वृक्ष हमें क्या सिखाते हैं

वृक्ष हमें क्या सिखाते हैं

  

नमस्कार मित्रों, स्वागत है आपका आज के लेख में। आज की चर्चा थोड़ी अलग है। आज का यह लेख आप को प्रेरणा देने वाला और बहुत कुछ सिखाने वाला है । लेकिन आज यह प्रेरणा न तो आप किसी मशहूर शख्स से, न किसी सफल उद्योगपति से, या फिर किसी व्यक्ति से नहीं लेने जा रहे हैं।

आज के लेख में आपको प्रेरणा से भरने के लिए हमने वृक्षों का चुनाव किया है। आपको शीर्षक देखकर यह तो पता चल ही गया होगा कि आज हम वृक्षों की बात कर रहे हैं और हो सकता है आप आश्चर्य कर रहे हो क्योंकि हमने आज तक वृक्ष को केवल एक जीव मात्र के रूप में देखा है।

लेकिन यदि वृक्ष के जीवन का ध्यान पूर्वक अवलोकन किया जाए, तो हम पाएंगे कि वनस्पति अपने आप में प्रकृति की उन अद्भुत रचनाओं में से एक है जिसे प्रकृति ने हर प्रकार से मानव जीवन के कल्याण के लिए बनाया है। प्रकृति की गोद में जन्मे पेड़ - पौधे, वनस्पति किस प्रकार एक शिक्षक की भाँति हमें कई सारी चीज़ें सिखाते हैं, आज हम इस बात पर चर्चा करेंगे।

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हमने आजतक देखा है कि पेड़ फल - फूल, औषधियाँ, लकड़ी इत्यादि के स्रोत हैं, लेकिन आज हम पेड़ों को एक अलग नज़रिए से देखने जा रहे हैं, जहाँ वह प्रकृति के दूतों के रूप में मानवता के लिए कुछ उत्कृष्ट संदेश ले कर आये हैं।

मित्रों, अब आप सोचेंगे कि उनके ये संदेश हम तक कैसे पहुचेंगे? पेड़ न तो कुछ कह सकते हैं, और न ही अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं। लेकिन मित्रों कुछ सीखने या सिखाने के लिए बोलने की आवश्यकता नहीं होती है।

वृक्ष - वनस्पति प्रकृति की वह रचना है, जो मानव जीवन के लिए ना सिर्फ आधार और आवश्यक है बल्कि प्रेरणा का स्रोत भी है। जब बात प्रकृति से प्रेरणा लेने की आती है तो वृक्ष सबसे पहले स्थान पर है।

सुंदर, मनमोहक हरे - भरे और आंखों को सुकून देने वाले यह वृक्ष अपना पूरा जीवन दूसरों के लिए जीते हैं । अपने द्वारा पैदा किए गए फल - फूल, अनाज और असंख्य खाद्य भंडार भी वह खुद नहीं खाते, बल्कि उससे अन्य जीव-जंतुओं का भरण पोषण करते हैं।

वृक्षों की निस्वार्थ सेवा भाव हम सभी के लिए अनुकरणीय है। यह दुनिया जहां मनुष्य हर संबंध स्वार्थ वश बनाता है, वहां हमें इन वृक्षों से सीख लेनी चाहिए।

पेड़ - पौधे सदैव जंतुओं की सेवा करते हैं, चाहे बात प्राणवायु ओक्सिजन उपलब्ध कराने की हो, चाहे भरण पोषण की हो, वृक्षों के बिना हमारे अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इतने महत्वपूर्ण होने के बाद भी एक वृक्ष अपना जीवन सादगी से और विनम्रता से जीता है।

वृक्ष में ऐसे कई सारे गुण है जो हमारे लिए अनुकरणीय है। आज हम उन्हीं की चर्चा करेंगे और जानेंगे कि वृक्षों से हम क्या सीख सकते हैं। तो आइए आज की चर्चा प्रारंभ करें और पहले बिंदु से शुरुआत करें :

✴ ) वनस्पति सिखाती है संघर्ष करना :

मित्रों, हम जब भी किसी सफल आदमी की सफलता के पीछे के संघर्ष की कहानी को सुनते हैं या पढ़ते हैं तो हम बहुत प्रेरित महसूस करते हैं। लेकिन हम यह भी जानते हैं कि संघर्ष करना अत्यंत कठिन है । हर कोई संघर्ष नहीं करना चाहता क्योंकि हम सभी अपनी सुविधा क्षेत्र में रहना चाहते हैं।

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अपनी सुविधा क्षेत्र में रहना हमें बहुत अच्छा लगता है। इसीलिए हम मेहनत की जगह आराम को चुनते हैं, परिश्रम की जगह आलस्य को और संघर्ष के स्थान पर अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। पर क्या ऐसा व्यक्ति, जो मेहनत, संघर्ष और परिश्रम से भागता है वह सफल हो सकता है ?

