क्या है अवसाद और उससे जुड़े लक्षण?

क्या है अवसाद और उससे जुड़े लक्षण?

  

नमस्कार मित्रों। आजकल एक शब्द चिकित्सा विज्ञान में बहुत प्रसिद्ध होता जा रहा है। वह शब्द है "अवसाद"।

यह समस्या आजकल काफी आम हो गई है। आज से कुछ दशक पहले लोग इसके नाम से भी वाकिफ नहीं थे, लेकिन आजकल यह समस्या काफी गंभीर रूप में हमारे बीच मौजूद है। मित्रों, यदि आप अभी तक अवसाद और इससे जुड़ी जानकारी से वंचित है तो आज का लेख आपको अवश्य पढ़ना चाहिए।

चिकित्सा विज्ञान के लिए यह एक बीमारी है लेकिन आज के इस लेख में हम इसे एक बीमारी से ज्यादा मानसिक स्थिति के तौर पर देखेंगे। तो आइए, सबसे पहले जानते हैं आखिर अवसाद है क्या?

अवसाद मनोभाव के दुख से जुड़ी एक अवस्था है, जो मानसिक तनाव, दुख, किसी अप्रिय घटना के घट जाने अथवा मन में निराशाजनक विचार उत्पन्न होने से विकसित होती है।

यह वह स्थिति है जहां व्यक्ति का मन केवल और केवल नकारात्मक विचारों के इर्द-गिर्द घूमता रहता है। यह अवस्था मामूली चिंता से भिन्न है क्योंकि चिंता बेहतर स्थिति के साथ बेहतर हो जाती है, लेकिन अवसाद स्थाई रूप से मन को प्रभावित करता है। इसीलिए चिकित्सा विज्ञान में इसे रोग की संज्ञा दी गई है।

लगातार अवसाद के बढ़ते मामलों और लोगों के जीवन पर पड़ रहे इसके प्रभाव ने इसे गंभीर चिंता का विषय बना दिया है। यही कारण है कि हम इस विषय पर आपके लिए एक विस्तृत चर्चा लेकर आए हैं।

आज की चर्चा किस के लिए उपयोगी है?

आज की चर्चा लोगों की तीन श्रेणियों के लिए काफी महत्वपूर्ण और अत्यधिक उपयोगी सिद्ध होने वाली है। यह तीन श्रेणियां है :


✴ वह लोग जो अवसाद से ग्रसित हैं और इससे बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

✴ दूसरे वह लोग जिनके जीवन में तनावपूर्ण स्थितियां और उतार-चढ़ाव का दौर जारी है, एवं उनकी चिंता उन्हें अवसाद की तरफ लेकर जा रही है।

✴ तीसरे वह जो अब तक अवसाद और इसके उग्र रूप से वाकिफ नहीं हैं। आज की चर्चा उन लोगों को यह बताएगी कि अवसाद के प्रारंभिक लक्षण क्या हैं और इसे कितनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

अतः इससे आपको पता चलेगा कि अवसाद के प्रति सतर्कता कैसे बरती जाए।

मुख्य रूप से आज की चर्चा आपके लिए सतर्कता की एक घंटी है ताकि आप अपने जीवन में अवसाद के प्रवेश को निषेध कर सकें। ऐसा तभी हो सकता है जब आप इसके हर एक पहलू से वाकिफ हों। इसीलिए इस लेख को अंत तक पढ़ें।

हो सकता है आप में से कई यह सोच रहे होंगे कि आपको यह लेख पढ़ने की, या अवसाद के बारे में जानकारी प्राप्त करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि आप पूर्णतः स्वस्थ हैं और अवसाद से ग्रसित नहीं है। लेकिन मित्रों यदि आप ऐसा सोच रहे हैं तो यह आपकी गलती साबित हो सकता है। यह बहुत खुशी की बात है कि आप में अवसाद नामक बीमारी नहीं है लेकिन आप शत-प्रतिशत रूप से यह नहीं कह सकते कि यह बीमारी आपको कभी नहीं हो सकती।


