प्रियजन को खोने के शोक से कैसे उबरे : सुझाव

प्रियजन को खोने के शोक से कैसे उबरे : सुझाव

  

मित्रों, मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज, परिवार और संबंधी हमारे जीने का सहारा होते हैं। हम सबके जीवन में या तो हमारे परिवार के सदस्य, अथवा कोई घनिष्ठ मित्र, या कोई संबंधी हमारे ह्रदय के बहुत निकट होते हैं, जिनसे हम बहुत अधिक प्रेम करते हैं।

माता-पिता, मित्र, दादा - दादी, पत्नी - पति, भाई-बहन इत्यादि, यह वह रिश्ते हैं, जो हमारे जीवन का आधार होते हैं।

हम इनसे प्यार करते हैं, इनकी चिंता करते हैं, इनका ख्याल रखते हैं। ऐसे में इन सभी प्रिय जनों के बिना जीवन यापन करना असंभव हो जाता है क्योंकि हम इन संबंधों और अपने आसपास इन लोगों की मौजूदगी के आदी हो जाते हैं।

कुछ दिनों की दूरी भी हमें विचलित कर देती है। लेकिन मित्रों, जीवन में कई ऐसे क्षण भी आते हैं, जहां हमें अपने किसी प्रिय जन को खोना पड़ता है।

मृत्यु जीवन का सबसे बड़ा सत्य है और धरती पर आया हर मनुष्य एक न एक दिन मृत्यु को प्राप्त होता ही है, चाहे वह मृत्यु प्राकृतिक रूप से हो, या किसी व्याधि अथवा दुर्घटना आदि के कारण।

जब भी कहीं किसी की मृत्यु होती है, तो वह किसी न किसी व्यक्ति के लिए खास होता है। ऐसे में उस व्यक्ति की मृत्यु उसके घनिष्ठ संबंधियों के लिए बहुत बड़ा सदमा होती है।

जीवन में यदि कभी ऐसा क्षण आ जाए, जब हम से हमारा कोई प्रियजन हमेशा के लिए दूर चला जाए तो यह हमारे जीवन का सबसे बुरा वक्त बन जाता है। प्रियजन की यादें भूले नहीं बुलाई जाती हैं।

ऐसे में किसी अपने को खो देने के शोक से लोग सालों साल तक उबर नहीं पाते हैं। हमारे लिए यह विश्वास कर पाना कठिन हो जाता है कि जिस व्यक्ति से हम इतना प्यार करते थे, वह अब हमारे बीच कभी लौटकर नहीं आएगा।

परंतु मित्रों, इस दुख और पीड़ा को सीने में लिए जीवन बिताना ना तो सुखद है और न ही सुंदर। यदि आगे ना बढ़ा जाए तो जीवन वहीं रुक जाता है। इसीलिए बहुत जरूरी है कि हम अपने प्रिय जन को भुलाकर जीवन में आगे बढ़े और उनकी यादों को मुस्कुराने का जरिया बनाएं।

बेशक यह कहना बहुत आसान है लेकिन करना बहुत मुश्किल। जिसके साथ रोज आप समय बिताते हैं, उसका यूं अचानक चले जाना मन को अंदर ही अंदर कचोटता रहता है। हमारी आंखें हर जगह केवल उसी व्यक्ति को ढूंढती रहती हैं।

ऐसे में इस शोक से कैसे उबरा जाए?

कैसे वापस जिंदगी शुरू की जाए ?

कैसे दोबारा हंसा जाए?

मित्रों, आज का यह लेख इसी चर्चा पर समर्पित है। आज हम बात करेंगे कि यदि किसी कारणवश हम अपने किसी प्रिय जन को खो देते हैं तो उनके जाने के गम से खुद को कैसे उबारे। आज हम आपके लिए वह तरीके लेकर आए हैं जिन्हें आप अपने जीवन में लागू करके अपने दुख को पूरी तरह तो नहीं लेकिन काफी हद तक कम कर सकते हैं।

याद रखिए, आपके प्रिय जन हमेशा यही चाहते हैं कि आप अपनी जिंदगी में खुश रहें। इसीलिए उनकी यादों को अपनी मुस्कुराहट का जरिया बनाने के लिए आइए जानते हैं कि वह कौन से तरीके हैं जिनको लागू करके आप जीवन में आगे बढ़कर नई शुरुआत कर सकते हैं:

बदलाव लाएं :

अपनों को खोने का ग़म तब और बढ़ जाता है, जब हम बार-बार उनकी चीजों, उनके कमरे को देखते हैं। जिस घर में वह रहा करते थे, जहां हर पल उनकी आहट से घर में चहल-पहल रहती थी, जिस कमरे में वह सोया करते थे, जिन चीजों को वह इस्तेमाल करते थे, उन सब का नजरों के सामने रहना बार-बार हमें अपने उस प्रिय सदस्य की याद दिलाता है।

