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हमारी वाणी तरकश में रखे तीरों के समान होती है। जिस प्रकार धनुष से निकले तीर वापस नहीं किए जा सकते, ठीक उसी प्रकार मुंह से निकले शब्द वापस नहीं हो सकते। इन शब्दों में इतनी ताकत होती है कि किसी रोते हुए व्यक्ति को हंसा सकते हैं, या किसी को एक पल में ही रुला सकते हैं।

अतः आपको बोलने से पहले ठीक प्रकार से सोच-विचार लेना चाहिए। कहीं ऐसा ना हो, कि हमारी बातें किसी को तकलीफ पहुंचा दें, या स्वयं हमारे लिए मुसीबत बन जाए।

तो फिर कैसे सोच कर ही बोलें?

आइए जानते हैं -

☸ परिणाम के बारे में सोचें :

जैसे ही आपकी बोलने की बारी आए, वैसे ही यह सोचें कि आपकी बोलने के बाद की स्थिति क्या होगी। परिणाम का अंदाज़ा लग जाने के बाद आप समझ जाएंगे कि आप जो कहना चाह रहे हैं वह बोला जाना चाहिए या नहीं। अगर शब्दों में कुछ बदलाव की जरूरत है, तो आप अपने मन में उन्हें वापस से सही करके, तब व्यक्त करें।

☸ ध्यान से सुनने के बाद ही बोलें :

सामने वाले की बात को ध्यान से ना सुनने से संभव है कि हमारी बातें उनकी बातों से संबंध ना रखें। इसीलिए यह बेहद जरूरी है कि वक्ता की हर शब्द को ध्यान से सुना जाए, ताकि चर्चा का विषय एवं भावना समझी जा सके। अच्छे से समझने के बाद जब आप बोलेंगे तो आपके शब्द विषय से संबंधित एवं तर्कसंगत होंगे।

☸ भावनाओं को समझ कर बोलें :

केवल बोलने के लिए ना बोलें । आपके शब्दों में परिपक्वता, मानवता एवं समझ दिखनी चाहिए। उन लोगों में से ना बने जो केवल वार्तालाप में भाग लेने के लिए बोलते हैं। इसके लिए शब्दों के पीछे की भावनाओं को समझें और तब बोलें।आपके शब्द सामने वाले को शांति एवं संतोष प्रदान करेंगे।

मित्रों, आज हम Hindi Soch नामक वेबसाइट की समीक्षा करने जा रहे हैं। यह समीक्षा आपको इस वेबसाइट पर उपलब्ध समाग्रियों की रूपरेखा की जानकारी देगी ।

शीर्षक :

यह ब्लॉग Hindi Soch के आधिकारिक नाम से उपलब्ध है।

उपलब्ध कंटेंट एवं श्रेणियाँ :

किताबें

कैसे बढ़ायें आत्मविश्वास

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शायरी

कविताएँ

प्रेरणादायक कहानियाँ

वॉल पेपर

टेक्नोलॉजी

कंटेंट गुणवत्ता :

यह ब्लॉग हिंदी भाषा में चलाया जा रहा है। यहाँ पढ़ने के लिए काफी विविध समाग्रियाँ उपलब्ध है। भाषा सरल एवं सहज है। मतलब कि भारी शब्दों का प्रयोग बहुत कम है। हालाँकि कुछ व्याकरणिक त्रुटियाँ मिलती हैं। हिंदी के साथ अंग्रेज़ी शब्दों का भी प्रयोग है।

पाठनियता स्कोर :

आसान शब्दों का प्रयोग होने के कारण बच्चे भी इसे आसानी से पढ़ सकते हैं।

गुण :

✴ सरल भाषा का प्रयोग

✴ यह "safe to browse" वेबसाइट है।

✴ सोशल मीडिया के कई मंचों पर उपलब्धता

✴ कंटेंट में विविधता

✴ हिंदी के साथ अंग्रेज़ी शब्दों का प्रयोग

अवगुण :

✴ व्याकरणिक त्रुटियाँ

✴ हिंदी पाठकों को अंग्रेज़ी शब्दों का इस्तेमाल निराश करता है।

✴ अत्यधिक विज्ञापन जो लेख के बीच में भी आते हैं, वे पढ़ने में बाधा डालते हैं।

✴ दूसरे लेखों की प्रायोजित खोजें पाठक को लक्ष्य से भटकाती हैं।

1 ) अच्छा व्यवहार

समाज कई सारे लोगों से बनता है, जिसमें न सिर्फ आपके उम्र के, बल्कि बड़े, छोटे सभी शामिल होते हैं । समाज में अच्छे संबंध बनाने के लिए आपको अपने व्यवहार को अच्छा रखना होगा। अशिष्ट व्यवहार लोगों में आपकी छवि को खराब कर सकता है। हंसमुख, विनम्र और खुश मिजाज़ लोगों से हर कोई बात करना चाहता है। इसीलिए विनम्रता और आदर भाव को अपने गुण बनाएं और सबसे आदर पूर्वक बात करें।

2 ) भागीदारी

आजकल सामाजिक दायरे के संकुचित होने के सबसे बड़ा कारणों में से एक यह है कि हम सभाओं - समारोहों में नहीं जाना चाहते हैं। निजता को प्रथमिकता देने वाले लोग भीड़ भाड़ से दूर रहना चाहते हैं। लेकिन ऐसा करके हम सामाजिक संपर्क बनाने का बहुत अच्छा मौका गंवा देते हैं। समारोहों में दोस्त - रिश्तेदारों और कई लोगों से मिलने का मौका मिलता है। साथ ही, मिलते रहने से संबंध भी बहतर होते हैं। इसीलिए शादी, पूजा -पाठ, जन्म दिन इत्यादि पर ज़रूर जाएँ।

3 ) संचार कौशल

यदि आप सामाजिक दायरा बढ़ाना चाहते हैं तो संचार की कला का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। लोग इसी से आपको आंकते हैं। अतः बेहतर संचार करने की कोशिश करें। संचार करते वक़्त ये बातें आप ध्यान में रखें :

