निश्चित दिनचर्या का जीवन पर प्रभाव

निश्चित दिनचर्या का जीवन पर प्रभाव

  

दोस्तों, शीर्षक पढ़कर आप जान गए होंगे कि आज की चर्चा का विषय "दिनचर्या" है।

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गौरतलब है कि व्यक्ति की दिनचर्या उसके पूरे जीवन की रूपरेखा तय करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन इस तथ्य पर विरले ही लोगों का ध्यान जाता है।
आज इसी तथ्य को उजागर करने के लिए हम आपके सामने यह लेख लेकर आए हैं।


तो चलिए सबसे पहले यह जानते हैं कि आखिर दिनचर्या होती क्या है?


दोस्तों, हम जो कार्य नित्य प्रतिदिन करते हैं, वह हमारी दिनचर्या कहलाती है। सुबह से लेकर रात तक के वह सभी कार्य, जो हम लगभग रोज दोहराते हैं, वह हमारी दिनचर्या का हिस्सा होते हैं। हम सब की दिनचर्या हमारी प्रकृति, स्वभाव, रुचि, आवश्यकताओं आदि के आधार पर निर्धारित होती है।


जैसे एक नौकरीपेशा व्यक्ति की दिनचर्या में सामान्यतः सुबह उठना, नित्य क्रिया से निवृत हो चाय - नाश्ता आदि कर दफ्तर जाना, दफ्तर के काम निपटाना और घर आना शामिल होते हैं।


वहीं एक विद्यार्थी की दिनचर्या इससे अलग होती है। हर व्यक्ति की दिनचर्या एक दूसरे से अलग होना अति स्वाभाविक है। लेकिन महत्वपूर्ण यह नहीं कि हमारी दिनचर्या एक जैसी है या अलग, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि हर व्यक्ति दिनचर्या का पालन किस प्रकार करता है।

आज की चर्चा इसी बात पर जोर देती है दिनचर्या का सही रूप से पालन करना कितना प्रभावशाली सिद्ध हो सकता है। मित्रों, यदि दिनचर्या के आधार पर हम लोगों की श्रेणियां तय करें, तो हम कह सकते हैं कि मोटे तौर पर दो प्रकार के लोग होते हैं।


एक वे, जिनकी एक निश्चित दिनचर्या होती है और दूसरे वे लोग, जिनकी कोई दिनचर्या ही नहीं होती। इसका मतलब यह है कि ऐसे लोग, जिनके काम करने का समय निश्चित नहीं होता है।


यदि हम यह जानना चाहते हैं कि एक निश्चित दिनचर्या का हमारे जीवन पर कितना और क्या प्रभाव पड़ता है, तो हमें इन दोनों ही प्रकार के लोगों के जीवन की भिन्नताओं को समझना होगा। आइए इस तथ्य को एक रोचक रूप में समझते हैं।


पहले एक ऐसे व्यक्ति का उदाहरण लेते हैं जो अपनी दिनचर्या के मामले में बहुत अनुशासित एवं सख्त होता है, जिसकी दिनचर्या निश्चित होती है। दिनचर्या का निश्चित होना अर्थात इस बात का तय होना कि व्यक्ति को दिन भर में क्या - क्या और कब - कब करना है।


ऐसा व्यक्ति सुबह उठने के बाद इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट होता है कि दिन भर में उसे क्या-क्या करना है। उसका समय उसके कार्यों के अनुसार पहले से ही बँटा होता है, जिसके कारण वह दिन के सभी कार्य को समय पर पूरा करने में सफल हो पाता है।


जब हर कार्य निश्चित समय के अंदर होता है तो व्यक्ति के दिन के लक्ष्य पूरे होते हैं। परिणाम स्वरूप दिन के अंत में उसका दिमाग शांत व स्थिर होता है।

वहीं दूसरी ओर चलिए अब उस व्यक्ति की बात करें जिसकी दिनचर्या निश्चित नहीं है। ऐसा व्यक्ति सुबह उठने के बाद अस्पष्टता से भरा होता है क्योंकि उसे कब क्या करना है, इस बारे में उसे ठीक जानकारी नहीं होती।


