बहाने बनाने की आदत : सफलता में सबसे बड़ी रुकावट



इस लेख को शुरू करने से पहले हमने आपके लिए कुछ वाक्य लिखे हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें।

"आज मन नहीं कर रहा।"

"मुझसे यह नहीं हो पाएगा।"

"कहीं मैं असफल हो गया तो क्या होगा? इस काम को छोड़ देना चाहिए।"

"बाद में कर लूँगा।"

इन सभी वाक्यों में एक बात समान है। यह सभी वाक्य किसी न किसी तरीके से किसी काम को टालने की बात कर रहे हैं या उस काम के प्रति व्यक्ति की अनिच्छा को दर्शा रहे हैं।

क्या आपकी बोलचाल में भी इस तरह के वाक्य शामिल हैं? क्या आप अक्सर इनका प्रयोग करते हैं?

यदि इस तरह के वाक्य आपकी रोजमर्रा के बोलचाल का हिस्सा हैं, तो आपको यह समझ जाना चाहिए कि आपने एक ऐसी आदत से दोस्ती कर ली है, जो आपको सफलता के शिखर तक पहुंचने से रोक रही है।

यह आदत आपकी सफलता में सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो सकती है। यह आदत हमारे अंदर विकसित हो कर अपने पांव पसार लेती है, लेकिन हमें इसका पता भी नहीं चलता।

यह आदत है - "बहाने बनाने की आदत।"

अब आप कहेंगे कि आखिर कौन बहाने नहीं बनाता? जी हाँ, सही कहा आपने!

हम सब अपने जीवन में बहाने बनाने की आदत के आदि हैं। कई बार किसी काम को टालने के लिए, आलस के कारण, खुद पर विश्वास की कमी इत्यादि के कारण हम कोई ना कोई बहाना बनाते ही रहते हैं।

जब भी आप कोई नया बहाना देते हैं तब आपको यह लगता है कि आपने ऐसे काम करने से खुद को बचा लिया जो आप नहीं करना चाहते हैं। लेकिन मित्रों, यह क्षणिक संतोष आपको केवल आंशिक तौर पर खुशी देता है।

इस क्षणिक सुख में आप एक बहुत महत्वपूर्ण बात पर ध्यान देना भूल जाते हैं। बहाना बना कर काम टालने से आप नए अनुभवों, रोमांच और नए अवसरों के सभी दरवाज़ों को खुद के लिए स्वयं ही बंद कर देते हैं और अपनी क्षमताओं का विस्तार होने से रोक देते हैं।

इस पहलू पर आपने पहले शायद ही कभी विचार किया होगा। अब यदि आप पीछे मुड़ कर देखेंगे तो आपको यह पता चलेगा कि आपने कई ऐसे अवसरों को इस बहाने बनाने की आदत के चलते गवां दिया।

चलिये एक उदाहरण लेते हैं। इसके लिए अपने स्कूल के दिनों में चलते हैं।

आपके स्कूल या कॉलेज में हो रही किसी प्रतियोगिता में यदि आपने यह सोच कर भाग नहीं लिया कि यह मुझसे नहीं हो पाएगा, या अगर मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया तो लोग क्या सोचेंगे, या इस प्रतियोगिता में भाग लेने में बहुत मेहनत है, तो कुछ समय के लिए आपको संतोष अवश्य मिल जाता है ।

लेकिन आपको इस बात का एहसास नहीं होता है कि अपनी इस झिझक, अपने बहानों के कारण आपने प्रतियोगिता में भाग लेने के एक बड़े अवसर को गंवा दिया।

हो सकता है इस प्रतियोगिता में आप बहुत अच्छा प्रदर्शन कर पाते, हो सकता है दोस्तों के बीच प्रतियोगिता में आपको बहुत मजा आता और यह जीवन पर्यंत आपके लिए एक मधुर स्मृति बन जाती, या आपके अच्छे प्रदर्शन के कारण सभी आपकी तारीफ के पुल बांध देते और आप सबके बीच लोकप्रिय हो जाते।

लेकिन आपको इन में से कुछ नहीं मिला, क्योंकि आपने इस अवसर का लाभ उठाया ही नहीं। वहीं दूसरी तरफ जब आप अपने दोस्तों को इस अवसर का लाभ उठाते और आनंद लेते देखते हैं तब आपको अपने इस फैसले पर पछतावा होता है।