✴ शुद्ध भाषा का प्रयोग

✴ नज़रें मिला कर बात करें

✴ अच्छे श्रोता बनें

✴ शारीरिक हाव भाव पर ध्यान दें

✴ शब्दों का ध्यान से चुनाव करें

4 ) सक्रियता

वे लोग जो हर मंच पर सक्रिय रहते हैं, वे समाज से अधिक जुड़े होते हैं। विभिन्न आयोजनों में सक्रिय रूप से भाग लें, कोशिश करें कि आप समाज में घटने वाली घटनाओं से परिचित रहें। घर बैठ जाने से लोगों से संपर्क टूट जाता है। सामाजिक नेटवर्किंग एक अच्छा विकल्प है। यहाँ घर बैठे आप हज़ारों लोगों से संचार कर सकते हैं।

दोस्तों, आप यह तो जानते होंगे कि हर क्रियाकलाप और उससे प्राप्त परिणाम का आधार संचार है। तब भी हम शायद ही अपने संचार कौशल पर ध्यान देते हैं, ये सोंच कर कि आखिर बचपन से हमने संचार ही तो किया है। फिर संचार को बेहतर करने पर ध्यान की आवश्यकता ही क्यों है?

यह सवाल इसलिए आता है क्योंकि हम अकसर संचार के महत्व को नज़र अंदाज़ कर देते हैं। संचार के बिना जीवन की कल्पना भी मुश्किल है। अतः ध्यान दें कि आपको अपने संचार कौशल में किन-किन सुधारों की ज़रूरत है। इसी कड़ी में हम बताने जा रहे हैं आपको बेहतर संचार की आवश्यकताएं :

✴ शुद्ध भाषा का ज्ञान

भाषा के प्रति लापरवाही के चलते अर्थ का अनर्थ भी हो जाया करता है। बेहतर संचार के लिए आवश्यक है कि संचार स्पष्ट हो, जिसके लिए भाषा का पूर्ण ज्ञान होना ज़रुरी है। उचित शब्दावली का प्रयोग, सही अनुवाद, शब्दों की पुन्द्वृत्ति पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

✴ अनुकूल वातावरण

हमारे आसपास कई तरह की हलचल होती रहती है। ऐसे में कई भौतिक बाधाएँ संचार की प्रक्रिया को अवरुद्ध करती हैं जैसे आसपास किसी तरह का शोर होने पर वक्ता के शब्द श्रोता तक ठीक प्रकार से नहीं पहुँच पाते। यह शोर मशीनों की आवाज़ से, ट्रैफिक के कारण, या अन्य लोगों की बातचीत से उत्पन्न हो सकता है। अतः ज़रूरी है कि वतावरण व स्थान शांत हो और संप्रेषित संदेश के अनुकूल हो।

✴ समय

संचार पूर्ण हो, इसके लिए पर्याप्त समय का होना ज़रुरी है। समय के आभाव में किया गया संचार अधूरा एवं असंतोषजनक होता है । ऐसा इसीलिए क्योंकि कम समय में पूरी जानकारी प्राप्त नहीं की जा पाती है। इससे संचार कर्ता संप्रेषित संदेश को ठीक तरह से समझने में असक्षम होता है और परिणाम स्वरूप वह शंकाओं से घिर जाता है।

1 ) समस्या का बहतर हल

मतभेदों के पीछे आपसी समझ की कमी होती है, जिसका कारण है संचार का आभाव। अच्छे संचार द्वारा संघर्षो को खत्म किया जा सकता है। प्रतिकूल स्थिति आ जाने पर एक अच्छा संचारक शांति से सभी पक्षों को सुनता है, जिससे वह सबके हितों की रक्षा करने वाला निर्णय लेता है।

2 ) उत्पादकता

अच्छा संचार ऐसा वतावरण बनाता है, जहाँ सभी लोग एक दूसरे से जुड़े और अवगत रहते हैं। स्पष्ट और पूरी जानकारी होने के कारण कार्य बेहतर होता है, और उत्पादकता बढ़ती है। अच्छा संचार ही अच्छे निर्णय का आधार बनता है।

3 ) टीम बिल्डिंग

हम सब जानते हैं कि वही संगठन मजबूत होता है, जहाँ सदस्यों के बीच आपसी समझ हो। यह मूल्य बेहतर संचार द्वारा विकसित होते हैं। जब सदस्य खुल कर विचार साझा करते हैं तब किसी मतभेद की गुंजाइश नहीं रहती। बेहतर संचार प्रवाह होने अपर सदस्य टीम के प्रति और भी निष्ठावान बनते हैं।

4 ) व्यवसायिक लाभ

अच्छे संचार का व्यवसाय की उन्नति से सीधा संबंध है। ग्राहकों से सीधे और स्पष्ट संचार से ग्राहक कंपनी की नीतियों और सेवाओं के प्रति संतुष्ट और आश्वस्त रहते हैं। इससे न केवल कंपनी की आय बढ़ती है, बल्कि कंपनी की प्रतिष्ठा भी बढ़ती है।

5 ) गहरे संबंध

अच्छा संचार लोगों के बीच विश्वास को मज़बूत करता है। जब विचारों का खुला प्रवाह हो, तब आप लोगों के मन की भावना जान पाते हैं और उनकी अपेक्षाओं को पूरा कर पाते हैं। इस तरह आपके संबंध और भावपूर्ण बनते हैं।

6 ) उत्तम नेतृत्व की स्थापना

एक अच्छा नेता इस कौशल के आधार पर ही भारी जनसंपर्क स्थापित कर पाता है। एक कुशल संचारक ही एक श्रेष्ठ नेता बन सकता है। संचार कौशल द्वारा ही नेता अपनी नीतियों को इस प्रकार पेश करता है कि जनता उसके विश्वास में आ जाती है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं 7 लक्षणों के बारे में, जो संचार को प्रभावी बनाते हैं :