जवाब है - नहीं।

सफलता संघर्ष से मिलती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण और सबसे बड़ी प्रेरणा है वृक्ष। अपने आसपास किसी विशालकाय पेड़ को देखकर आपको उसकी बड़ी काया का आभास तो होता है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि वह पेड़, जो आज आसमान की ऊंचाई को छू रहा है उसका विकास एक छोटे से बीज से हुआ है।

उस छोटे से बीज ने अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए हर दिन एवं हर क्षण संघर्ष किया है, कभी पानी के लिए, कभी सूर्य की रोशनी के लिए तो कभी अपनी जड़ों के लिए जमीन पाने के लिए। तभी जाकर वह अपने आकार से 100 गुना अधिक विशालकाय बन पाया है।

यह सब कैसे हुआ?

क्या बीज से वृक्ष बनने की सफलता बनी बनाई थी?

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जमीन की गोद में पड़े बीज ने अपने आप को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए। हवा, पानी, सूर्य की रोशनी को पाने की चेष्टा की और इन प्रयासों के कारण ही वह आज इस रूप में हमारे सामने खड़ा है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ वह बीच जो खुद को अपने हाल पर छोड़ दें और अपने विकास के लिए आवश्यक कारकों की प्रतिक्षा करता रहे, वह कभी विकसित नहीं हो सकता।

वृक्ष अपने जीवन भर संघर्ष करते रहते हैं और मनुष्य को भी यह संदेश देते हैं। हमें वृक्षों से यह सीख लेनी चाहिए कि जीवन में सफल वही होता है जो संघर्ष करता है।

✴ बदलाव को स्वीकार करने की कला सीखें पेड़ो से :

मित्रों, आपको बदलाव कितना पसंद है?

क्या आप आने वाले बदलावों को सहर्ष रूप से स्वीकार कर पाते हैं?

यदि आप इस पर थोड़ा विचार करें तो आप पाएंगे कि आप बदलावों के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। ऐसा इसीलिए क्योंकि मनुष्य के स्वभाव में असंतोष और ना बदलने की भावना निहित होती है। हम सदैव अपनी सुविधा क्षेत्र में रहना चाहते हैं और बदलना हमें अच्छा नहीं लगता। लेकिन संसार का नियम परिवर्तन का नियम है और जिसने अपने आप को इस परिवर्तन के अनुसार नहीं ढाला, वह अपने अस्तित्व को बरकरार नहीं रख पाता है।

हम मनुष्य हर वक्त बदलाव का प्रतिरोध करते रहते हैं। सर्दी के मौसम में तापमान में आए बदलाव, अर्थात अत्यधिक ठंड हमें परेशान करती हैं, तो वहीं दूसरी तरफ गर्मी के मौसम में बढ़ता तापमान और मौसम के गर्म होने पर हम परेशान हो पड़ते हैं। हमारे ऐसे रवैये से हमारा ही नुकसान है।

यदि समय के साथ बदलने और खुद को परिस्थितियों के अनुरूप ढालने की प्रेरणा लेने की बात की जाए तो वनस्पति से बड़ा उदाहरण और कुछ नहीं हो सकता। आप बदलाव की इस प्रक्रिया को वृक्षों के माध्यम से बखूबी समझ सकते हैं। मित्रों, वनस्पति, पेड़ - पौधे बदलना जानते हैं। वह समय के साथ खुद को ढालना जानते हैं इसीलिए वह लंबे समय तक अपने अस्तित्व को बरकरार रखने में सफल हो पाते हैं।

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पेड़ - पौधे बदलते समय का कोई प्रतिरोध नहीं करते हैं। वह बिना विरोध किए स्वयं को सर्दी, गर्मी, धूप, वर्षा और पतझड़ के हिसाब से बदल लेते हैं। पतझड़ का मौसम आते ही वह अपने सारे पत्तों को गिरा कर, अपनी सभी शोभा, सुंदरता को छोड़कर ढूंढ का रूप ले लेते हैं। वहीं वसंत ऋतु आ जाने पर वह स्वयं को सुंदरता की चादर में ढक लेते हैं, नए पल्लव फल फूलों से स्वयं को सुशोभित कर लेते हैं।

