पुरानी गलतियों से कैसे सीखे और आगे बढे

पुरानी गलतियों से कैसे सीखे और आगे बढे

  

हर व्यक्ति जिंदगी में कई गलतिया करता है। दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो बिना असफल हुए सफल हुआ हो। जो कर्म करता है वही गलतिया करता है। आपने यदि कोई गलती नहीं की है तो इसका अर्थ यह है कि आपने कभी कुछ नया करने और नया सीखने की कोशिश ही नहीं की है। यदि लगातार प्रयास किया जाए तो असफलता भी सफलता में बदल जाती है। लेकिन सबसे अधिक जरुरत इस बात की है कि हम अपनी गलतियों से लगातार सीखते रहे और सफल होने की कोशिश करते रहे।

असफलता एक ऐसी सीढी है जिस पर चढ़कर हम सफल हो सकते है। जैसे एक बच्चा जब चलना सीखता है तो वह कई बार गिरता है। उसे चोट भी लगती है लेकिन फिर भी वह लगातार चलने की कोशिश करता है और एक दिन चलना सीख जाता है। यदि आपने भी गलतिया की है तो आइये जानते है कि कैसे उन गलतियों को सुधारे और आगे बढे।

1) गलती को स्वीकार करे :-

गलती को स्वीकार करना गलती सुधारने की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है। कई लोग ऐसे भी होते है जो गलतिया कर देते है और अपने ईगो (ego) के कारण उसे मानने को तैयार नहीं होते है। यदि आप अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करते है और इसका दोष आप किसी और को देंगे तो आप कभी भी आगे नहीं बढ़ सकते।

आप को कभी भी अपनी गलती ठीक करने या सुधारने का मौका नहीं मिलेगा। इसलिए अपनी गलतियों को स्वीकार करना सीखे और यदि जरुरत हो तो माफ़ी भी मांग ले। और गलती से प्रभावित लोगो को यह भी बताये कि आप उसे सुधारने के लिया क्या कर रहे है। इससे आपको यह भी फायदा होगा कि आपका व्यवहार अच्छा बना रहेगा।

2) गलती के कारणों को जाने :-

गलती को स्वीकार करने के बाद आप गलती के कारणों को जाने का प्रयास करे। आपको कई प्रश्नो के उत्तर जानने के कोशिश करना चाहिए जैसे - मैं क्या करना चाह रहा था ?

क्या गलत और क्या सही हुआ ?

गलती कहाँ पर हुई है और क्यों हुई है ?

इन प्रश्नो के अतिरिक्त अन्य प्रश्नो के द्वारा भी गलती का कारण का पता लगा सकते है। यदि आवश्यक हो तो सभी कारणों को नोट डाउन (note down) कर ले। गलतियों की जड़ को खोजने की कोशिश करे। तभी आप सही कारणों का पता लगा पाएंगे अन्यथा आप के लिए गलतियों को ढूंढ पाना और उनमे सुधार कर पाना बहुत कठिन होगा।

3) गलतियों को सुधारे :-

गलती को मानना और कारणों का पता लगाना ही पर्याप्त नहीं होता है। आपको गलतियों को भी सुधारने की कोशिश करना चाहिए। इसके लिए एक योजना को भी बनाया जा सकता है क्योंकि योजना के आधार पर किसी भी कार्य को करना सरल होता है। कारणों के आधार पर यह जानने की कोशिश करे कि हम अपनी गलतियों को कैसे सुधार सकते है।

सुधार के सभी संभावित उपायों की एक लिस्ट बना ले और यह विचार करे कि उनमे से सबसे अच्छा उपाय कौन सा हो सकता है। उस उपाय को अपनी प्रैक्टिस में लाये। यदि आप किसी की सलाह लेना चाहते है तो वह भी जरूर ले। किसी का मार्गदर्शन आपको न केवल पुरानी गलतिया सुधारने का मौका देगा बल्कि आपको आगे भी कई गलतियों को करने से बचा लेगा।

4) फिर से अपने कार्य का अवलोकन करे :-

गलतियों को सुधारने के बाद यह सुनिश्चित करना बहुत जरुरी है कि फिर किसी भी गलती की पुनरावृत्ति न हो। ऐसा करने के लिए हमें उसी कार्य को फिर से करने की कोशिश करना चाहिए जिसमे हमने गलती की थी। फिर हमें पता चलेगा कि हमने अपनी गलतियों को सही प्रकार से सुधारा है या नहीं। यदि आप यह पाते है कि अभी गलतिया नहीं सुधर पायीं है तो उसे फिर से सुधारने की कोशिश करे।

किसी भी प्रकार से घबराये नहीं और लगातार उसमे सुधार करते रहे। ध्यान रखे आप जितना अधिक प्रयास करेंगे आप के सफल होने की सम्भावना उतनी ही अधिक होती जाएगी।

हम सभी को गलतियों से कुछ न कुछ सीखने को जरूर मिलता है। कहा भी जाता है कि हमें दुसरो के गुणों और अपनी गलतियों से हमेशा सीख लेना चाहिए। असफलता और सफलता जीवन का हिस्सा है। अगर आप असफल हो जाए तो मन में यह विचार कभी भी नहीं लाये कि अब जीवन में कुछ भी नहीं बचा है या सब कुछ ख़त्म हो गया है। जरुरत इस बात की है कि हम गलतियों को नकरात्मक रूप में न लेकर सकरात्मक रूप में ले और किसी भी गलती को फिर से करने से बचे। अपनी कमियों को दूर करे और गलतियों से सीख ले इस प्रकार सफल होकर अपने भविष्य को उज्जवल बनाये।


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