1 ) सुनना

केवल विचारों को व्यक्त कर अच्छा संचार नहीं स्थापित किया जा सकता है। स्वस्थ संचार के दौरान लोग बोलने के साथ सुनने पर भी ज़ोर डालते हैं। या फिर यह कहें कि अच्छे संचार में सुनने एवं बोलने का बराबर अनुपात होता है।

2 ) भाषा ज्ञान

संचार का माध्यम मौखिक हो अथवा लिखित, भाषा का सहारा लेकर ही किया जाता है। अच्छे संचार भाषा के शुद्ध एवं पूर्ण ज्ञान पर आधारित होते हैं। दोनों पक्ष एक दूसरे की भाषा भली भाँति समझ और अनुवाद कर सकते हैं। साथ ही, सही उच्चारण और सटीक शब्दों का चयन संचार के प्रभावी लक्षणों में से है।

3 ) अशब्दिक संचार

मूँह के अलावा पूरा शरीर संचार में हिस्सा लेता है। अच्छे संचार का एक मूल लक्षण है कि दोनों पक्षों के बीच "आई काँटेक्ट" होता है। साथ ही, शरीरिक एवं चेहरे के हाव भाव भी मेल खाते हैं।

4 ) खुले विचार

प्रभावी संचार में सभी विचारों का खुले दिल से स्वागत किया जाता है। दो पक्षों की अलग राय होने के बावजूद सभी के विचारों को अहमियत दी जाती है, और उन पर गौर भी किया जाता है।

5 ) विश्वसनियता

विश्वास के बिना विचारों का स्थानांतरण नहीं होता। एक स्वस्थ संचार में दोनों पक्ष एक दूसरे पर भरोसा रखते हैं। अतः हर राय बिना झिझक साझा की जाती है।

6 ) धैर्य

कुशल संचारक इस बात से परिचित होते हैं कि हर व्यक्ति कुशल संचारक नहीं होता, अतः वे सामने वाले की बात को पूरे धीरज के साथ सुनते हैं।

7 ) इमानदरी

अच्छे और प्रभावी संचार में झूठ का कोई स्थान नही होता। ऐसे संचार केवल सत्य की नींव पर खड़े होते हैं। इसीलिए सभी पक्ष अपनी बातों में ईमानदारी और पारदर्षिता रखते हैं।

हम जो भी महसूस करते हैं, उन्हें संवाद द्वारा ही साझा करते हैं ।अच्छे संवाद द्वारा ही स्पष्ट विचार संप्रेषित और ग्रहण किये जाते हैं। व्यवसाय और संगठन पूरी तरह संचार पर निर्भर है। यही कारण है कि कंपनियां नौकरी देने से पूर्व सक्छात्कर द्वारा प्रतिभागियों की संवाद करने की क्षमता की परीक्षा लेते हैं। हम इसी पर चर्चा करने जा रहे हैं, कि विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे संवाद की ज़रूरत क्यों है :

✴ अच्छे परिणामों के लिए

उन्हीं कार्यो के बेहतर परिणाम होते हैं, जिनके पीछे स्पष्ट एवं सुनियोजित योजना होती है।

इसे हम उदाहरण द्वारा समझते हैं।

जब आप किसी परेशानी को लेकर चिकित्सक के पास जाते हैं, तब आपके और उनके संवाद द्वारा बीमारी की नतीजे तक पहुँचा जाता है। यदि आप उनसे अपनी परेशानी ठीक से नहीं समझा पाते हैं, तब चिकित्सक बीमारी को ठीक तरह से न समझ पाएंगे, न सही परामर्श दे सकेंगे। इस तरह आपको बुरे परिणाम का सामना करना पर सकता है।

✴ गलत फेहमीयाँ दूर करने के लिए

अकसर ऐसा होता है कि हमारी भावनाएं कुछ और होती हैं, पर अच्छे संवाद के आभाव में हमारी बातों का कुछ और मतलब निकल आता है। इसके परिणाम स्वरूप संबंधों में गलतफेहमी का बीजारोपण हो जाता है। इन्हें दूर करने का एक मात्र उपाय है संवाद, जहाँ आप गलत समझी गयी बातों को सही रूप में पेश करते हैं।

✴ स्पष्ट निर्देश देने और ग्रहण करने के लिए

निर्देशक अपनी योजनाओं को अन्य सदस्यों तक उपरी तौर से पहुंचाते हैं, यह सोंच कर कि जितनी स्पष्टता उनके मन में है, उतनी ही बाकियों के मन मे है। किंतु ऐसा नहीं होता। कर्मचारी डर के कारण सवाल नही पूछते और इस तरह आधी अधूरी जानकारी के साथ कार्य करते हैं। यहाँ अच्छे संचार की आवश्यकता है, जिससे स्पष्ट निर्देश दिये एवं ग्रहण किये जा सके।

व्यक्तिगत संबंध हों, या व्यवसायिक, बेहतर संचार की भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि यह एक मात्र साधन है जिससे आप विचारों और भावों को साझा करते हैं। यदि संचार का अभाव हुआ तो संबंधों में परस्पर संबंध का आभाव हो जाता है। इसीलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि आप संचार कौशलों में सुधार लाते रहें, ताकि आपके जीवन के हर पहलू में सुधार आए।

1 ) अभ्यास

आपने यह तो सुना ही होगा कि "करत करत अभ्यास ते जनमत होत सुजान"। इसका अर्थ है कि अभ्यास से ही पूर्णता मिलती है। रोज़ कुछ देर आईने के सामने खड़े हो कर बोलने की कोशिश करें। साथ ही, अपने शरीर की मुद्रा एवं हाव भाव का भी निरीक्षण करें। लोगों से बात करने को भी अभ्यास का ही हिस्सा समझें और सही सुधारों को लागू करें।

