सफलता का मूलमंत्र : संयम

सफलता का मूलमंत्र : संयम

  

" धैर्य बहुत ही महत्वपूर्ण है। बूंद-बूंद करके ही जग भरता है।"

यह प्रसिद्ध विचार संसार को अपने ज्ञान से मार्गदर्शन देने वाले महात्मा बुद्ध का है। अपने इस कथन में महात्मा बुद्ध ने बहुत महत्वपूर्ण बात पर प्रकाश डाला है। यहां उन्होंने बताया है कि किसी भी कार्य को संपन्न होने में समय लगता है। अर्थात लक्ष्य की प्राप्ति की प्रक्रिया ऐसी है, जिसमे एक निश्चित समय लगता है।

मंजिल तक पहुंचने और सफलता पाने तक के इंतजार में वह गुण जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह है संयम। जी हां मित्रों, धैर्य, धीरज, या संयम ही वह गुण है, जो हमें सफलता मिलने तक प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित करता है। इसीलिए इसे सफलता का मूल मंत्र कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

किंतु क्या सभी संयम के इस गुण का पालन कर पाते हैं? जवाब है नहीं !

हममें से ज्यादातर लोग लक्ष्य जल्दी प्राप्त न होने पर व्याकुल हो जाते हैं और अपने पथ से भ्रष्ट हो जाते हैं। यह सब संयम की कमी का परिणाम है। एक संयमी व्यक्ति शांत होकर सफलता का इंतजार करता है।

सफलता पाने के मार्ग में आ रही कठिनाइयों को वह सहज भाव से पार करता जाता है क्योंकि उसे यह विश्वास होता है कि एक न एक दिन सफलता अवश्य उसके कदम चूमेगी।

दुनिया के सबसे सफल व्यक्तियों की सफलता के पीछे संयम का बड़ा हाथ रहा है, चाहे वह बिल गेट्स हों, जैक मा हों या जेफ बेजोस हों। इतिहास गवाह है कि इन व्यक्तियों ने कई सालों तक कठिन परिश्रम किया और परिस्थितियों से कभी हार नहीं मानी।

सफलता के शिखर तक पहुँचने वाले लोगों ने भी कई बार असफलता का सामना किया, लेकिन वह इस असफलता से व्याकुल नहीं हुए, क्योंकि उनके पास एक बहुत प्रभावशाली हथियार था, और वह हथियार था संयम!

संयम रखने का ही परिणाम है कि आज वह इतने सफल है। मित्रों, संयम के महत्व को समझने के लिए आइए इतिहास में चलते हैं और एक ऐसे व्यक्ति के जीवन में झांकते हैं, जिसने अपने जीवन में सफलता का स्वाद एक लंबे अरसे के इंतजार के बाद चखा।

आज हम इस कहानी के माध्यम से यह देखेंगे कि व्यक्ति की सफलता में संयम का कितनी और क्या भूमिका होती है। आज हम बात कर रहे हैं अब्राहम लिंकन की। जी हां, अमेरिका के 16 वें राष्ट्रपति और दास प्रथा से दुनिया को उबारने वाले महान अब्राहम लिंकन संयम के सर्वश्रेष्ठ उदाहरणों में से एक है।

उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था एवं उनका पूरा जीवन संघर्ष करते हुए गुजरा। लिंकन जब राजनीति में आए, तब वह यहां एक अच्छा मुकाम हासिल करना चाहते थे, ताकि वह अपने पद का प्रयोग समाज की सेवा एवं कल्याण के लिए कर सकें।

लेकिन 21 वर्ष की उम्र में वह वार्ड सदस्य का चुनाव हार गए। केवल यही नहीं, उनकी निजी जिंदगी भी कई परेशानियों से भरी रही। उन्होंने अपने आधे से ज्यादा राजनीतिक जीवन में सिर्फ और सिर्फ हार का सामना किया। 32, 37, 42 और 47 साल की उम्र में भी वह लगातार संसद के चुनावों में हारते रहे।

एक समय ऐसा आया था कि वह निराशा के सागर में इतने डूब गए थे, कि उनके मन में आत्महत्या जैसे विचार आने लगे। इतनी सारी असफलता देखने के बाद कोई भी व्यक्ति सामान्यतः अपने प्रयासों पर पूर्विराम लगा कर स्थिति से समझौता कर लेगा। लेकिन लिंकन ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने धैर्य और संयम का अद्भुत उदाहरण पेश करते हुए स्वयं पर और अपने लक्ष्य पर विश्वास रखा। उन्होंने अंत तक सफलता पाने के अपने इस सपने को नहीं छोड़ा।

इसी संयम के बल पर उन्हें डटे रहने की प्रेरणा मिलती रही और अंततः वह अपने सपने को साकार करने में सफल हुए। 52 वर्ष की उम्र में उन्होंने अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता और अमेरिका के 16 वें राष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए।

उनका संघर्ष यहाँ भी खत्म नहीं हुआ। राष्ट्रपति बनने के एक महीने बाद ही अमेरिका में गृह युद्ध प्रारंभ हो गये लेकिन लिंकन ने अपने धैर्य और बुद्धिमता का परिचय देते हुए अमेरिका को इस भीषण युद्ध से उबारा।