इसी प्रकार साल भर हर बदलते मौसम और हर छोटे-बड़े परिवर्तनों को स्वीकार करते हुए वह अपनी जगह पर खड़े रहते हैं। यह गुण हम सभी को परिवर्तनशील बनने का संदेश देता है। इससे हमें यह सीख मिलती है कि बदलाव को स्वीकार करने से ही हम विकास की ओर आगे बढ़ सकते हैं।

✴ अहंकार नहीं, विनम्रता हो स्वभाव :

मित्रों, हमारे जीवन में वृक्षों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है यह तो आप जरूर जानते होंगे। वृक्षों के बिना हमारा अस्तित्व संभव नहीं है। चाहे वह प्राणवायु हो, चाहे पोषण, सभी हमें वृक्षों से ही प्राप्त होता है। मानव समाज के लिए इतनी कल्याणकारी और आवश्यक होने के बाद भी वृक्ष कभी खुद पर घमंड नहीं करते हैं।

दूर तक फैली उनकी मजबूत शाखाएं और आसमान को छूता उनका विशाल आकार, इसके बावजूद भी वृक्ष में तनिक भी घमंड नहीं होता। वृक्ष कभी अपने आप को अधिक श्रेष्ठ और दूसरों को कमतर नहीं मानते हैं क्योंकि विनम्रता ही वृक्ष का स्वभाव है।

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यह अपनी विशाल काया का उपयोग किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों को छाया देकर बड़े प्रेम से उन्हें अपनी गोद में स्थान देने के लिए करते हैं। इसीलिए पेड़ के नीचे छाया में आप अपेक्षित नहीं बल्कि आनंदित और सुरक्षित महसूस करते हैं। फल - फूल, अनाज इत्यादि यह सब देने के बाद भी वृक्ष की शाखाएं झुकी हुई रहती हैं, अर्थात विनम्रता का संदेश देती हैं।

आपने देखा होगा कि जिस वृक्ष में सबसे अधिक फल लगे होते हैं, वह सबसे अधिक झुका हुआ होता है। अर्थात, वृक्ष में जितने अधिक गुण होते हैं, वह उतना ही अधिक विनम्र होता है। अपने ऊपर लगे फलों पर वह कभी अभिमान नहीं करता है, बल्कि झुक कर विनम्र भाव दिखाकर अपने बड़प्पन का परिचय देता है।

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यह मानव तक एक बहुत बड़ा संदेश है जो कि हमें बताता है कि जो व्यक्ति जितना ही अधिक श्रेष्ठ हो उससे उतना ही अधिक विनम्र होना चाहिए। वहीं दूसरी ओर हम मनुष्य अपने गुणों पर तुरंत ही अहंकार करने लग जाते हैं और दूसरों को नीचा दिखाना हमारा स्वभाव बन जाता है।

यदि मनुष्य खुद को श्रेष्ठ समझता है तो उससे वनस्पति से सीख लेनी चाहिए। पूरे संसार को चलाने वाले वृक्ष जब इतने विनम्र हैं फिर हम इंसान किस बात का घमंड करते हैं। प्रकृति ने इन वृक्षों के माध्यम से मनुष्य को बहुत बड़ी सीख दी है और वह यह है कि हमें सदैव विनम्रता का आचरण करना चाहिए। चाहे हममें कितने भी गुण हो, चाहे हम कितने भी श्रेष्ठ क्यों ना हो, फिर भी हमें हमारी श्रेष्ठता का उपयोग दूसरों के कल्याण के लिए करना चाहिए।

संयम :

इस संसार में यदि संयम को मूर्त रूप दिया जाए, तो वह एक वृक्ष होगा। हम अक्सर जल्दबाजी में रहते हैं, हमें सब कुछ जल्दी चाहिए होता है। पहले की तुलना में लोग अब अधिक धैर्य हीन होते जा रहे हैं। संयम के इस गुण का मानव जीवन से खत्म होना बहुत बड़ी चिंता का विषय है।

यही कारण है कि आजकल लोग अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयास जल्दी ही छोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें परिणाम जल्दी नहीं मिलते। इसी तरह हम बिगड़े हुए रिश्तो को बहुत जल्दी ही त्याग देते हैं कारण कि हममें इतना संयम नहीं है कि हम उन्हें समय दे पाएं।