2 ) अशाब्दिक संचार पर खास ध्यान दें।

वार्तालाप के दौरान बोलने के अलावा शरीर द्वारा भी संचार किया जाता है। बात करते वक़्त हाथों का प्रयोग कर के अलग-अलग मुद्राएं बनाएं, चेहरे के हाव भाव का इस्तेमाल करें। कुल मिला कर आपका पूरा शरीर संचार की प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए। इससे सामने वाले तक यह संदेश पहुँचता है कि आप पूर्णतः उनकी बातों में तल्लीन हैं। यही नहीं, जब आप पूरे शरीर द्वारा संचार करते हैं, तब आपकी बातें श्रोताओं पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

3 ) हँसी मज़ाक के सही अवसर को समझना।

संचार तब तक बेहतर होता है, जब दो पक्ष आपस में सहज हों। वतावरण को अनुकूल बनाने के लिए बीच-बीच में मज़ाक का सहारा लेना चाहिए। इससे दोनों पक्षों में झिझक मिट कर बेहतर संचार प्रवाहित होता है। वहीं अत्यंत औपचारिक या व्यवसायिक मामलों में हँसी मज़ाक आपका काम बिगार सकते हैं। ऐसे मामलों में केवल विषय वस्तु से जुड़ी, अर्थात टू द पॉइंट बातें करनी चाहिए।

निजी एवं सामाजिक जीवन में संचार का महत्व

वह संचार ही है, जो रिश्तों को सवाँरता या बिगारता है। कई बार ऐसा होता है कि हम अपने प्रियजनों से प्यार तो करते हैं, पर जताते नहीं। इस प्रकार हम मन की भावना को मन में ही रख लेते हैं। आपके प्यार न व्यक्त करने के कारण, सामने वाले के मन में भ्रांति और शंका विकसित हो जाती है। परिणाम स्वरूप रिश्तों में गलतफेहमी आ जाती हैं और वे कमज़ोर हो जाते हैं। यह सब केवल संचार के अभाव के कारण होता है। अच्छा संचार ही रिश्तों में प्रेम व विश्वास का आधार है। चाहे वह दोस्त हों, परिवार हो, पड़ोसी या रिश्तेदार हों, संचार द्वारा ही सभी रिश्तें बरकरार रहते हैं।

विचारों का स्थानांतरण

संचार द्वारा ही विचारों का आदान प्रदान मौखिक, लिखित, या अशब्दिक साधनों से किया जाता है। यदि संचार न हो तो विचारों का आदान प्रदान असंभव है। चाहे व्यवसाय हो, संगठन हो, संबंध हो, संसार में चलित हर गतिविधि के पीछे संचार तंत्र है । अच्छे संचार द्वारा ही सही और सटीक विचार ग्रहण एवं प्रेषित किये जाते हैं। यदि संचार की गुणवत्ता थोड़ी भी कम हुई तो अस्पष्ट और अनुपयुक्त विचारों का स्थानांतरण होता है।

व्यवसायिक जीवन में संचार का महत्व

इसमे कोई दो राय नहीं है कि व्यवसाय पूर्णतः संचार पर टिके हैं क्योंकि व्यवसाय में हर गतिविधि निर्देशों के आदान प्रदान पर निर्भर होती हैं। वही व्यवसाय उन्नत होता है जो अपने ग्राहकों से अच्छा संपर्क स्थापित कर पाता है।

नेतृत्व स्थापित करने के लिए संचार का महत्व

एक अच्छा नेता वही होता है, जो बोलने की कला में निपुण् हो। वे नेता बहुत लोकप्रिय होते हैं, जिनका जनता से उत्तम संचार हो। लोग बातें सुन कर ही प्रभावित होते हैं। इसीलिए संचार नेतृत्व स्थापित करने के लिए सबसे ज़रूरी है।

संचार बाधाएँ उन अवरोधों को कहा जाता है, जो संचार के प्रभावी रूप से आदान प्रदान में बाधाएँ उत्पन्न करती हैं। यह बाधाएं या तो संचार को पूरी तरह अवरुद्ध करती हैं, अथवा संचारक द्वारा संप्रेषित संदेश की गुणवत्ता एवं प्रभाव को कम कर देती हैं, या फिर गलत संदेश प्रवाहित कर देती हैं। संचार बाधाएँ हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में मौजूद है। अतः आवश्यक है कि हम इन्हें पहचाने और देखें कि कैसे हम इन अवरोधों को कम कर सकते हैं।

आज हम ऐसी ही 4 बाधाओं को समझेंगे। ये निम्नलिखित हैं :

1 ) शरीरिक बाधा

इनमें वे बाधाएँ शामिल हैं जो किसी शरीरिक दुर्बलता के कारण आती हैं। इनमें शामिल हैं मौखिक संचार में श्रवण शक्ति का कमज़ोर होना, लिखित संचार में दृश्य क्षमता का कमज़ोर होना, स्पष्ट रूप से बोलने में असक्षम होना साथ ही, अशाब्दिक संकेतों, जैसे चेहरे के हाव भाव को न समझ पाना भी संचार में बाधा लाती हैं।

2 ) भाषा संबंधी बाधा

भाषा संबंधी बाधाएँ तब आती हैं जब दो पक्षों के बीच भाषा को लेकर अस्पष्टता हो। इनमें शामिल हैं, जब संचारक और ग्रहण करने वाले की भाषाएँ भिन्न होती हैं, भाषा का पूर्ण ज्ञान न होना, भाषा का गलत अनुवाद, तकनीकी भाषा का ज्ञान न होना।

3 ) लिंग संबंधी बाधाएँ

पुरुष और स्त्री के बीच समाज में चली आ रही भिन्न मानसिकता और कई अंतरों के चलते यह दो लिंग आपस में सही ढंग से संचार नहीं कर पाते। यह संचार संकुचित एवं सीमित होते हैंं।

4 ) भावनात्मक बाधाएँ

यह वह अवरोध हैं, जो दो लोगों अथवा पक्षों के दृष्टीकोण और विचारों में अंतर से जन्म लेते हैं। इस स्थिति में संचारक के मन में डर, झिझक, घबराहट, शंका, अविश्वास जैसी भावनाओं के प्रभाव में आकर संचार करने में असक्षम हो जाता है।

एक व्यक्ति जो कुशल संचार कौशल से परिपूर्ण होता है, वह भीड़ में सबसे अलग नज़र आता है। ऐसे लोगों का बोलचाल, शरीरिक हाव भाव में कुछ खास बातें होती हैं जिसके कारण वह आकर्षण का केंद्र बिंदु बन जाता है। अच्छे संचार कौशल कई मानकों पर निर्भर करते हैं जिससे आम बात भी प्रभाव उत्पन्न करने वाली बन जाती हैं। इस कौशल के आभाव में हम सामाजिक एवं व्यवसायिक जीवन में पीछे रह जाते हैं। इसीलिए सबसे ज़रूरी है लक्षणों को समझना, जिनसे यह कौशल विकसित होता है। तो देर किस बात की?