तो मित्रों, देखा आपने कि लिंकन ने किस प्रकार जीवन भर संयम से काम लिया। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि यदि लिंकन परिस्थितियों, मुश्किलों और असफलता के सामने हार मान लेते तो वह इस मुकाम पर कभी नहीं पहुंच पाते।

उन्हें एक बार नहीं, बार-बार असफलता मिली। लेकिन उन्होंने धैर्य और विश्वास का दामन कभी नहीं छोड़ा। आज हमें लिंकन से प्रेरणा लेनी चाहिए और यह समझना चाहिए कि सफलता पाने के लिए सबसे बड़ा मूल मंत्र है संयम।

हम यहीं पर भूल कर जाते हैं । कुछ समय प्रयास करने के बाद जब हमें सफलता प्राप्त होती नहीं दिखती तो हम निराश होकर प्रयास करना ही छोड़ देते हैं। इसीलिए अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने जीवन में संयम की भूमिका को समझें और इससे अपना गुण बनाएं ताकि सफलता के लिए हमारे प्रयास सार्थक हो सके। इसी कड़ी में हम जानेंगे कि एक व्यक्ति अपने संघर्ष के दिनों में किस प्रकार संयम रख सकता है।

संयम कैसे बनाये रखें?

खुद पर विश्वास रखें I मित्रों, संयम का जन्म विश्वास से ही होता है। संयम का वृक्ष लगाने के लिए विश्वास का बीजारोपण अति आवश्यक है। चाहे आप कोई व्यवसाय शुरू करने जा रहे हो, किसी प्रतियोगिता में उत्तीर्ण होना चाहते हो, किसी पद पर पहुंचना चाहते हो, आप जो भी पाने की इच्छा रखते हैं, उस पर विश्वास रखें।

सफलता चुटकी बजाते ही नहीं मिलती। इसके लिए इंतजार और कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। विश्वास करें कि आपने जो लक्ष्य तय किया है, उस तक आप एक दिन अवश्य पहुंच पाएंगे।

संयम सकारात्मकता का दूसरा नाम है और सकारात्मकता इसी विश्वास के बलबूते पर विकसित होती है। खुद पर विश्वास ना सिर्फ आपको परिश्रम करते रहने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा बल्कि संघर्ष के दिनों में सकारात्मक रहने में भी मददगार साबित होगा।

काम पर अधिक ध्यान :

भागवत गीता में श्री कृष्ण जी ने अर्जुन से कहा था कि -

"हे पार्थ! कर्म करो, फल की चिंता मत करो।"

श्री कृष्ण द्वारा कहा गया यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है। सफलता मिली या नहीं, इस पर से ध्यान हटाकर अपने प्रयासों व परिश्रम पर अधिक ध्यान लगाए। हमारा ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि सफल होने के लिए और अपने लक्ष्य को पाने के लिए हम कितनी मेहनत कर रहे हैं।

यदि हमारा ध्यान सफलता जल्दी मिलने की ओर होगा तो स्वभाविक है कि हमारी कोशिशों में कमी आ जाएगी। अक्सर हम थोड़ा सा प्रयास करने के बाद जब देखते हैं कि हम अभी भी असफल है तो इससे हमारा मन व्याकुल होने लगता है।

यदि यह व्याकुलता इसी तरह चलती रहे तो हम अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। यहां संयम की भूमिका प्रकाश में आती है। आपको यह समझना होग कि सफलता तभी प्राप्त होगी, जब आप इसे पाने के लिए अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग करेंगे।

आपको केवल अपनी मेहनत पर ध्यान केंद्रित करना होगा और सफलता का शांति से इंतजार करना होगा। इसीलिए अपना पूरा ध्यान ईमानदारी से मेहनत करने पर लगाएं।

भावनाओं पर नियंत्रण रखें :

नियंत्रण संयम का पर्याय है। मन को काबू में रख कर ही संयम को साधा जा सकता है। अक्सर ऐसा होता है कि छोटी सी सफलता मिल जाने पर ही हम बहुत खुश हो जाते हैं I इस छोटी सी सफलता के जश्न में हम भूल जाते हैं कि वास्तव में सफलता हमें अभी मिली नहीं है। इसीलिए यहां बहुत जरूरी हो जाता है कि आप अपनी भावनाओं पर काबू रखें।

तभी मन में संयम साधा जा सकता है। न ही अत्यधिक उत्सुकता अच्छी होती है, और न ही अत्यधिक निराशा। इसीलिए अपने मन पर नियंत्रण साधे और संयम का हाथ पकड़कर सफलता पाने की दिशा में प्रयास करते रहे।

निष्कर्ष :

तो मित्रों, इस लेख में आपने जाना की असफलता का बहुत बड़ा कारण संयम की कमी हो सकती है। सफलता पाने के लिए सबसे आवश्यक गुणों में से एक है संयम, जिसके बारे में आज हमने चर्चा की है।

आशा है कि आज के लेख को पढ़कर आप संयम के महत्व को अच्छी तरह से जान चुके हैं और अब से आप भी संयमी बनने का प्रयास करेंगे।

यदि इस लेख से जुड़ी कोई राय आपके मन में है तो अपनी राय हमारे साथ जरूर साझा करें। आप अपनी राय पोस्ट कर सकते हैं और बता सकते हैं कि संयम रखने के लिए आप कौन-कौन से उपाय अपनाते हैं।


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