लेकिन कहते हैं ना! "अब पछताए का होत है, जब चिड़िया चुग गई खेत।"

जी हाँ, अवसर के निकल जाने के बाद पछतावे का कोई अर्थ नहीं बचता।

कुछ ऐसा ही जीवन के हर चरण में देखने को मिलता है। सफलता के बीच में सबसे बड़ा रोड़ा है यह बहाने बनाने की आदत।

मित्रों, आज के इस लेख में हम इसी आदत के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे और समझेंगे कि यह आदत दिखने में तो सामान्य लगती है, किंतु यह एक गंभीर विषय है जिस पर हमें और आपको मिलकर सोचना चाहिए।

इसके बाद आप उन तरीकों को भी जान पाएंगे जिससे आप हर छोटी बड़ी बात में बहाने बनाने की अपनी आदत से छुटकारा पा सकेंगे और अपनी क्षमताओं का विस्तार कर अपने व्यक्तित्व को चरम पर ले जा सकेंगे।

तो आइये सबसे पहले यह जानते हैं कि

आखिर हम बहाने बनाते ही क्यों हैं?

यह कारण हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होते हैं। यह उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों एवं चुनौतियों पर निर्भर करता है।

अक्सर व्यक्ति जब भी किसी असामान्य स्थिति में होता है, अथवा उसके सामने कोई समस्या आ जाती है तब वह बहानों का प्रयोग कर उन परिस्तिथियों से बाहर निकलने की कोशिश करता है।

पर कुछ लोग बहाने बनाने की आदत से इस प्रकार ग्रस्त हो चुके होते हैं कि वह हर समय बिना कारण और बिना आवश्यकता के ही बहाने बनाते रहते हैं।

यदि हम गहराई से देखें तो हमें ऐसे कई कारण नजर आएंगे जो व्यक्ति को बहाने बनाने पर मजबूर कर देते हैं। आइए इन पर एक नजर डालें :

"ना" न कह पाना :

कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है जहां हमारे मित्र, संबंधी या प्रिय जन हमसे कहीं जाने, या कुछ ऐसा करने की जिद करते हैं, जो हम नहीं करना चाहते हैं।

उस परिस्थिति में हम अपने करीबी लोगों को मना नहीं कर पाते हैं। सीधे "ना" न बोल पाने के कारण हम अलग अलग बहानों का सहारा लेते हैं, ताकि हम वह काम करने से बच जाएँ।

असफलता का डर :

असफलता में ही सफलता की जड़़ें छुपी होती हैं । लेकिन फिर भी लोग असफलता का सामना करने से बहुत डरते हैं। यह निश्चित है कि जब हम कुछ नया शुरू करने जाएंगे, तब असफल होने के आसार हमेशा बने रहेंगे।

लोग इसी असफलता से डर जाते हैं और कुछ नया करने का विचार त्याग देते हैं। इसके लिए वह कई तरह के बहाने बनाते हैं, जैसे मैं इसे बाद में कर लूंगा, इस कार्य को करने के लिए मेरे पास पर्याप्त संसाधन नहीं है, पर्याप्त धन नहीं है इत्यादि।

यह सभी बहाने हमें जीवन में कुछ नया करने और सफलता पाने से रोकते हैं। इसीलिए हमें इन्हें अलविदा कह देना चाहिए।

आत्मविश्वास की कमी :

बहाने केवल आलस अथवा अनिच्छा के कारण ही नहीं बनाए जाते हैं। आत्मविश्वास की कमी भी बहाने बनाने की आदत का एक बहुत बड़ा कारण हो सकता है।

यदि आप सबके सामने बोलने से डरते हैं, सबके सामने गाने से डरते हैं, इत्यादि तो आप ऐसे मौकों पर कई बहाने बनाकर खुद को किनारा कर लेते हैं।

दूसरों से तुलना :

कई बार लोग इस बात से डरते हैं कि कहीं उनकी तुलना दूसरों से ना कर दी जाए। वह सोचते हैं कि यदि कोई दूसरा व्यक्ति उनके मुकाबले किसी काम में अच्छा होगा तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाएगा।

यह डर उन्हें अपनी क्षमताओं का उपयोग करने से रोकता है। अपनी क्षमता पर इस प्रकार शंकित होने वाले लोग अक्सर बहाने बना लिया करते हैं।

