आप अपने मन के मालिक हैं या नौकर?

आप अपने मन के मालिक हैं या नौकर?

  

मन दो अक्षरों से बना है। यह हमारे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। सारी इंद्रियों का स्वामी यही मन है जो अपरिमित शक्तियां अपने अंदर समेटे हुए हैं। यही शक्तियां हमारे जीवन की दिशा एवं दशा तय करते हैं।

कहा जाता है कि

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।

अर्थात असल जिंदगी में आप तभी हारते हैं जब आप मन से हार मान लेते हैं और यदि आपने मन में ठान लिया है कि आप जीतेंगे तो जीत निश्चित है।

अद्भुत शक्तियों का स्वामी यह मन क्या नहीं कर सकता?

एक कवि का मन कल्पना से मनोरम संसार रच सकता है, एक लेखक का मन अपनी कलम से क्रांति ला सकता है, एक वैज्ञानिक का मन आविष्कार से जीवन आनंद पूर्ण बना सकता है और एक आतंकवादी का मन जीवन को खत्म करने का हथियार बन सकता है।

मन प्रेरणा का स्रोत है, भावनाओं का उद्गम स्थल है, विचारों का निवास स्थान है और स्मृति का कोष है। यह बुद्धि से भिन्न है क्योंकि बुद्धि तर्क करती है, सही और गलत की कसौटी परखती है।

परंतु मन तर्क नहीं करता, उसे तो जो सूचना मिलती है, वह उसे सहर्ष स्वीकार कर लेता है। वह तर्क वितर्क नहीं करता। सही - गलत, अच्छा - बुरा, उसे इन सब से लेना देना नहीं है। और यही मन की सबसे बड़ी शक्ति भी है और सबसे बड़ी दुर्बलता भी।

यदि इस दुर्बलता के रूप में ले तो इसके कारण हम इसके शक्तियों का उपयोग नहीं कर पाते हैं। इसके विपरीत यह हमारा उपयोग करने लगती है। मित्रों, मन पवन की तरह है। वह जिधर चाहे उधर बहता है, बिना सोचे समझे। और यहीं से शुरू होता है मन का हमारे ऊपर नियंत्रण। बुद्धि पर हावी हो यह तर्क, वितर्क, विवेक नष्ट कर देता है और हम अपने मन के गुलाम बन जाते हैं।

यह स्थिति इसीलिए भी चिंताजनक है क्योंकि हमें नहीं पता चलता और यह खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है। ऐसी स्थिति में हम पूर्ण रूप से अपने मन के नियंत्रण के अंदर पहुंच जाते हैं और हम एक तरह से इसके अधीन हो जाते हैं।

यही कारण है कि व्यक्ति यथार्थ से भटक कर मन के आवेगों में भटकता रहता है। निश्चित ही यह पढ़कर आप भी भयभीत हो गए होंगे और जानना चाह रहे होंगे कि कहीं आप भी अपने मन को गुलाम तो नहीं बन गए हैं?

आपकी इसी समस्या का समाधान हम लेकर आए हैं। यदि आप यह जानना चाहते हैं कि आपका मन आपके नियंत्रण में है या फिर आप मन के गुलाम हैं, तो इन बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें।

✴ क्या आपके दृढ़ संकल्प में कमी है ?

क्या आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप कुछ करने का संकल्प लेते हैं, पर उसे पूरा नहीं कर पाते?

जैसे सुबह जल्दी जागने का संकल्प, गुस्से पर नियंत्रण रखने का संकल्प, जिम जाने का संकल्प या कुछ नया सीखने का संकल्प। यदि ऐसा है और यह आपके साथ बार-बार हो रहा है तो आपको यहां समझ जाना चाहिए कि आपका मन आपका मालिक बनता जा रहा है।

इन सभी कार्यों को करने के बारे में आप निश्चय तो करते हैं लेकिन कभी मन ना होने के कारण या कुछ और करने का मन, इन सब कारणों से आप इन्हें या तो करते ही नहीं या तो पूरा नहीं कर पाते।

इस तरह आप अपने ही मन के अधीन हो जाते हैं और जो लक्ष्य आपने बनाए हैं या जिन्हें आप पूरा करना चाहते हैं, उनमें असफल रह जाते हैं। यह मन ही है जो आपके संकल्प को पूरा करने से रोक रहा है। इसीलिए वक्त रहते संभल जाइए, सावधान हो जाइए और अपने मन को अपने वश में करिए।

✴ क्या आप वह नहीं कर पाते जो करना चाहते हैं?

