सचिन तेंदुलकर की सफलता के नियम

सचिन तेंदुलकर की सफलता के नियम

  

सचिन रमेश तेंदुलकर एक ऐसा नाम है, जिससे न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में बच्चों से लेकर बूढ़े तक वाक़िफ़ हैं। जब-जब क्रिकेट की बात आती है, तब - तब सचिन तेंदुलकर का नाम जरूर लिया जाता है।

क्रिकेट की चर्चा सचिन तेंदुलकर के नाम के बिना हमेशा अधूरी रहेगी। या फिर यह कहें कि सचिन के बिना क्रिकेट अधूरा है, तो यह भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
भारतीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर का योगदान अतुलनीय एवं अद्वितीय है। अपने बेहतरीन प्रदर्शन से उन्होंने न सिर्फ पूरी दुनिया में भारतीय क्रिकेट टीम का लोहा मनवाया, बल्कि कई ऐसे रिकॉर्ड स्थापित किए हैं, जिसे आज तक कोई तोड़ नहीं पाया है।

इसीलिए उन्हें क्रिकेट के भगवान की उपाधि दी गई है। चाहे बात सबसे ज्यादा रन बनाने की हो, या सबसे ज्यादा शतक या चौका लगाने की हो, सचिन का नाम सबसे आगे है। पूरी दुनिया में उन्हें मास्टर ब्लास्टर कह कर संबोधित एवं सम्मानित किया जाता है।


महज़ 16 साल की उम्र में पेशेवर क्रिकेट की दुनिया में कदम रखने वाले सचिन तेंदुलकर आज करोड़ों दिल की धड़कन हैं। उन्होंने सफलता के नए - नए आयाम बनाकर भारत का नाम पूरी दुनिया में ऊंचा किया है।

यही नहीं, वह भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित होने वाले पहले खिलाड़ी हैं। जब बात सचिन की आती है, तो हमारे दिमाग में एक और नाम आता है, और वह है रमाकांत आचरेकर का, जो कि सचिन के कोच थे।

रमाकांत आचरेकर ने सचिन को क्रिकेट का कौशल सिखाया और इसके साथ ही असल जिंदगी के भी कई ऐसे पाठ पढ़ाएं जिनके कारण सचिन को पूरी दुनिया ना सिर्फ एक महान क्रिकेटर के रूप में, बल्कि एक बेहद उम्दा शख्सियत के रूप में जानती है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि सचिन आज सफलता के जिस शिखर पर खड़े हैं, वहां तक पहुंच पाना हजारों लोगों का सपना होता है। आज का यह लेख बहुत खास होने वाला है। क्योंकि आज हम आपके सामने सचिन की सफलता के कुछ नियम पेश करने वाले हैं, जिन्होंने उन्हें एक आम इंसान से क्रिकेट का भगवान बना दिया।

निश्चय ही सचिन की यह रणनीतियां आज के युवाओं के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत हैं। तो आइए जानते हैं वह सब कारक जिन्होंने सचिन को आज इतना सफल बनाया है :

✴ सपनों का पीछा करो :

सपने सभी देखते हैं। जीवन में कुछ पाने के, कुछ बनने के, और कुछ कर दिखाने के सपने हम सभी देखते हैं। लेकिन क्या हमारे सभी सपने पूरे हो पाते हैं?

असफलता और सफलता के बीच इस सपने के फासले के बारे में सचिन ने बहुत अच्छी बात कही थी। उनकी अद्भुत सफलता के पीछे यह कारण है कि उन्होंने न सिर्फ सपने देखे, बल्कि अपने सपनों का पीछा किया, तब तक, जब तक वह पूरे नहीं हो गए।

उन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए दिन-रात ही नहीं, बल्कि कई सालों तक मेहनत की। सचिन सपनों का पीछा करने पर विश्वास रखते हैं। इंडिया के लिए एक वर्ल्ड कप लाना सचिन का सपना था और इस सपने को पूरा करने के लिए सचिन ने 1 या 2 वर्ष नहीं बल्कि पूरे 21 वर्ष तक इंतज़ार किया। जी हां! पूरे 21 वर्ष। यह काफी लंबा समय है, लेकिन सचिन ने इस सपने को नहीं छोड़ा।