किंतु हमें समझना होगा कि हर व्यक्ति अपने आप में अनोखा होता है और सब की क्षमताएं अलग-अलग होती हैं।

दूसरों से खुद की तुलना करने और खुद को कम आंकने से हमारा ही नुकसान है। ऐसी परिस्थिति में हमें बहाने नहीं बनाने चाहिए, बल्कि हर अवसर में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए।

यह तो वह कारण हैं जो हमें बताते हैं कि हम बहाने क्यों बनाते हैं। आइए अब एक और प्रश्न देखते हैं।

बहाने बनाने की आदत नुकसानदायक क्यों और कैसे है?

मित्रों, बहाने बनाने की आदत हमारे लिए बहुत बुरी है। केवल इसीलिए नहीं क्योंकि बहाने झूठ का एक स्वरूप हैं, बल्कि इसके और भी कई पहलू हैं, जिन पर आपको आज विचार करना चाहिए।

बहाने आपकी क्षमताओं को सीमित करने का काम करते हैं। कई बार आप खुद नहीं जानते कि आपके अंदर कितनी अधिक क्षमता है। इस क्षमता का इस्तेमाल कर आप अपने जीवन में कई सारी उपलब्धियां प्राप्त कर सकते हैं लेकिन अवसर आने पर इनका प्रयोग न करने से आपकी क्षमताएं निखर नहीं पाती हैं।

डर, आत्मविश्वास की कमी, इत्यादि के कारण आप इन मौकों को छोड़ देते हैं और अलग-अलग बहाने बनाने लग जाते हैं।

याद कीजिए कहीं ऐसा तो नहीं कि बहाने बनाने के कारण आपने भी अपने जीवन में कई अवसरों को खो दिया, जहां आप बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते थे।

यदि आपने इन अवसरों का इस्तेमाल किया होता तो शायद आज आपकी जिंदगी कुछ और होती। इसीलिए बहुत जरूरी है कि हम अपने आपको नई परिस्थितियों, नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करें और अपने सुविधा क्षेत्र से बाहर निकले।

यदि आपको अब ऐसा लगता है कि आपको इस आदत को जल्द से जल्द छोड़ देना चाहिए तो आप बिल्कुल सही सोच रहे हैं। तो आइये आपकी इस सोंच को सही दिशा दें। वक़्त आ गया है कि अब आप उन तरीकों को जानें, जिनसे आप बहाने बनाने की इस आदत से छुटकारा पा सकेंगे। आइए जाने।

शिकायत करना छोड़ें :

किसी भी काम को न करने के पीछे यदि आप यह कारण बताते हैं कि आपके पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे, पर्याप्त समय नहीं था, पर्याप्त धन, उपयुक्त स्वास्थ इत्यादि नहीं थे, तो ऐसा करना तुरंत छोड़ दें।

यह बात आप अच्छी तरह से जानते हैं कि सीमित संसाधनों का उपयोग करके भी हम कार्य को पूरा कर सकते हैं, यदि हममें दृढ़ निश्चय हो।

लेकिन फिर भी हम इस तरह के बहाने बनाकर अपने पैर पीछे खींच लेते हैं। इसीलिए शिकायत करना छोड़ें और आभार प्रकट करना सीखें।

"आपके पास क्या नहीं है" इस पर से ध्यान हटाकर इस पर ध्यान केंद्रित करें कि "आपके पास क्या क्या है, और आप उसका किन तरह से प्रयोग कर सकते हैं।"

आपके पास वर्तमान में जितने अवसर या जितने ही संसाधन हैं, उसके प्रति कृतज्ञ भाव रखें और उन संसाधनों एवं अवसरों का प्रयोग करना शुरू करें।

सुविधा क्षेत्र से बाहर निकले :

हम हमेशा अपने सुविधा क्षेत्र (कंफर्ट जोन) में रहना चाहते हैं। लेकिन जब सुविधा क्षेत्र में रहने की इच्छा इतनी प्रबल हो जाए कि आप छोटे बदलावों को भी अपनाने में असक्षम होने लगे, तब यह चिंता का विषय बन सकता है।