इस संयम हीनता का परिणाम है असफलता, दुख, कष्ट और पछतावा। जल्दबाजी से कुछ भी संभव नहीं है। ऐसे में प्रकृति ने मनुष्यों को संयम रखने की प्रेरणा देने के लिए वृक्षों में इस गुण का बड़ी ही सुंदरता से बीजारोपण किया है। एक तरफ वृक्ष का जीवन संघर्ष करते हुए बीतता है, वहीं दूसरी तरफ वह इस संघर्ष में संयम की एक बहुत बड़ी मिसाल पेश करता है।

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अपने आसपास के वृक्षों को देखें और कुछ दिन, कुछ हफ्तों, और कुछ महीनों तक उनका अवलोकन करें। आप पाएंगे कि अपने विकास और अपनी निर्णायक अवस्था में पहुंचने के लिए वृक्ष कितना संयम रखते हैं।

एक पौधे को वृक्ष बनने में सालों लग जाते हैं, उसका विकास धीरे-धीरे होता है। वृक्ष यह जानता है कि विकास की प्रक्रिया एक बार में नहीं होती है, इसमें समय लगता है। इसीलिए वृक्ष एक - एक पत्ते के विकास को संयम से देखता है और यह इसी का परिणाम है कि वह सालों की प्रतीक्षा के बाद स्वयं को मजबूत, विशाल और अद्भुत बना पाता है।

हम सभी को वृक्ष के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। हमें यह समझना होगा कि कुछ भी जल्दी नहीं मिलता। हर चीज का समय नियत होता है और विकास की प्रक्रिया में समय लगता है। हमारा शरीर भी धीरे-धीरे विकसित होता है। ठीक उसी प्रकार हम जो भी करते हैं, चाहे वह व्यवसाय हो, वह एक ही दिन में स्थापित नहीं हो सकता। उसके लिए धैर्य रखना होगा।

सफलता के लिए संयम रखते हुए प्रयास करना होगा। इसी प्रकार संबंधों को भी प्रगाढ़ होने में समय लगता है। आवश्यकता है केवल संयम रखने की।

निष्कर्ष :

तो मित्रों, यह था आज का लेख, जिसमें हमने यह जाना और सीखा कि हमारे आसपास असंख्य पेड़ - पौधे, और वृक्ष हमें नित्य प्रतिदिन क्या संदेश प्रेरणा और सीख देते हैं। प्रकृति की गोद में जन्मे यह पेड़ - पौधे अपने साथ प्रकृति के हर नियम और हर गुण को समेटे हुए हैं।

हमारे जीवन की सारी कठिनाइयां, मुश्किलों और सारे सवालों का जवाब प्रकृति में ही छिपा है। इसके लिए आपको किसी किताब या किसी शिक्षक की जरूरत नहीं है। प्रकृति स्वयं में ही सबसे बड़ी शिक्षक है। और इसी कड़ी में हमने आज के लेख में प्रकृति की बेहद सुंदर रचना - वनस्पतियों - वृक्षों द्वारा दिए गए संदेशों को जाना है।

एक वृक्ष का जीवन अपने आप में प्रेरणा का स्रोत है। जब भी आपको अपने जीवन में प्रेरणा की कमी लगे तो बाहर निकले, और वृक्षों के साथ कुछ समय बिताएं।आपको निःस्वार्थ सेवा भाव, विनम्रता, संयम, संघर्ष और न जाने कितनी ही गुण उनमें विद्यमान मिलेंगे। उनसे प्रेरणा लेकर आप अपने जीवन को और भी बेहतर और अर्थ पूर्ण बना सकते हैं।

आशा है आज का यह लेख आपके लिए न सिर्फ रोचक साबित हुआ है, बल्कि इससे आपको कई सारी ऐसी जानकारियां मिली हैं जिनके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होगा। आशा है कि आज से वृक्षों को देखने का आपका नजरिया बदल गया होगा और अब जब भी आप किसी पेड़ को देखेंगे तो आपको उनमें प्रेरणा और सुंदर संदेश छिपे दिखाई देंगे।

इसीलिए प्रकृति का आदर करना सीखें और जितना हो सके पेड़ पौधों को बचाने का प्रयास करें। वृक्ष आप के सबसे अच्छे मित्र बन सकते हैं, एक बार कोशिश करके तो देखिए! यदि इस लेख से जुड़े आपके मन में कोई राय हो तो उन्हें हमारे साथ साझा करना बिल्कुल ना भूलें। आपकी राय और आपकी टिप्पणियों का हमें बेसब्री से इंतजार रहता है।


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