वर्ल्ड कप के इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने परिश्रम जारी रखा और आखिरकार 21 वर्षों के बाद भारत वर्ल्ड कप के खिताब से नवाजा गया। सचिन का मानना है कि सपने जरूर पूरे होते हैं। उन्हें पूरे होने में कुछ ज्यादा समय लग सकता है, लेकिन एक दिन वह जरूर पूरे होते हैं।

कई बार ऐसा होता है कि हम परिश्रम तो करते हैं, लेकिन एक समय आने के बाद हम सफलता की उम्मीद छोड़ देने लगते हैं, हम बहाने बनाने लग जाते हैं और हार मान लेते हैं।
लेकिन हमें यह नहीं पता होता है कि हो सकता है लक्ष्य प्राप्ति की ओर बढे हमारे एक और कदम के बाद सफलता हमारा इंतजार कर रही हो।

हम अथक प्रयास करने के बाद यह सोचने लग जाते हैं कि यह मुझसे नहीं हो पाएगा, लेकिन यदि वहीं हम हिम्मत दिखाएं और परिश्रम कर आगे बढे तो हमारे सपने जरूर पूरे होंगे। उनका पीछा करते रहें।

✴ खुद पर विश्वास :

मित्रों, सचिन आज इतने सफल इसीलिए है क्योंकि उन्होंने हर परिस्थिति में अपने ऊपर सबसे ज्यादा विश्वास रखा। उन्होंने अपनी काबिलियत को ना सिर्फ समझा बल्कि उस पर भरोसा किया और मैदान में आत्मविश्वास का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया।

सचिन की सफलता में उनके आत्मविश्वास का योगदान इतना बड़ा है कि उनके करियर की शुरुआत ही इसी आत्मविश्वास के बल पर लिए गए एक बड़े फैसले से हुई। 16 साल के सचिन को जब भारत के लिए खेलने का मौका मिला तब मैदान में तेज गेंदबाज की बॉल लगने के कारण उनके नाक में चोट लग गई और उनकी नाक से बेतहाशा खून बहने लगा।

इसे देखकर अन्य खिलाड़ियों एवं सभी दर्शकों को लगने लगा था कि इतनी छोटी उम्र के सचिन इस मैच को नहीं खेल सकते । लेकिन 16 साल के इंसान की सोच ने हजारों लोगों की सोच को गलत साबित कर दिया। जब सचिन को मैदान छोड़कर जाने की सलाह दी गई तब उन्होंने कहा, "मैं खेलेगा" और अगले ही बॉल पर उन्होंने चौका लगा डाला।

यह देखकर पूरी दुनिया दंग रह गई। सचिन ऐसा इसीलिए कर पाए क्योंकि उन्हें किसी और से अधिक खुद पर सबसे ज्यादा विश्वास था। उन्हें अपनी मेहनत, अपनी क्षमता और अपनी तैयारी पर पूरा भरोसा था इसीलिए हजारों लोगों के हताश हो जाने के बाद भी उनका स्वयं पर से विश्वास नहीं डगमगाया और उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की।

यदि उस दिन सचिन सब की बात मानकर मैदान छोड़ कर चले जाते तो शायद उनके करियर की शुरुआत इतनी बेहतरीन नहीं हो पाती। यह बड़ा फैसला उनके अटूट आत्मविश्वास का ही परिणाम था जिसने उन्हें मान-सम्मान, सफ़लता, पैसा, सब कुछ दिलाया।

जब परिस्थितियां उनके खिलाफ थी तब उन्होंने अपने आत्मविश्वास का सहारा लिया और अपने प्रदर्शन से सबका दिल जीत लिया। सचिन का मानना है कि यदि आपको अपनी प्रतिभा पर विश्वास है, यदि आप अपनी तैयारी से आश्वस्त हैं तो आप कुछ भी कर सकते हैं।