अवसाद किसी को भी, किसी भी उम्र में हो सकता है। ऐसे में अवसाद के लक्षणों को पहचान पाने की क्षमता विकसित करना अति आवश्यक है ताकि आप शुरुआती दिनों में ही इन लक्षणों को समझ कर अपनी बीमारी को भाप लें और सही समय पर कार्यवाही कर सकें।


कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति के मन के अंदर अवसाद की जड़े पनप रही होती हैं लेकिन उसे इस बात का बिल्कुल भी पता नहीं चलता।व्यक्ति अवसाद को मामूली चिंता समझकर नजरअंदाज करता जाता है किंतु वह नहीं जान पाता कि उसकी यह चिंता अब एक बीमारी का रूप ले रही है।

ऐसा इसलिए होता है क्यूँकि अवसाद अन्य रोगों से भिन्न है। अन्य रोग हमारे शरीर या शरीर के किसी अंग पर प्रभाव डालते हैं जिसका पता शरीर में आ रहे बदलावों से लगाया जा सकता है।
किंतु अवसाद पूर्णतः एक मानसिक बीमारी है जिसके आमतौर पर लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। इसकी गंभीरता को आप इस रूप में समझ सकते हैं कि अवसाद से ग्रसित व्यक्ति सामने से बिल्कुल ठीक और तंदुरुस्त नजर आता है लेकिन मानसिक तौर पर स्थिति इसके ठीक विपरीत होती है।

यदि सालों - साल तक अवसाद इसी स्थिति में व्यक्ति के मस्तिष्क में रहे तो यह अपना प्रभाव शरीर और उसके अंगों पर भी दिखाना शुरू कर देती है। ऐसे में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि अवसाद के कारण व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जाए। ऐसे में आज का लेख आपके लिए अत्यंत आवश्यक हो जाता है। ताकि आप अपने अंदर अवसाद एवं उसके हर पहलू के प्रति जागरूकता ला सकें और मामूली चिंता और अवसाद के बीच के फर्क को समझाएं।

चर्चा की शुरुआत में हमने अवसाद की परिभाषा जानी है। अब इसी कड़ी में हम अवसाद के शुरुआती लक्षणों के बारे में बात करेंगे। यहां आपको यह पता चलेगा कि व्यक्ति के वह कौन-कौन से लक्षण है जो इस तरह इशारा करते हैं कि हो सकता है व्यक्ति अवसाद से पीड़ित हो।

मित्रों, ऐसे तो अवसाद के लक्षणों को समझ पाना मुश्किल है क्योंक हर व्यक्ति कभी ना कभी चिंता और तनावपूर्ण स्थितियों से होकर गुजरता है। ऐसे में यह कह पाना कि यह चिंता है या अवसाद, काफी मुश्किल हो जाता है। और दूसरी तरफ अवसाद के लक्षण भली-भांति तब उभर कर आते हैं, जब यह उग्र रूप ले चुका होता है। फिर भी व्यक्ति के अंदर कुछ ऐसे बदलाव हैं जिन का अवलोकन करके आप यह भाप सकते हैं कि वह अवसाद की ओर जा रहे हैं या नहीं।

✴ अत्यधिक उत्तेजना :

अवसाद से ग्रसित व्यक्ति का मन हमेशा दुख और नकारात्मक विचारों से भरा रहता है, और उसका मन हर वक्त अशांत रहता है। इसीलिए यह मानसिक अस्थिरता उत्तेजना के रूप में बाहर आती है। यह अवसाद का एक मुख्य लक्षण है। अवसाद से ग्रसित व्यक्ति हर छोटी बड़ी बात पर गुस्सा करने लग जाता है। वह हर समय चिड़चिड़ाहट से भरा रहता है और किसी से भी अच्छे से बात नहीं करता।


उसकी भाषा दिन-ब-दिन बिगड़ती जाती है और वह गाली - गलौज भी करने लग जाता है।

अक्सर अवसाद से ग्रसित व्यक्ति ऐसी बातों पर भी गुस्सा हो जाते हैं जिनका कोई आधार नहीं होता। ऐसा लगता है मानो उन्हें क्रोध करने का केवल एक बहाना चाहिए है। सीधी तरह जवाब ना देना, चीजों को तोड़फोड़ करना, लोगों की सलाह पर उत्तेजित हो जाना, धैर्य खो देना, हमेशा ऊंची आवाज में बात करना और भाषा का बिगड़ जाना, यह अवसाद के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