एक व्यक्ति, जिसमें अच्छे संचार कौशल होते हैं उनमें निम्नलिखित लक्षण होते हैं :

✴ संचारक आत्मविश्वासी होता है।

अच्छे संचार के लिए अत्यावश्यक है कि मन में आ रहे विचारों को बिना झिझक व्यक्त किया जाए। यह अच्छे संचारक का मूल गुण होता है। ऐसा संचारक सभी बातों को पूर्ण विश्वास के साथ कहता है। उसके मन में अपने विचारों के प्रति दृढ़ता होती है कि वो जो बोलेगा लोग उसे स्वीकार करेंगे।

✴ संचारक अच्छा श्रोता होता है।

बेहतर संचार वही स्थापित कर पाता है, जो बोलने के साथ-साथ सुनना भी जानता है। यह कुशल संचार की अहम मांग है। अच्छा संचारक वक्ता को बोलने का पुरा अवसर देता है, उनकी बात को ध्यान एवं धैर्य से सुनता है और उसकी बातों पर बेहतर प्रतिक्रिया करता है।

✴ संचारक आलोचना और विरोध का सामना करता है।

एक कुशल संचारक केवल अच्छी बातों पर ही नहीं, बल्कि आलोचनाओं पर भी प्रतिक्रिया करता है। विचारों में विरोधाभास आने पर वह न घबराता है, और न ही चुप होता है। उसमे गलतियां स्वीकार करने और अपना पक्ष रखने का साहस होता है। उसमें यह क्षमता भी होती है कि वह अपने आलोचकों और विरोधियों को अपनी वाकपटुता से प्रभावित कर मित्र बना लेता है।

संचार कौशल!

आखिर यह क्या चीज़ है? बचपन से तो हम सभी संचार ही करते आये हैं, फिर इसमे कौशल की क्या बात है? अक्सर हम यही सोंचते हैं और अपने बातचीत करने के तरीके पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते।

पर दोस्तों, कुशल संचार कौशल का होना अति आवश्यक है। आज कल हर क्षेत्र में इसकी बहुत अधिक मांग है। तमाम व्यवसाय अच्छे संचार द्वारा ही उन्नत होते हैं। अच्छी नौकरी पाने से आकर्षक पर्सनालिटि बनाने तक संचार कौशल ज़रूरी हैं। वे लोग भीड़ से अलग नज़र आते हैं, जो असाधारण संचार कौशलों के स्वामी होते हैं।

तो आइये जानते हैं, कैसे असाधारण संचार कौशल विकसित करें :

✴ आत्मविश्वास

अकसर हम कई बातें सोंचते हैं, पर सामने वाले क्या प्रतिक्रिया करेगा इस बात से झिझक कर बोलते नहीं और कई अच्छी बातें बोलने से भी आप चूक जाते हैं। वही बात कोई और बोल कर सबके आकर्षण का केंद्र बन जाता है। मन की बातों को बेबाक हो कर बोलने का आत्मविश्वास जगाए। यही बेबाक बोल आपको दूसरों से अलग बनाएंगे।

✴ श्रोता को संलग्न करना :

असाधारण संचार कौशल प्राप्त करने के लिए न केवल आपको बोलना आना चाहिए, बल्कि सुनने वालों को अपनी बात में पूरी तरह शामिल करने की कला भी सीखनी होगी । बातों में श्रोता को बराबर का भागीदार बनाएं। उनसे परामर्श मांगें, सवाल करें। खुद को आपकी बातों में महत्व पाता देख लोग आपसे प्रभावित होंगे।

शुद्ध भाषा, उच्चारण और "catchy" शब्दों का प्रयोग

चाहे आप कितनी भी अच्छी बातें करें, लोग तभी आकर्षित होते हैं जब आपकी बातें सबसे हट के होती हैं। ऐसे शब्दों का चयन करें जो श्रोता का ध्यान आकर्षित करे। साथ ही, गलत उच्चारण और अशुद्ध भाषा बहुत गलत प्रभाव डालती हैं। इसलिए भाषा सही, साफ और स्पष्ट रखें।

श्रोता और वक्ता वे दो भूमिकाएँ हैं, जिन्हें निभा कर हम अपने विचारों को साझा करते हैं। अच्छा बोलने वाले तो कई हैं, लेकिन कम ही लोग ऐसे हैं जो अच्छे श्रोता साबित हो पाते हैं। विचारों को व्यक्त करने की इस दौड़ में ग्रहण करने वाले बनिए। तभी आप भीड़ से अलग दिखेंगे।

अच्छा श्रोता कौन है?