उनके पीछे छोड़ी हुई उनकी सभी चीजें बार-बार उनके होने का एहसास दिलाती है, लेकिन जब हमारी आंखें उन्हें ढूंढती हैं तब हम उन्हें कहीं नहीं पाते हैं। ऐसे में उनके जाने के ग़म से उबर पाना और उनकी यादों को भुला पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

अगर आप आगे बढ़ने का निश्चय कर भी लें तो बार-बार उनकी चीजों से सामना आपको वापस उसी स्थिति में डाल देता है। इस स्थिति से निकलने के लिए आपको अपने जीवन में कुछ बदलाव लाने होंगे। ताकि आपका ध्यान अपने प्रिय जन और उनकी मौत से दूर जाए।

अपने अपने माहौल में थोड़ा बदलाव लाए, नई जगह जाएं, बाहर निकले, कहीं सैर करें ताकि आपका मन बहले। नई जगह जाने से आप अपने प्रिय जन की यादों से दूर जा पाएंगे जिससे आपके लिए अपने मन को कहीं और लगा पाना थोड़ा आसान हो जाएगा।

दोस्तों का ले सहारा :

किसी के जाने का गम इतना बड़ा होता है कि समझदारी और दुनियादारी की बातें उस समय धरी रह जाती है। यह वक्त ऐसा होता है जब इंसान पर इन सभी बातों का कोई असर नहीं होता और वह खुद को संभाल नहीं पाता।

हालांकि जीवन का दूसरा नाम ही परिवर्तन है। और सभी को इस परिवर्तन को स्वीकार करना पड़ता है। इसीलिए जो हो गया उसे भूलकर आगे बढ़ना जिंदगी को चलाने के लिए बहुत आवश्यक है।

जब हम किसी अपने से दूर हो जाते हैं तब बाकी सभी रिश्ते बेमानी लगने लगते हैं। हमारा किसी से बात करने का मन नहीं करता, किसी से मिलने का मन नहीं करता, बस अकेले हम उनकी यादों में खोए रहते हैं। लेकिन ऐसा करने से आप कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। आगे बढ़ने और जिंदगी को दोबारा शुरू करने के लिए आपको खुद को संभालना होगा।

इसी वक्त आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की सहायता लेनी चाहिए। लोगों से बात करना बिल्कुल बंद ना करें। लगातार बात करते रहना और अपने मूड में बदलाव लाते रहना इस स्थिति से उबरने के लिए अति आवश्यक है।

अपने दोस्तों से मिले, उनसे बातें करें, अपने करियर पर चर्चा करें, आसपास घट रही घटनाओं पर चर्चा करें जिससे आप में जीवन जीने की आशा दोबारा से जन्म ले सके।

दोस्त हमारे जीवन का वह हिस्सा होते हैं जो हमें रोते हुए से भी हंसा देते हैं। ऐसे वक्त में दोस्त आपका सबसे बड़ा सहारा बन सकते हैं। लेकिन कई बार यह होता है कि हम अपने चारों ओर ऐसी दीवार बना लेते हैं जिसके अंदर कोई प्रवेश नहीं कर पाता। यह दीवार अकेलेपन, दुख, तकलीफ की होती है।

आपके हितैषी आपकी सहायता कर सकें इसके लिए जरूरी है कि आप इस दीवार को तोड़े और अपने मित्रों की तरफ हाथ बढ़ाएं।

अपने मन की भावनाओं को बाहर निकालें :

मित्रों, दुख को कम करने का सबसे अच्छा तरीका होता है उसे बांटना। अपने प्रिय जनों को खो देने की तकलीफ, उसका अफसोस और उनके जाने के बाद उनकी कमी से पनपा दुख आपको मन ही मन मायूस कर देता है।

यह पीड़ा यदि मन के अंदर ही दबी रह जाए तो जहर की तरह इंसान को अंदर ही अंदर खोख़ला बना देती है। इसीलिए यह बहुत ज़रूरी है कि आप अपने मन की भावनाओं को छुपाए नहीं, और ना ही दबाएं। बल्कि मन के दबे हुए भाव को बाहर निकालना बहुत जरूरी है, खुल कर रोना बहुत ज़रूरी है, आंसुओं को बहा दिया जाना बहुत ज़रूरी है।