यह सभी लक्षण अवसाद की पुष्टि तब करते हैं जब व्यक्ति पहले ऐसा ना हो। एक ऐसा व्यक्ति जो हंसमुख स्वभाव का हो और शिष्ट हो यदि उसके आचरण में इस प्रकार के बदलाव आए तो यह अवसाद का ही लक्षण है। कोई ना कोई ऐसी बात है जो उन्हें मन ही मन परेशान कर रही है। इसीलिए इन लक्षणों को समझने में देर ना करें और तुरंत व्यक्ति की सहायता करें।

अत्यधिक शंका :

मित्रों, अवसाद की स्थिति में व्यक्ति को हर तरफ केवल निराशा नजर आती है। परिवार, रिश्तेदार, मित्र जन, कोई भी उसे अपना नहीं लगता। धीरे-धीरे उसका विश्वास संबंधों से उठने लग जाता है और यही कारण है कि उसका व्यवहार शंका पूर्ण हो जाता है। अवसाद से ग्रसित व्यक्ति यदि छोटी-छोटी बात पर शंका करने लगे, और साथ ही यदि वह किसी पर भी विश्वास ना करें तो यह एक प्रमुख लक्षण है।

दुखी व्यक्ति यह समझने लगता है कि कोई भी उसे नहीं समझता और उसे किसी की भी बातों पर विश्वास नहीं रह जाता। वह हर एक व्यक्ति को, यहां तक कि अपने परिवार के लोगों को भी शंका की नजर से देखने लग जाता है और अजीब सवाल पूछने लग जाता है।

व्यक्ति के अंदर आए इस बदलाव को बिल्कुल नजरअंदाज ना करें। अचानक आए यह लक्षण इस ओर इशारा करते हैं कि व्यक्ति सामाजिक दायरे से खुद को दूर करता जा रहा है और एकाकीपन मैं प्रवेश करता जा रहा है।

✴ अत्यधिक दुखी या शांत रहना :

मित्रों, हर व्यक्ति में अवसाद के लक्षण भिन्न-भिन्न होते हैं। एक तरफ कोई व्यक्ति बहुत अधिक क्रोध करने लग जाता है, तो दूसरी तरफ कोई व्यक्ति बिल्कुल चुप हो जाता है। ऐसे व्यक्ति दिन भर उदास रहते हैं और हर वक्त कुछ ना कुछ सोचते रहते हैं। उन्हें कितना भी हंसाने की कोशिश की जाए, किंतु उनके चेहरे पर मुस्कान नहीं आती है।

वह किसी भी चीज़ से खुश नहीं होते और हमेशा गंभीर और उदास रहते हैं। इसके साथ ही एक प्रमुख लक्षण है बातचीत बंद या कम कर देना। अवसाद से ग्रसित व्यक्ति मन में चल रहे द्वंद से इतना अधिक प्रभावित हो जाता है कि वह उसी में उलझ कर रह जाता है।

ऐसे व्यक्ति अक्सर बहुत कम बात करते हैं, या तो बिल्कुल ही बात करना बंद कर देते हैं। यदि आपकी किसी प्रियजन में इस प्रकार के लक्षण दिख रहे हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है। इसका अर्थ यह है कि अवसाद अब काफी आगे बढ़ चुका है और यही वक्त है जब आपको तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

✴ अनिच्छा :

अवसाद से ग्रसित व्यक्ति में उत्साह और कुछ नया करने का जोश बिल्कुल ही खत्म हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वह हर चीज को निराशा और नकारात्मकता भरी नजरों से देखता है। उसके जीवन में आशा की कोई उम्मीद नहीं होती है और उसे यह लगने लगता है कि अब कोई भी चीज करने का कोई फायदा नहीं है।

इसका परिणाम यह होता है कि वह किसी भी नई चीज को करने के प्रति अत्यधिक उदासीन हो जाता है। चाहे बात कहीं जाने की हो, त्योहार मनाने की हो या कुछ और करने की हो, हर मौके पर व्यक्ति कोई ना कोई बहाना बनाकर चीजों को टाल दिया करता है।