सचिन कहते हैं कि वह जो भी करते हैं पूरे आत्मविश्वास के साथ करते हैं। यदि वह इसमें असफल भी हो जाए तो कोई बात नहीं क्योंकि सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। चाहे वह असफल हो या सफल, वह अपनी क्षमताओं पर पूरा विश्वास रखते हैं।

✴ जीत से पहले की तैयारी :

मित्रों सफलता 1 दिन में नहीं मिल जाती। रातों-रात सफल होने वाले व्यक्ति की सफलता के पीछे कई सालों की मेहनत छुपी होती है। सचिन की सफलता का यह नियम हर उस व्यक्ति पर लागू होता है जो कुछ कर दिखाने की इच्छा रखता है। किसी भी क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए आपको उस चीज़ के लिए पहले से तैयार होना होगा।
यदि कोई परीक्षा है तो उसके लिए आपको कई दिनों पहले से पढ़ाई करनी होगी। परीक्षा से एक रात पहले पढ़ कर आप सबसे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकते।

इसी तरह बिना तैयारी के खेल के मैदान में उतर जाने वाला खिलाड़ी कभी महान नहीं बन सकता। सचिन कहते हैं कि : "पहले की तैयारी बहुत महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि जब मैं मैदान में जाऊं तो मुझे यह पता होना चाहिए कि मैंने अपनी क्षमता की पराकाष्ठा तक मेहनत की है।

इससे बेहतर मैं नहीं कर सकता था क्योंकि यह मेरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। तब मैं खेलने के लिए स्वयं को पूरी तरह तैयार मानता हूं। दुनिया में ऐसा कोई खिलाड़ी नहीं है जो यह बता सकता है कि आज वह 100 या 500 रन बनाने वाला है।

कभी-कभी परिणाम अच्छे होते हैं तो कभी-कभी प्रदर्शन अच्छा नहीं हो पाता। हमारी उम्मीदें साकार नहीं हो पाती। परिणाम हमारे हाथों में नहीं है लेकिन वह कारक जिन पर परिणाम निर्भर करता है, मैं उन्हें नियंत्रण में रखने पर विश्वास रखता हूं।

कर्म का फल आपके हाथ में नहीं है लेकिन तैयारी पूरी तरह से आपके हाथों में है, प्रयास करना, अपना शत-प्रतिशत देना आपके नियंत्रण के अंदर है। इसीलिए हर अवसर के लिए के लिए खुद को तैयार रखें।"

✴ हार ना मानना :

सचिन का कहना है कि हर इंसान में कुछ न कुछ विशिष्ट प्रतिभा होती है। आवश्यकता है उस प्रतिभा को पहचानने की। एक बार जब आप अपनी प्रतिभा को पहचान लेते हैं तब आप सफलता प्राप्ति के रास्ते पर चल सकते हैं।

यह रास्ता आसान नहीं होगा। आपके लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में कई सारी रुकावटें आ सकती हैं। पर आप हार ना मानें। या फिर शॉर्टकट ना ढूंढे। सही रास्ते पर चलना सबसे जरूरी है। यह रास्ता मुश्किलों से भरा हुआ हो सकता है जहां आपको इसे पार करने में बहुत सारी कठिनाइयों को उठाना पड़ सकता है।

लेकिन याद रखें कठिन परिस्थितियों में मजबूत व्यक्ति ही टिक पाते हैं। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। इसीलिए आसान रास्ते को चुनकर सफलता प्राप्त कर पाने का विचार सही नहीं है। चाहे सफलता का रास्ता कितना भी जटिल क्यों न हो, चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों ना आए, आपको हार नहीं माननी चाहिए। तभी आप अपनी मंजिल को पाने में सफल हो पाएंगे।

✴ अच्छे व्यक्ति बनें :