सफलता के दरवाजे तभी खुलते हैं जब हम अपने सुविधा क्षेत्र से बाहर निकलकर कठोर परिश्रम की तरफ कदम बढ़ाते हैं। पर बहाने बनाने की आदत हमें ऐसा करने नहीं देती। इसीलिए अब अपने मन में यह ठान लें कि अब आप अपने जीवन में नये क्षेत्रों का अन्वेषण करेंगे और उन सभी चुनौतियों को स्वीकार करेंगे जो आपको अपनी सुविधा क्षेत्र से बाहर निकल कर कार्य करने पर मजबूर करती है।

तभी जाकर आप अपनी क्षमताओं का शत प्रतिशत उपयोग कर पाएंगे।

अपनी जिम्मेदारी खुद लें :

कई लोगों की आदत होती है कि अपने साथ घट रही घटनाओं का कारण वह अन्य लोगों या परिस्थितियों को बताते हैं। ऐसा करना आपकी जीवन की सबसे विनाशकारी आदतों में से एक हो सकता है।

इस सोच से प्रभावित रहना कि आप की असफलता का कारण प्रतिकूल परिस्थितियां थी या कोई और व्यक्ति या वस्तु थे, तो ऐसे में आप कभी सफल नहीं हो पाएंगे।

इस बात को स्वीकार करें कि आपके साथ जो भी होता है, उसके जिम्मेदार आप स्वयं हैं, कोई अन्य व्यक्ति या परिस्थिति नहीं।

आपके जीवन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी घटना, उपलब्धि, सफलता या असफलता की जिम्मेदारी आपके ही कंधों पर है और आप ही इसका निर्वाह कर सकते हैं।

अतः आपके हर कार्य की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले। दूसरों पर आरोप लगा देने से स्थिति कभी ठीक नहीं होगी इसीलिए इस बात को मानें कि आपके साथ जो भी होता है वह आपकी वजह से होता है और आप ही इसे बदल सकते हैं।

डर पर काबू करें :

इस लेख में हमने आपको बताया है कि लोग बहाने तब बनाते हैं जब वे किसी असामान्य परिस्थिति या किसी चुनौती का सामना कर रहे होते हैं।

ऐसी परिस्थिति में हम चुनौतियों से डरकर बहानों की तरफ रुख कर लेते हैं। इसीलिए बहुत जरूरी है कि हम अपने डर पर नियंत्रण स्थापित करें।

यह डर कई प्रकार के हो सकते हैं। या तो यह असफल होने का डर हो सकता है, या तो निंदा का डर, अच्छा प्रदर्शन न कर पाने का डर, इत्यादि इत्यादि।

इसके लिए आपको अपने मन में यह विश्वास जगाना होगा कि आप हर कार्य को बेहतर ढंग से करने में सक्षम हैं और आपके अंदर भरपूर आत्मविश्वास है। आपको यह स्वीकार करना होगा कि असफलता जीवन का अभिन्न अंग है और यह कोई बुरी बात नहीं है।

असफलताओं से हमें जीवन की अमूल्य सीख प्राप्त होती है। इसीलिए यदि आप असफल हो भी गए तो यह कोई बुरी बात नहीं होगी।

निष्कर्ष :

तो मित्रों, इस लेख में आपने कई सारी बातें जानी। हमने आपको यह समझाने की कोशिश की है कि बहाने बनाने की आदत जितनी सामान्य नजर आती है, उतनी है नहीं।

यह चिंता का विषय है क्योंकि यह व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का अन्वेषण करने से रोकती है। इस लेख हमने उन सभी मुख्य बिंदुओं को शामिल करने की कोशिश की है जिससे आप इस आदत से जुड़े नुकसान को बेहतर ढंग से समझ पाएं।

स्थिति की गंभीरता समझाने के बाद हमने आपके लिए कुछ उपाय भी पेश किए हैं जिनसे आप इस आदत से निपट सकते हैं। आशा है कि यह लेख आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

यदि हाँ, तो आज ही बहाने बनाने की अपनी इस आदत को "ना" कहें और अपने जीवन में आ रहे हर नए अवसर को खुली बाहों से अपनाएं। यदि आपके मन में इस लेख से जुड़े विचार या कोई प्रश्न हैं, तो आप कॉमेंट ज़रूर करें और हमारे साथ अपनी राय साझा करें। हमें आपके विचारों का इंतज़ार रहेगा।


अपनी राय पोस्ट करें

न्यूनतम 500/500 शब्दों