उसकी उदासीनता अथवा अनिच्छा इस हद तक बढ़ जाती है कि व्यक्ति खुद को एक कमरे तक ही सीमित कर लेता है और दिन भर बैठते हुए या सोते हुए ही बिता देता है। यह अवसाद का लक्षण हो सकता है।

✴ सामाजिक दूरी :

मित्रों, अवसाद से ग्रसित व्यक्ति की स्थिति बहुत बुरी होती है। उसे मन ही मन कई यातनाएं झेलनी पड़ती है। अवसाद के कारण व्यक्ति हर दिन, हर समय दुख, चिंता और निराशा में बिताता है।
उसके लिए खुशी का कोई मतलब नहीं रह जाता। वहीं दूसरी तरफ वह स्वयं को ऐसे लोगों के बीच अलग थलग महसूस करता है जो हंसते - बोलते हैं, उत्साहवान, और आशावादी हैं ।

ऐसे लोग खासकर अपने आपको सामाजिक समारोहों से कोसों दूर रखते हैं क्योंकि उन्हें लोगों से मिलना जुलना पसंद नहीं होता। वह हर समय अकेले रहना चाहते हैं और यदि जबरदस्ती उन्हें कई लोगों के बीच ले जाया जाए तो वह या तो बहुत घबरा जाते हैं या तो बहुत अधिक क्रोधित हो जाते हैं।

इसके साथ ही अवसाद के कारण उनका आत्मविश्वास भी बहुत कम हो जाता है जिससे वह लोगों के बीच जाने से झिझकने लगते हैं। यदि आपको ऐसा लग रहा है कि आपका कोई प्रिय जन खुद को सामाजिक घेरे से दूर करता जा रहा है या अपने परिवारजनों और मित्रों से बात नहीं करता, किसी भी सामाजिक समारोह में भाग नहीं लेता, तो आपको इस विषय पर चिंतन करना चाहिए कि आखिर व्यक्ति को क्या दिक्कत है? कहीं ऐसा ना हो कि यह अवसाद का ही लक्षण हो।

✴ शारीरिक लक्षण :

अवसाद एक ऐसी बीमारी है जो मानसिक स्तर पर व्यक्ति के मस्तिष्क को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। लेकिन इसका प्रभाव शरीर पर भी पड़ता है। हमारा मस्तिष्क हमारे शरीर का ही अंग है। इसीलिए यदि मस्तिष्क स्वस्थ नही होता है तो इसका प्रभाव शरीर के अंगों पर भी पड़ता है।

अवसाद से पीड़ित व्यक्ति को अक्सर पीठ, कमर या गर्दन में दर्द की शिकायत होती है। इसके साथ ही अवसाद के सबसे प्रमुख लक्षणों में से एक है नींद की कमी। अवसाद से पीड़ित व्यक्ति बहुत कम सोता है।

कुछ मामलों में तो मरीज़ पूरी रात जागता रह जाता है। वह कितनी भी कोशिश करें पर वह पर्याप्त नींद नहीं ले पाता है। अवसाद से जनित चिरचिरापन नींद की कमी का ही परिणाम होता है। पर्याप्त नींद ना लेने से व्यक्ति दिन के समय अव्यवस्थित और भ्रमित रहता है।

इसके साथ ही अवसाद से पीड़ित व्यक्ति बहुत जल्दी रो पड़ते हैं। पहले से ही उनका मन दुखी होता है, और ऐसे में यदि कोई छोटी सी भी बात उन्हें कह दी जाए तो वह तुरंत ही रो पड़ते हैं। उन्हें छोटी-छोटी बातों का भी बहुत बुरा लग जाता है और वह अपनी भावनाओं पर से नियंत्रण खो देते हैं।

मित्रों, यह तो थे लक्षण। इन लक्षणों के आधार पर हम अवसाद की उपस्थिति को पहचान सकते हैं और उसके उपचार की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं। लेकिन उपचार की बात करने से पहले हम आइए बात करते हैं कि आजकल अवसाद के मामले आखिर क्यों इतने बढ़ रहे हैं।