अच्छा श्रोता वही है, जो वार्तालाप के दौरान अपने विचारों को व्यक्त करने की प्रबल इच्छा पर नियंत्रण कर दूसरों की बात सुने और समझे।

तो आइये दोस्तों, जानें कि कैसे बन सकते हैं आप अच्छे श्रोता :

✴ धैर्य है सबसे ज़रूरी

यह श्रोता का सबसे बड़ा गुण है। धैर्य द्वारा ही श्रोता अपने बोलने की चाहत पर काबू कर वक्ता की बात सुन पाता है। बातचीत के दौरान जब भी आपको लगे कि आपको बोलने की तत्पर इच्छा है, तब धैर्य धारण करें।

✴ बोलने से अधिक सुनने पर दें ध्यान

चुप रहना भी एक कला है। यह सोंच कर चलें कि "मुझे सुनना है"। कई बार बोलने से ज़्यादा मददगार सुनना होता है ताकि सामने वाला खुल कर सब कुछ बयाँ कर सके। बातों को सुनें भी और उनमे छिपी भावनाओं को भी समझें।

✴ आँखें मिलाना ( आई काॅन्टैक्ट)

जब भी आप किसी से बात करें, तो अपनी नज़रें उनपर बनाये रखें । इससे वक्ता तक यह संदेश जाता है कि आपका ध्यान उनकी बातों पर केंद्रित है। बात करते वक़्त कहीं और देखने का तात्पर्य है कि आपको बातों में कोई रुचि नहीं है ।

✴ शारीरिक हाव भाव

आप किसी की बातों में कितने अनुरक्त हैं, इसका आपके चेहरे और शरीर के हाव भाव से गहरा संबंध है। सुनने की प्रक्रिया में केवल कान और दिमाग नहीं, बल्कि पुरा शरीर शामिल होता है।अच्छे श्रोता बनने के लिए आपको इसका ख्याल रखना होगा कि आपके हाव भाव सकरात्मक इशारे करें।

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अच्छा कैरियर अच्छा बनाने के लिए कुछ खास उपाय -

जीवन में आपको बार - बार मौका नहीं मिलता है तो अपना समय बिना बर्बाद किए अपना एक अच्छा सा कैरियर तलाश कर के उस पर बहुत सारी मेहनत और लगन के साथ काम करें।

एक अच्छा कैरियर बनाने के लिए आपको अपने आस पास की समस्याओं को घटनाओं को अपने दिमाग से हटाना होगा।

अपने आपको ईमानदार बनाइए क्योंकि इसकी ज़रूरत आपको हर जगह सफल बनने के लिए पड़ सकती है यदि आप एक ईमानदारी से कुछ भी शुरू करेंगे तो आपको एक न एक दिन सफलता ज़रूर मिलेगी।

धैर्य ना खोएं जब आपको ऐसा लगे कि आपके जीवन में कुछ भी बेहतर नहीं हो रहा तो टूटे नहीं जबकि सिर्फ अपने कैरियर को और बेहतर करने के लिए कोशिश करते रहें।

अपने अंदर की थकान को नींद को और हर उस आदत को जो आपके कैरियर में बाधा बन रही हो उसे हटाने की कोशिश करें।

अच्छे लोगों के साथ रहें उनसे अच्छी अच्छी बातें और जानकारी सीखें। गलत लोगों के साथ रह के अपने जीवन के कीमती समय को बर्बाद न करें।

आपके अंदर हर वक्त कुछ करने की चाह जगानी होगी जिससे आपको बहुत सारे अलग अलग विचारों का ज्ञान मिलें।

अच्छा कैरियर बनाने के लिए आपको सबसे पहले खुद को बहुत सरी अच्छी आदतों से बांधना होगा और बुरी चीजों से दूर रहना होगा। यदि आप ऐसा करते है तो इसका एक खास असर आपके कैरियर में पड़ता है।

खूब मेहनत करो बिना किसी से डरे, बिना किसी से हारे और बिना किसी की सुने, आप सिर्फ और सिर्फ अपना सारा फोकस अपने कैरियर में लगाएं।

आप जितना समय आज देंगे आपको उसका परिणाम कल मिलेगा इस लिए लगातार प्रयास करें और बिना थके उत्साह के साथ अपने कैरियर की तरफ बढें।

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मित्रों, वार्तालाप में हम दो भूमिकाएँ निभाते हैं। एक भूमिका है वक्ता की और दूसरी है श्रोता की। वक्ता बनना श्रोता बनने के मुकाबले आसान है क्योंकि हम अपने मन की बात बोलने के लिए अधीर रहते हैं, कि सामने वाले को सुनना भूल ही जाते हैं। ऐसा करने से न केवल हम सामने वाले के अवसर को छीन लेते हैं, बल्कि उनकी बातों से मिलने वाले ज्ञान से भी वंचित रह जाते हैं। इसका उपाय यह है कि आप बोलने से अधिक सुनने की आदत डालें।

नीचे वो 5 चरण हैं, जो इसमें आपके लिए सहायक सिद्ध होंगे।

⚫ अच्छे श्रोता बनने पर ज़ोर दें।
एक अच्छा श्रोता वही है, जिसमे सुनने की सहनशक्ति एवं संकल्पशक्ति हो। सामने वाले की बोरियत न समझें, उनकी बातों में दिलचस्पी बढ़ायें। साथ ही, उनसे और जानने के लिए जिज्ञासु रहें।

⚫ "मुझे सुनना है ", यह सोंचकर बात शुरू करें।
निरंतर अपने मन को प्रेरित करें, कि मैं सुनने का/की इक्छुक हूँ, मेरा लक्ष्य सामने वाले की बातों से ज्ञान एवं अनुभव प्राप्त करना है।

⚫ श्वास पर साधे नियंत्रण।
क्या अपने सोंचा है कि आप अपनी बात प्रकट करने के लिए इतने अधीर क्यों रहते हैं? इसीलिए क्योंकि उस समय हमारा मस्तिष्क बेक़ाबू हो जाता है। मस्तिष्क को नियंत्रण में रखने के लिए आपको अपनी श्वास पर नियंत्रण बनाना होगा। आयुर्वेद कहता है, "जिसने अपने श्वास पर नियंत्रण कर लिया, उसने मन और मस्तिष्क पर भी नियंत्रण कर लिया। "

⚫ तभी बोलें जब ज़रूरत हो।
कहते हैं न, "नाप तोल कर बोलो। " शब्दों का सही चयन एवं सही अवसर देख कर बोलने से आप दूसरों की बात बीच में नहीं काटेंगे, और उन्हें बोलने का मौका देंगे।