मतलब कि उसे न यह पता है कि उसे क्या-क्या करना है, और किस प्रकार करना है वह इसे भी निश्चित नहीं करता। कार्यों का समय निश्चित ना होने के कारण वह किसी भी कार्य को किसी भी समय और कितनी भी देर तक करता है जिसके कारण आखिरी वक्त में उसे हड़बड़ाहट का शिकार होना पड़ता है।

परिणाम स्वरूप उसमें अव्यवस्था उत्पन्न होती है और दिन के अंत में उसका दिमाग अशांत व उसके कार्य अपूर्ण ही रह जाते हैं।

यदि यह मसला एक या दो दिन का हो तो कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन यदि यह अनिश्चितता और अनियमितता नित्य प्रतिदिन इसी तरह बनी रहे और व्यक्ति के जीवन का हिस्सा बन जाए तो सोचिए व्यक्ति का जीवन कितना अव्यवस्थित और अनियोजित होगा।

रोज़ के अधूरे काम, अस्पष्टता, अशांति इत्यादि हमारे जीवन को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। यही कारण है की एक निश्चित दिनचर्या का होना अति आवश्यक है।
दिनचर्या का महत्व जान लेने के बाद अब समय है दिनचर्या के हमारे जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव पर विस्तार से चर्चा करने का।

हम कुछ बिंदुओं के माध्यम से जानेंगे की निश्चित दिनचर्या जीवन में क्या प्रभाव और बदलाव लेकर आती है और यदि आप भी निश्चित दिनचर्या का पालन करेंगे तो आपको क्या-क्या लाभ मिलेंगे। आइए चर्चा करें :

✴ दिनचर्या में निश्चितता लाएगी स्वास्थ्य की सौगात :

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जी हां दोस्तों! अच्छे स्वास्थ्य और दिनचर्या के बीच में बहुत गहरा संबंध है। आप यह भी कह सकते हैं कि यह दोनों एक दूसरे के बहुत अच्छे मित्र हैं।

अरे! हैरान न हों।

हम दिनचर्या और स्वास्थ्य को मित्र इसीलिए कह रहे हैं क्योंकि जहां एक होता है, वहाँ दूसरा स्वतः ही पहुंच जाता है। अर्थात जहां दिनचर्या निश्चित होती है, वहां स्वास्थ्य खुद-ब-खुद पहुंच जाता है।

यदि आप दवाइयों, खान-पान इत्यादि को ही केवल स्वास्थ्य के परिचायक मानते हैं, तो यह पूरी तरह सही नहीं है। दवाइयां, अच्छा खानपान या व्यायाम भी अपना असर तभी दिखाते हैं जब उन्हें नियमित रूप से प्रतिदिन पालित किया जाए।

आप ही सोचिए, क्या केवल 1 दिन व्यायाम कर लेने से, या 1 दिन दवाई खा लेने से आप स्वस्थ हो जाएंगे?

नहीं!


बिल्कुल नहीं! स्वास्थ्य हासिल करने के लिए आपको दवाइयों, सही खानपान और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा।

उदाहरण स्वरूप एक व्यक्ति जो अपने बढ़े वजन को कम करना चाहता है , यदि वह केवल 1 दिन व्यायाम कर ले या कभी भी असमय व्यायाम करे तो वह पतला नहीं हो सकता।


वजन कम करने के लिए उसे निश्चित समय पर व प्रतिदिन व्यायाम करना होगा । तभी जाकर वह संपूर्ण स्वास्थ्य का लाभ उठा पाएगा।

अतः निश्चित दिनचर्या हमारे स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा प्रभाव डालती है। यदि सोने का समय, जागने का समय, खाने का समय और हर कार्य का समय निश्चित हो तो शरीर स्वस्थ्य रहता है।


यही कारण है कि चिकित्सक हर कार्य समय पर करने की सलाह देते हैं। तो आशा है आज से अपने स्वास्थ्य के लिए आप अपनी दिनचर्या को अवश्य निश्चित करेंगे।

✴ अधिक उत्पादकता, अधिक लाभ :