केवल बड़े या बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आजकल युवाओं में अवसाद के मामले कहीं ज्यादा बढ़ चुके हैं। युवाओं में अवसाद का इस प्रकार फैलना गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि कच्ची उम्र में युवा इस मानसिक तकलीफ को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और अक्सर वह गलत रास्ता चुन बैठते हैं।

वर्तमान समय में युवाओं द्वारा की जा रही आत्महत्या और नशीले पदार्थों अवसाद के सबसे बुरे परिणाम साबित हो रहे हैं। इसीलिए आइए जानते हैं कि वह क्या कारण है कि अवसाद सभी उम्र के लोगों को अपना शिकार बनाता जा रहा है। युवाओं में अवसाद के मुख्य कारण कुछ इस प्रकार है।


✴ माता पिता से प्रेम न मिल पाना

अभिभावकों के बीच चल रहा तनाव या फिर माता पिता का अलग हो जाना बच्चे के मन पर बुरा प्रभाव डालते हैं। युवावस्था में बच्चे को माता और पिता दोनों के स्नेह की आवश्यकता होती है। ऐसे में अभिभावकों के बीच का तनाव, झगड़े या मन मोटाव युवाओं में अवसाद को जन्म दे सकता है।

✴ अच्छे अंक लाने की प्रतियोगिता :

इसके साथ ही आजकल अभिभावकों द्वारा बच्चों पर अच्छे अंक लाने के लिए बहुत प्रेशर बनाया जाता है। अच्छे अंक बच्चे की बुद्धिमता परिचायक बन गए हैं इसीलिए हर अभिभावक यह चाहता है कि उसका बच्चा सबसे अधिक अंक लाए। इसके साथ ही माता पिता अपने बच्चे के अच्छे अंकों को समाज में अपनी प्रतिष्ठा का सूचक समझते हैं । लेकिन अक्सर वह यह भूल जाते हैं कि माता-पिता की यह चाहत बच्चों पर मानसिक दबाव डालती है।

यह दबाव यदि आवश्यकता से अधिक हो जाए तो अवसाद का रूप धारण कर सकता है। बच्चों के लिए यह तनाव घातक सिद्ध हो सकता है और यदि वह किसी कारण परीक्षा में अच्छे अंक लाने में सक्षम नहीं हुए तो स्थितियां और भी बिगड़ सकती हैं। अच्छे अंक ना आने के कारण उन्हें अभिभावकों अपने मित्र जनों और रिश्तेदारों से कठोर बातें सुनने को मिलती है जिसके कारण उनका तनाव अवसाद के रूप में परिवर्तित हो सकता है।

निष्कर्ष :
तो मित्रों, यह था आज का लेख जहाँ आपने जाना कि अवसाद बहुत गंभीर स्थिति बनती जा रही है। यह ऐसी बीमारी है जो किसी भी व्यक्ति को, किसी भी समय अपना शिकार बना सकती है। कई बार हमारे आसपास हमारे रिश्तेदार, प्रिय जन अथवा मित्र अंदर ही अंदर अवसाद के दुख को झेल रहे होते हैं किंतु हम इससे बेखबर रहते हैं।

ऐसी स्थिति में आज के लेख में आपको जो जानकारियां प्राप्त हुए हैं, जिन लक्षणों का पता आपको चला है, उनका इस्तेमाल करके आप दूसरों के अंदर अवसाद के लक्षणों को पहचान सकते हैं।
साथ हैं आप खुद भी सतर्क रह सकते हैं ताकि जैसे ही आपके अंदर अवसाद के लक्षण पैदा होने लगे आप इनका पता लगा सके।

मित्रों, अवसाद से ग्रसित व्यक्ति निराशाजनक हो जाता है। यदि इसका उपचार समय पर ना हुआ तो यह व्यक्ति के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। आशंका है कि व्यक्ति इस स्थिति से परेशान होकर आत्महत्या जैसा भयानक कदम उठा ले। ऐसे में अवसाद के प्रति जागरूकता कितनी आवश्यक है यह आप जरूर समझ गए होंगे।

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