⚫ फ़िज़ूल की बात बिल्कुल न करें।
अपनी बात संछिप्त और सरल रखें। सामने वाला अधिक बोल सके, इसीलिए बस मुद्दे की बात करें।

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज से ही उसका सृजन एवं विकास संभव है। सामाजिक दायरा होना हितकर ही नहीं, बल्कि ज़रूरी भी है। सोंचिये दोस्तों, रिश्तेदारों, परिवार, पड़ोसियों के बिना आप कैसा महसूस करेंगे? वैसा ही जैसे बंज़र ज़मीन पर अकेला कैक्टस का पौधा दूर दूर तक दूसरी वनस्पतियों से वंचित होता है।

आज हम बात कर रहे हैं सामाजिक दायरे में वृद्धि करने के लाभों के बारे में जिससे आप अपने आसपास के लोगों के महत्व को समझ कर उनकी और भी कद्र करेंगे।

⚫ सामाजिक दायरा बढ़ाने से प्राप्त होता है बात चीत करने का कौशल

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हमारे सामाजिक दायरे में दोस्त, दफ्तर के सहकर्मियों से लेकर बच्चे एवं बुजुर्ग तक शामिल होते हैं। सबसे बातचीत का अनुभव आपको औपचारिक तथा अनौपचारिक भाषा इस्तेमाल करने का सही तरीका और जगह सिखाते है।

⚫ अकेलेपन का नहीं होता एहसास

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प्रियजनों, मित्रजनों, रिश्तेदारों से घिरे रहने पर आप अकेलेपन से कोसो दूर रहते हैं। तभी तो, जब भी नहीं लगता आपका मन, तब आप किसी दोस्त या प्रियजन से मिलने चले जाते हैं।

⚫ जितने लोग, उतने हाथ

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जब भी आप किसी मुश्किल के बीच घिर जाते हैं, तो अपनों से उस परेशानी को साझा करते हैं। आपको मदद मिलती है, और समाधान भी। साथ ही, यह एहसास कि आप अकेले नहीं हैं, आपको और मजबूती देता है। सोचिये कि अगर कोई न हो, तो कितना मुश्किल होगा खुद को संभालना।

⚫ होता है स्वयं का विकास

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जीवन में जितना ज़रूरी ज्ञान है, उतना ही ज़रूरी है अनुभव। लोगों के बीच रह कर जो अनुभव हमें मिलते है, वो जिंदगी को सही तरीके से जीने के लिए बहुत ज़रूरी है। कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब हमें बाहर की दुनिया में जाकर, रहकर, और अनुभव कर के मिलते हैं।

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तो समझ गए न कितने ज़रूरी हैं पड़ोसी, दोस्त और रिश्तेदार!

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15 प्रभावी communication skills -

दो या दो से अधिक लोगों के बीच होने वाली बातों को ही communication कहते हैं।

1. कॉन्फिडेंट रहें -

खुद में कॉन्फिडेंट रखना सबसे ज़रूरी होता है आपको किसी भी कार्य में अच्छा परिणाम देने के लिए खुद पर भरोसा करना ज़रूरी है।

2. बॉडी language मेनटेन रखें -

बॉडी को इस प्रकार रखें कि लोगों को देखने में अच्छा विचार आए।

3. दूसरो की बातें ध्यान से सुने -

पहले दूसरो की पूरी बातों को ध्यान से सुन ले तब जवाब दें यही एक अच्छा तरीका माना जाता है।

3. खुद को नॉर्मल तरीके से दर्शाएं -

खुद को इस तरीके से दर्शाएं की सामने वाले समझ जाए कि आपके अंदर कुछ बहुत खास खूबियां है ।

4. आई कॉन्टैक्ट करें -

आई कॉन्टैक्ट ठीक रखें इधर उधर नहीं देखें।

5. एक एक कर के बातों का जवाब दें -

एक साथ सारी बातें ना कह कर एक एक बातें करें।

6. बिना समझे ना बोले -

पहले समझ जाएं तो ही बोले ।

7. सही शब्दों का प्रयोग करें -

ऐसे शब्दों का प्रयोग करें जो कि बिल्कुल सही हो कोई भी आसानी से समझ जाए।

8. व्यक्ति को समझें -

व्यक्ति को समझ कर ही उसके मुताबिक बातें करें।

9.रोज़ प्रैक्टिस करें -

रोज़ प्रैक्टिस करने से हमारा कॉन्फिडेंट बढ़ता है और हमें अपनी बातों को कहने में और आसानी होती है।

10. रिस्पेक्ट करें -

रेस्पेक्ट देना सीखें।

11. बात पूरी करे -

बातों को अधूरी नहीं छोड़े उसे पूरा करें।

12. पहले सुने फिर बोले -

किसी की बात को पहले अच्छे से सुन ले तो जवाब दें।

13. अपने आप को अच्छे से दर्शाएं -

अपने बारे में कुछ ऐसा बताएं जिससे कि आपकी सारी खूबियां समझी जा सके।

14. अनावश्क ना बोले -

जहां बोलना ज़रूरी है वहीं बोलें।

15. पॉइंट टू पॉइंट बात करें -

एक एक कर के बातें करना ही सही होता है।

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हिंदी स्पीच की कुछ बेहतरीन टिप्स एंड ट्रिक्स -

हिंदी एक ऐसी भाषा है जो खुद में एक बहुत ही खास विश्वास दिलाती है जब कोई व्यक्ति हिंदी में स्पीच देता है और अगर उसे हिंदी सही रूप से आती है तो उसे किसी भी बात की चिंता नहीं होनी चाहिए।

तो सबसे पहले आपको जिस भी विषय में स्पीच देना है आप उसकी पूरी जानकारी हासिल कर लें।

स्पीच के मुद्दे पर आने से पहले आप खुद को परिचित करवाएं। यानि कि अपना नाम और पिता का नाम अपनी शिक्षा के बारे में बताए तथा कुछ अपने स्पीच के विषय में भी बता दें।