यदि आप अपने मन की बात को मन के अंदर ही छुपा कर रख लेंगे तो वह बात हमेशा आपको परेशान करती रहेगी। आप कभी उससे बाहर नहीं निकल पाएंगे और इस तरह स्थिति और भी अधिक बिगड़ जाएगी। इसीलिए अपने करीबी मित्रों, उन रिश्तेदारों जो आपके हितेषी हैं उनसे अपने मन की स्थिति, अपने मन का हाल बयां करें।

उनके साथ अपने दुख को साझा करें । आपके मन में जो कुछ भी हो वह सभी कह डालें और खुलकर रो लें ताकि आपके मन का बोझ उतर जाए।

हो सकता है कि आप सबके सामने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में हिचकिचाहट महसूस करते हो। तो ऐसे में आप अपने किसी ऐसे मित्र या रिश्तेदार अथवा परिवार जन का सहारा ले जिनसे आप बहुत अधिक प्रेम करते हैं और जिनके साथ आप सहज महसूस करते हैं।

अकेले में उनसे सारी बातें करें और अपने मन को हल्का करें। यह भी हो सकता है कि आप यह सोचते हो कि घर वालों के सामने रोने या अपने दुख को जाहिर करने से आप उनकी तकलीफ़ को और बढ़ा देंगे या उन्हें कमजोर कर देंगे। तो ऐसी स्थिति में मजबूत रहना जरूरी है।


पर मित्र, बाहर से मजबूत होने का दावा करना लेकिन अंदर ही अंदर भावनाओं को जमा होने देना आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

इसीलिए परिवार से अलग किसी मित्र से यह सभी बातें साझा करें। भावनाओं को व्यक्त न करने से आप डिप्रेशन के शिकार भी हो सकते हैं जिससे निकल पाना आपके लिए मुश्किल हो सकता है।

रिश्तेदारों की ले सहायता :

यह बात शत प्रतिशत सच है कि जिस घर में हमने अपने प्रिय जनों के साथ न जाने कितना वक्त बिताया, सुख-दुख के पल बिताए अब उसी घर में उनके बिना रह पाना सबसे कठिन परीक्षा है।
उनके जाने के बाद भी हमारी आंखें घर के हर कोने में सिर्फ उन्हें ही ढूंढती रहती है। ऐसा लगता है मानो घर खाली सा हो गया है और घर की हर चीज काटने को दौड़ती है।

यह स्थिति बहुत दयनीय है और इंसान इस कसौटी में अपने आप को बेसहारा पाता है। ऐसे में एक तरीका जो आप अपना सकते हैं वह है अपने रिश्तेदारों और अपने करीबी लोगों को अपने घर पर बुलाना।

घर में चहल-पहल रहने से और अधिक लोगों के रहने से आपका ध्यान बँटा हुआ रहता है और आपको अपने प्रिय जन की कमी कम महसूस होती है। वहीं दूसरी ओर यदि घर में लोग ना हो तो आपका ध्यान हर समय उस तरफ ही लगा रहता है।

ऐसे में अपने करीबी लोगों को यह बताएं और उन्हें घर पर आने को कहे। करीबी रिश्तेदारों को इस मुश्किल की घड़ी में अपना सहारा बनाए और कुछ दिन उनके साथ बिताएँ ताकि धीरे-धीरे समय के साथ आप अपने प्रिय जन की कमी को सहजता से स्वीकार कर सकें।

निष्कर्ष :

तो मित्रों, यह था आज का यह लेख। आज की चर्चा काफी गंभीर और भावनात्मक रूप से काफी संवेदनशील थी। आज आपने जाना कि जो चला गया है उसे वापस नहीं पाया जा सकता है। इंसान बस इतना ही कर सकता है कि अपने प्रिय जन की यादों के सहारे अपनी बाकी की जिंदगी को गुजारे।

लेकिन ये यादें आंखों में आंसू लाने वाले नहीं होने चाहिए। बल्कि जब भी आप अपने प्रिय जन से जुड़ी किसी भी बात को याद करें तो आपके चेहरे पर एक खूबसूरत सी मुस्कुराहट हो, जो हमेशा आपको यह याद दिला दी रहे कि आप उनसे और वह आपसे कितना प्यार करते थे।

आपका यह प्यार ही है जो आज भी आप दोनों को एक दूसरे से जोड़े हुआ है और हमेशा जोड़े रखेगा।

मित्रों, यदि इस लेख से जुड़ी आपके मन में कोई राय अथवा कोई प्रश्न हो या ऐसी कोई बात जो आप हमारे साथ साझा करना चाहते हैं तो खुले मन से लिख डालिए। हमें आपकी टिप्पणियों का बेसब्री से इंतजार रहेगा। लेख पढ़ने के लिए धन्यवाद।


अपनी राय पोस्ट करें

न्यूनतम 500/500 शब्दों