कार्य ढंग से नहीं होता। योग के कारण इस से मुक्ति मिल सकती है क्योंकि व्यक्ति सदा ऊर्जा से भरा रहता है और तनावरहित रहता है।

चिंता से छुटकारा: चिंता की चिता के समान कहा जाता है। चिंता शरीर में अनेक असाध्य रोगों को जन्म दे देती है। अगर आप योग की शरण में रहते हैं तो यह हमें मानसिक रूप से भी सुदृढ़ बना देता है और हम चिंता परेशानियों का सामना सही से कर पाते हैं।

दबाव से मुकाबला: हर व्यक्ति आजकल दबाव महसूस कर रहा है विशेषकर महिलाएं। घर, दफ्तर, बच्चो और परिवार को लेकर हर चीज में संतुलन बनाए रखना कठिन होता है और यह योग से संभव है।

निर्णय लेने की क्षमता: योग हमे शारीरिक तथा मानसिक रूप से इतना मजबूत बना देता है कि जीवन के किसी भी नाज़ुक घड़ी में निर्णय लेना दुष्कर नहीं होता। विपरीत परिस्थिति में भी संतुलन बना रहता है।

एकाग्रता: योग करते-करते हम स्वयं को नियंत्रित करना भी सीख जाते हैं और एकाग्रता इतनी बढ़ जाती है कि किसी भी लक्ष्य को आसानी से साध सकते हैं।

तीव्र स्मरणशक्ति: योग साधना शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क की कार्य प्रणाली को भी बेहतर करती है जिस से याददाश्त बढ़ती है।

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योगदर्शन के अनुसार चित्त को एक जगह स्थापित करना ही योग है। योग शास्त्रों के परंपरानुसार कुल चौरासी लाख आसन हैं जो पशु पक्षियों के नाम पर आधारित है। इनके बारे में कोई नहीं जानता इसलिए केवल चौरासी ही प्रचिलित्त हैं। तथा इनमे से भी केवल बत्तीस प्रमुख हैं। आसनों का प्रयोग शारीरिक, मानसिक और आधयात्मिक रूप से स्वास्थ्य उपचार के लिए किया जाता रहा है।

आसनों को दो समूहों में बांटा गया है -

गतिशील आसन- ये वो आसान हैं जिनमें शरीर शक्ति के साथ गतिशील रहता है।

स्थिर आसन- ये वो आसन हैं जिनमें अभ्यास को शरीर में बहुत ही कम या बिना गति के किया जाता है।

प्रमुख आसन हैं -

1. स्वस्तिकासन - इसके करने से पैरों का दर्द, उनका गरम या ठंडापन दूर होता है

2. गोमुखासन- धातुरोग, बहुमुत्र एवं स्त्रीरोग में लाभकारी है, यकृत गुर्दे और वक्ष को बल देता है। गठिया में लाभकारी है।

3. गोरक्षासन- मांसपेशियों में उत्तम रक्त संचार करता है, शांति प्रदान करता है।

4. अर्धमत्स्येंद्रासन- मधुमेह, रक्त संचार, उदर रोग को दूर करता है तथा आंखो को बल प्रदान करता है।

5. योगमुद्रसन- सुंदरता, विनम्रता एवं एकाग्रता को बल देता है।

6. शंखासन- यह पेट संबंधी सभी रोगों जैसे वात पित्त कफ अपच, खट्टे डकार इत्यादि में सहायक है।

7. सर्वांगासन- थायरायड को स्वस्थ तथा सक्रिय बनाता है। मोटापा, दुर्बलता, कद बढ़ाना और थकान दूर करने में सहायता करता है।

8. प्रणायाम- प्राण का ऊर्जा है जिसका विस्तार करना और उसको नियंत्रित करना है।

ये प्रमुख तीन हैं-

1.अनुलोम विलोम - इससे सभी नस नाड़ियां और रक्त शुद्ध होता है, भूख तथा स्फूर्ति को बढ़ाता है।

2. कपालभाति- हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क, मधुमेह, एवं श्वास रोगों में अत्यंत लाभकारी है।

3. भ्रामरी प्राणायाम- एकाग्रता बढ़ाता है, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, एवं मानसिक शांति में लाभकारी है।

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योग करने से न केवल तन स्वस्थ रहता है बल्कि मन भी प्रसन्न होता है। योग, न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक बीमारियों को भी दूर करता है। तनाव से लेकर हृदय, मोटापा, डायबिटीज आदि सभी बीमारियों पर योग के द्वारा काबू पाया जा सकता है। आपको बता दे जिसका मन रोगी व कमजोर होता है, उसका शरीर भी अवश्य रोगी व कमजोर होगा।

अक्सर महिलाओं पर उनके परिवार की सेहत बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी होती है. महिलाएं घर में मौजूद सदस्यों की सेहत का तो ध्यान रखती हैं लेकिन खुद अपनी सेहत के प्रति लापरवाह हो जाती हैं। लेकिन अगर महिलाएं घर पर ही एक भी योग आसन कर लेती है तो वह एक अच्छी सेहत पा सकती है हम आपको इस आसन के बारे में बताते हैं इसका नाम है ताड़ासन- इस आसन को करने से महिलाओं को शरीर में खिंचाव महसूस होता है. जिससे बॉडी का पॉश्‍चर बेहतर बनता है और घुटने और एडियां मजबूत बनती हैं. जिन लोगों को चक्‍कर आते हो या नसों में सूजन की समस्‍या हो तो वो लोग इस आसन को करने से बचें.

ताड़ासन के फायदे

ताड़ासन आसन करने से घुटनों और भुजाओं में मजबूती आती है। साथ ही शरीर में रक्त का संचार सम्पूर्ण सही से होने लगता है। आप हमेशा सेहतमंद रहते हैं। जिन लोगों को कब्ज की शिकायत है उन्हें ताड़ासन जरूर करना चाहिए। इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है जिससे कब्ज की समस्या भी दूर होती है। जो लोग पहली बार ताड़ासन का अभ्यास कर रहे हैं तो किसी विशेषज्ञ की देख−रेख में करें। इससे आपको लाभ होगा। वहीं गर्भवती महिलासकती ओं के लिए इस आसन का अभ्यास करना उचित नहीं है।