सफलता की सार्थकता तब सिद्ध होती है जब आपका व्यक्तित्व अच्छा हो। आप चाहे किसी भी क्षेत्र में सफल होना चाहते होंं, चाहे वह खेल, व्यवसाय, विज्ञान इत्यादि कुछ भी हो, हर क्षेत्र में सफलता के सही मायने अच्छे व्यक्तित्व से तय होते हैं।

सचिन कहते हैं कि जीवन में सब कुछ अस्थाई होता है । सफलता, नाम, शोहरत, सब कुछ एक दिन खत्म हो जाएगा। बस एक चीज है जो आपके साथ हमेशा, आपकी आखरी सांस तक रहेगी, और वह है आपका व्यक्तित्व। आपकी प्रकृति अच्छी होनी चाहिए क्योंकि आपकी सफलता, पैसे इत्यादि से कहीं ज्यादा लोग आपको आपके अच्छे व्यक्तित्व के कारण याद रखेंगे।

एक इंटरव्यू में सचिन ने अपने पिता द्वारा कही बात का जिक्र किया था। वह कहते हैं कि भारत के लिए मैच खेलने के बाद उनके पिता ने उनसे कहा था कि : क्रिकेट खेलने के कारण लोग तुम्हारी प्रशंसा करेंगे, तुम्हारी प्रतिभा, क्षमता को सराहेंगे, लेकिन मैं तब अधिक खुश होऊंगा जब लोग क्रिकेटर से अधिक एक अच्छे इंसान के रूप में तुम्हारी सराहना करेंगे। इसीलिए सचिन भी सभी युवाओं को यही संदेश देते हैं कि हमें सबसे पहले अच्छा इंसान बनना चाहिए ।

✴ हमेशा तैयार रहें :

दोस्तों, हम नहीं जानते कि जीवन में कब हमें अपनी प्रतिभा, अपने कौशल का जलवा बिखेरने का अवसर प्राप्त हो जाए। ऐसे में हमें आने वाले अवसर के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। सचिन का मानना है कि हमें हमेशा अपनी पूरी तैयारी में रहना चाहिए ।

आपको पता नहीं कि कब अवसर आपके दरवाजे पर आकर खड़ी हो जाए, ऐसे में आप इस अवसर का लाभ तभी उठा पाएंगे, जब आप उसके लिए पूरी तरह से तैयार होंगे।
अवसर आने के बाद तैयारी करने का कोई मतलब नहीं रह जाता और ना ही यह समझदारी है। वह कहते हैं कि जब वो खेलने जाए तो उन्हें ऐसा लगना चाहिए कि यह उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास था।

सचिन की इस सोंच ने उनकी सफलता में चार चांद लगा दिए हैं। लगातार चौके - छक्के, आसमान को छूती उनकी गेंद, उनकी इसी तैयारी का नतीजा है जिसके कारण वह हर अवसर पर अपना शत-प्रतिशत दे जाते हैं।

निष्कर्ष :

मित्रों, आशा है कि यह लेख आपके लिए बहुत रोमांचक रहा होगा। क्योंकि इस लेख में सचिन के जिंदगी के ऐसे वाक्यों का जिक्र है, जो शायद आप आज से पहले नहीं जानते होंगे। मित्रों, यह लेख अपने आप में प्रेरणा का स्रोत है उन सभी युवाओं के लिए जो अपनी जिंदगी में सफलता की ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं।

यह वह नियम, वह रणनीतियां है जिन्होंने सचिन को इतना सफल और इतना लोकप्रिय बनाया है। इन रणनीतियों का पालन करके आप भी अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। यदि आपके मन में इस लेख से संबंधित कोई भी राय हो, तो उसे हमारे साथ साझा करना न भूले।

यदि आपको सचिन की कोई और रणनीति पता है, तो उसे टिप्पणी के रूप में ज़रूर पोस्ट करें, जिन्हें पढ़कर हमारे पाठकों के ज्ञान की वृद्धि होगी और उन्हें प्रेरणा मिलेगी।


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