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दोस्तों, उत्पादकता का अर्थ है अधिक क्षमता का होना या अपनी क्षमता में वृद्धि करना। व्यक्ति की उत्पादकता कई चीजों पर निर्भर करती है। जैसे कि उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति, स्पष्टता, समय प्रबंधन इत्यादि। और यह सभी कुछ एक निश्चित दिनचर्या के द्वारा ही साधा जा सकता है।


आपने देखा होगा कि वह व्यक्ति जो हर कार्य समय पर करते हैं वह दूसरों के मुकाबले कहीं ज्यादा व्यवस्थित व कई ज्यादा ऊर्जावान होते हैं। अधिक उत्पादकता वह तोहफा है जो एक निश्चित दिनचर्या आपको देती है।

समय की बचत :

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दिनचर्या का निश्चित होने का एक बहुत बड़ा लाभ है समय की बचत होना। जब आपके कार्य करने का समय निश्चित होता है तो आप हर कार्य को एक निश्चित अवधि में निपटा लेते हैं। ऐसे में आपके पास अच्छा वक्त बचता है जिसे आप कई उत्पादक कार्यकलापों में इस्तेमाल कर सकते हैं।

दूरगामी लक्ष्य की प्राप्ति :

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आज के लेख में यह बिंदु बहुत महत्वपूर्ण है। दुनिया के सभी सफलतम व्यक्तियों में एक बात सामान्य है, और वह यह है कि सभी एक निश्चित दिनचर्या का पालन करते हैं।

इसके पीछे कारण यह है कि लक्ष्य की प्राप्ति केवल 1 दिन, या 1 महीने में नहीं हो सकती। चाहे वह कोई परीक्षा हो, चाहे कोई व्यवसाय, या कोई प्रतियोगिता।

किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए आपको लंबे समय तक प्रयास और परिश्रम करते रहना होता है। ऐसे में दिनचर्या की भूमिका बहुत अहम हो जाती है। दिनचर्या यदि निश्चित हो, तो आप अपने लक्ष्य को साधने के लिए प्रतिदिन समय देंगे।

वहीं दूसरी ओर यदि आपकी दिनचर्या में अनिश्चितता भरी पड़ी है तो आप अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए नियमित रूप से कैसे कार्य कर पाएंगे?

अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयासों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना ही होगा। अन्यथा सफल होना असंभव है। अतः दिनचर्या का लक्ष्य की प्राप्ति पर एक बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है।

निष्कर्ष :
तो पाठकों, इस लेख में आपने जाना कि दिनचर्या का आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। यदि आपकी दिनचर्या में अर्थपूर्ण एवं आवश्यक कार्य सम्मिलित हैं, तो आप योजनाबद्ध तरीके से जिंदगी में सफलता की तरफ बढ़ सकते हैं, और केवल बढ़ नहीं सकते, बल्कि उसे पा भी सकते हैं।

इस लेख में हमने आपके साथ कई ऐसे बिंदु साझा किए हैं, जिससे आप दिनचर्या के महत्व को समझ पाएंगे। अब यह आप पर निर्भर करता है कि दिनचर्या रूपी इस सौगात को आप अपने लिए किस प्रकार इस्तेमाल करते हैं।

यदि आपने दिनचर्या को एक अवसर समझकर इसका समझदारी से उपयोग किया, तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि आपकी जिंदगी बदल जाएगी। तो इंतज़ार मत करिये, और आज से ही यह अवलोकन करना प्रारंभ कर दें कि आपको अपनी दिनचर्या में कहां और कितने बदलाव करने हैं जिससे आपके जीवन में सार्थक और प्रगतिशील परिवर्तन आएंगे।


यदि इस लेख से जुड़ी आपकी कोई राय है, जो आप हमारे साथ साझा करना चाहते हैं तो अपनी राय अवश्य पोस्ट करें। आप चाहे तो दिनचर्या के प्रभाव पर कुछ और बिंदुओं की व्याख्या कर सकते हैं, या इस विषय से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभवों को भी साझा कर सकते हैं।

इख लेख को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद!


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