स्पीच को बोलते वक्त इस बात का खास ध्यान दें कि बीच बीच में अटके नहीं।

स्पीच के बीच में बार बार कुछ अनावश्यक शब्द जैसे की आं, मतलब, हां, हम्म ये शब्दों का इस्तेमाल ना करें।

एक अनुशासन के साथ खड़े रहें अपने हाथों का अधिक प्रयोग नहीं करें।

आई कॉन्टैक्ट का भी खास ध्यान दें इधर उधर नहीं देखें पूरे आत्म विश्वास के साथ ही स्पीच बोले।

मनोरंजन का भी खास ख्याल रखे कई बार ऐसा होता है कि इंसान बोर होने लगता है एक लंबी स्पीच सुनने के बाद तो आपको इस बात का भी खास ध्यान देना चाहिए कि आपकी स्पीच को सुनने के बाद लोगों को और सुनने की लालसा हो।

बीच - बीच में आप कुछ अच्छे महान पुरुष का उदाहरण बता सकते हैं।

कुछ ऐसी बातें या जोक्स बोल सकते हैं जिससे लोगो का मनोरंजन भी होता रहे।

बिना घबराए अपनी बातों को बोले रुक रुक कर या अटक कर बोलने से लोगो को अजीब सा लगेगा।

स्पीच देते वक्त इस बात का भी ध्यान रखें कि आपके चेहरे पर एक अच्छी सी मुस्कान हो, चेहरे को नॉर्मल रखें। ना बहुत तेज़ बोलें और ना ही बहुत धीरे आपके शब्द ऐसे हो जो सबको आसानी से समझ आ जाए।

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तकनीक के द्वारा जहां एक और मैं सोचा गया था की लोगों के बीच की दूरियां कम की जाएंगी वहीं दूसरी ओर तकनीक के क्षेत्र में होने वाले विकास के कारण यह दूरियां और भी बढ़ गई हैं । भले ही कोई व्यक्ति बैठे-बैठे ही किसी से बातचीत कर पाता है, मगर उसने इस विकास को अपनी सहूलियत बना लिया है । ज्यादातर लोग अब अपने परिजनों से जाकर मिलने की जगह व्हाट्सएप पर ही हाल-चाल पूछ लिया करते हैं इसी कारण लोगों के बीच की दूरियां बढ़ती ही जा रही हैं ।

बातचीत का कौशल आना करियर और व्यवसाय के लिए ही आवश्यक नहीं है बल्कि रिश्तो की मधुरता बनाए रखने के लिए भी जरूरी है । ऐसे में मनुष्य को ना केवल अपनी बात लोगों के समक्ष रखना आना चाहिए बल्कि अन्य व्यक्तियों के मन में चल रहे विचारों को भी समझना आना चाहिए । इस तरह ताली एक हाथ से नहीं बजाई जा सकती और बातचीत भी एकतरफा नहीं हो सकती । वास्तव में खयालों का आदान-प्रदान ही बातचीत कहलाता है । अगर यह आदान-प्रदान जीवन में कभी भी होने लगता है तो लोगों के बीच आपसी दूरियां जन्म लेने लगती हैं ।

हम अपनों से बात करते हैं, या किसी अनजान व्यक्ति से भी बात करते हैं दो हमें विनम्र रहकर बात करनी चाहिए । ऐसा करने से रिश्तो की मिठास बनी रहती है नए रिश्तो की एक मधुर शुरुआत हो सकती है । हमारे शब्द ही हैं जो हमारा सम्मान समाज के समक्ष बना एवं बिगाड़ सकता है तथा वह पूरी तरह मनुष्य पर निर्भर करता है कि वह अपनी छवि समाज में किस प्रकार प्रदर्शित करना चाहता है । इसलिए अच्छी बातें दूसरों के साथ करना ही निजी तथा सामाजिक रिश्तो की नींव है ।

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मनुष्य अच्छा वक्ता तभी कहला सकता है जब वह एक अच्छा श्रोता हो । आजकल लोग केवल अपने ही गीत गाने में विश्वास रखते हैं तथा उनके सुनने की क्षमता दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है । हर कोई अपनी बात को केहने की हद बड़ी में उलझ कर रेह गया है, व औरो के खयालो को सुनने का धैर्य खोता ही जा रहा है।और इसी कारण मनुष्यों के बीच आपसी बैर बढ़ता ही जा रहा है।

अगर आप औरो की बातों को समझना ही नहीं चाहेंगे तो आपकी बात सिर्फ आपके ही नज़रिये का बखान करेगि। एक सच्चे वक्त की पहचान है की वह हर पक्ष की बात को सुनकर ही सूझ बूझ के साथ अपने तर्क सबके समक्ष रखे। ऐसा करने से उसके मन में हर प्रकार के विचारों का स्वागत कर, समझ कर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। यही ही नहीं बल्कि एक अच्छा वक्ता एक प्रभावशाली व्यक्ति ही बन सकता है जिसमे गलत को गलत और सही को सही सिद्ध करने की समझ व् सहस हो। देश भर में होने वाले बदलावों व, विश्वभर के चलनों आदि से जो व्यक्ति अपने आपको परिचित रख पाए वाही व्यक्ति अपने तर्कों को एक सही ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता रखता है अर्थात एक अच्छा वक्ता बनने की काबिलियत रखता है।

जीस प्रकार महाभारत के युद्ध में अर्जुन ने एक उत्तम धनुर्धारी होने के बावजूद भी श्री कृष्णा के मार्ग दर्शन पर चलने के मार्ग को अपनया, उसी प्रकार मनुष्य को कभी-कभी अपनी कुशलता सिद्ध करने के लिए अपनी प्रतिभाओं का प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं होती। वह केवल उचित व्यवहार व आदर से भी अपनी छाप छोड़ने में सफल रहते है। ज़रूरत होती है तो बस एक धीरज से परिपुर्ण मन की!