अक्सर ऐसा होता है जब हम कोई काम करना चाहते हैं पर कर नहीं पाते। काम के शुरू करते हैं मन इधर-उधर भटकने लगता है और हम उस काम को छोड़कर बाकी सारी चीजों में ध्यान लगाना शुरु कर देते हैं।

हम मन के इस खेल को समझ पाएं, इससे पहले ही हम अपने द्वारा निर्धारित किए गए लक्ष्य को छोड़कर किसी और चीज को करने लग जाते हैं। यह एक अच्छा संकेत नहीं है क्योंकि यह इस ओर इंगित करता है कि हमारा मन हमें हर समय अपने नियंत्रण में रखे हुआ है। हम जो चाहते हैं वह करने की जगह वह करते हैं जो हमारा मन कहता है। मन की चंचलता को आपको जल्द से जल्द वश में करना होगा।

✴ क्या आप अपने मन की बात ना सुनने पर आप चिड़चिड़ी हो जाते हैं?

दोस्तों, यह बिंदु बहुत महत्वपूर्ण है। आप ध्यान से सोचें और अवलोकन करें कि क्या कभी ऐसा हुआ है कि न मन होने पर भी किसी काम को करने से आप चिड़चिडे हो जाते हैं।

ऐसा हमारे साथ अक्सर होता है। हमारा मन आराम करने का या कहीं घूमने का होता है। ऐसे में यदि कोई काम आ जाए तो स्वाभाविक है कि हम उस काम को नहीं करना चाहते।

हमारा मन हमें बार-बार यह संकेत देता रहता है कि हमें यह काम नहीं करना बल्कि हमें घूमना या आराम करना है। कोशिश करने के बाद यदि हम अपने मन की ना सुनकर उस काम को करना चाहते हैं तो हमारा मन चिड़चिड़ा हो जाता है।

ऐसा इसीलिए क्योंकि हमने मन के संकेतों की अनदेखी की। आपको इस पर भी नियंत्रण स्थापित करना होगा। आप मन के मालिक तभी बन पाएंगे जब आप मन को संकेत दे पाने में सक्षम हो पाएंगे, जब आप मन को आदेश के रूप में सूचनाएं पहुंचाएं और मन आपकी उन सूचनाओं को ग्रहण कर आपके हिसाब से काम करें।

निष्कर्ष :

तो मित्रों, यह था आज का लेख, जहां आपने जाना कि मन यदि आपका मालिक बन जाए तो परिणाम क्या हो सकते हैं। यह समझना बहुत आवश्यक है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मन हमारा मालिक बन बैठा है और रोजमर्रा की जिंदगी में हम जो भी काम कर रहे हैं वह मन के अधीन होकर कर रहे हैं।

यह हमारे लिए अच्छा नहीं है क्योंकि यह हमें विकास से रोकता है। दुनिया में हर एक वस्तु की यह प्रवृत्ति होती है कि वह आराम की अवस्था में रहे। यह मन का स्वाभाविक गुण है। किंतु हमारा ध्यान मन की उन असीम शक्तियों पर होना चाहिए जो असल जिंदगी में चमत्कार कर दिखाती है। यह तभी संभव है जब आप अपने मन के मालिक हो और मालिक की तरह उसे आदेश दें।

जब आप उसे आदेश देंगे तो मन, जो कि तर्क नहीं करता, वह आपके आदेशों को सहर्ष स्वीकार करेगा और आपकी असल जिंदगी आपके विचारों के अनुकूल होगी। आशा है आज के इस लेख से आपको कई सारी चीजें सीखने को मिली होंगी, जिन्हें आप अपनी जिंदगी में लागू कर सकते हैं।

यदि इस लेख से जुड़े आपके मन में कोई भी राय अथवा कोई भी शंका या सवाल हो तो आप उन्हें हमारे साथ साझा कर सकते हैं।


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