आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास के बीच अंतर क्या है?

आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास के बीच अंतर क्या है?



आपका विश्वास खुद की क्षमताओं के अनुसार है तो यह आत्मविश्वास है। अगर क्षमताओं से परे है तो यह अति आत्मविश्वास है।

निम्नलिखित कुछ बिंदुओं पर विचर करते है जो हमें स्पष्ट करेंगे

आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास के बीच कई अंतर हैं:- आत्मविश्वास खुद पर विश्वास होता है एक शक्ति होता है, वही अति आत्मविश्वास एक भ्रम है | आत्मविश्वास से एक विशेषता प्रकट होती है बल्कि अति आत्मविश्वास से घमंड की भावना | किसी भी काम को लेकर आत्मविश्वासी होना अच्छी बात होती ही उससे काम सफल भी होता है परन्तु जिस पल मन में दुसरो की क्षमताओ पर संदेह करते हुए मन में अति आत्मविश्वास की भावना आती है तो वह सब कुछ नष्ट कर देती है |

अपनी क्षमताओ पर विश्वास होना आत्मविश्वास होता है, वही अगर अपनी क्षमताओ पर अधिक विश्वास हो तो वह अति आत्मविश्वास है | किसी भी चीज की अति बेकार ही होती है, हर कार्य सीमा में रह कर संतुलन से होना चाहिए | व्यक्ति के मन की वह परिस्थिति होती है जब उसका आत्मविश्वास सीमा से बाहर चला जाता है तो वह अति आत्मविश्वास बन जाता है |

आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास के बीच एक बहुत ही पतली रेखा है, जब आप सोचते हैं कि आप एक नौकरी कर सकते हैं, इसे आत्मविश्वास कहा जाता है, लेकिन जब आपको लगता है कि केवल आप ही नौकरी कर सकते हैं या केवल आप ही इसे बेहतरीन तरीके से कर सकते हैं, तो यह आत्मविश्वास से अधिक है।

सफलता और विफलता का एक बड़ा कारण विश्वास या अति विश्वास का होना ही होता है | विश्वास अधिकांश लोगों की सफलता में एक अनिवार्य घटक है, अति आत्मविश्वास से गलत निर्णय और अंत में विफलता ही हाथ लगती है | विश्वास को एक सकारात्मक गुण के रूप में माना जाता है क्योंकि यह किसी व्यक्ति को किसी चीज़ में विश्वास करने की अनुमति देता है, वही दूसरी और अति विश्वास एक नकारात्मक गुण है इससे व्यक्ति के मन में घमंड जाता है और वह विश्वास की अति कर देता है | एक आत्मविश्वासी व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार करता है, लेकिन एक अति आत्मविश्वास वाला व्यक्ति अपनी गलतियों और दोषों को नहीं देखता है।

आत्मविश्वास:- आत्मविश्वास वह गुण है जो व्यक्ति के अंदर होता है खुद की पहचान कराता है, व्यक्ति को उसकी अच्छी और बुरी दोनों बातो से उसका परिचय कराता है, आत्मविश्वास हमें बताता है की हमें हमारी किस क्षमताओं पर विश्वास करना चाहिए और किन कमजोर बिंदुओं पर अभी भी काम करने की जरूरत है | कोई व्यक्ति आत्मविश्वासी होता है, तो वह जिम्मेदारी और अवसरों से पीछे नहीं हटता है। जिन लोगों में आत्मविश्वास नहीं होता है वे संदेह से भरे होते हैं और पहल नहीं करते हैं। आत्मविश्वास को पहचानने के लिए हमें हमारे गुणो को, प्रतिभा को जानने के साथ साथ ही प्रतिदिन अभ्यास की भी आवश्यकता होती है ताकि हमें हमारी क्षमताओं पर विश्वास बना रहे एवं प्रति-दिन बढ़ता रहे |

अति आत्मविश्वास:- अति आत्मविश्वास एक व्यक्ति की सफलता के खिलाफ एक बाधा के रूप में काम करता है। यह व्यक्ति का एक अलग ही चहेरा दिखता है, ऐसे व्यक्ति को कभी अपनी गलतिया नहीं दिखती है जब विफलता हाथ लगती है तब अति विश्वास व्यक्ति के लिए हानिकारक साबित हो सकता है क्युकी सफलता के झूठी उम्मीद लगा कर जब हार प्राप्त होती है तब उसे परेशानीओ का सामना करना पड़ता है मानसिक तनाव का ही सामना करना पड़ता है |

एक उदाहरण के लिए- एक छात्र जो पहले सेमेस्टर में परीक्षा में प्रथम श्रेणी से पास होता है, वह सोचता है कि उसे दूसरे सेमेस्टर के बारे में ज्यादा परेशान नहीं करना चाहिए क्योंकि वह वैसे भी पढ़ाई में अच्छा है। यह अति आत्मविश्वास है। छात्र परीक्षा के लिए अधिक अध्ययन नहीं करता है और मानता है कि वह उसी तरह से दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा उत्तीर्ण करेगा। दुर्भाग्य से, छात्र अच्छी तरह से पास नहीं होता है। यह अति आत्मविश्वास का परिणाम है। इसलिए सतर्कता और मेहनत की भी जरूरत होती है हमें विस्वास के साथ साथ |

"अति आत्मविश्वास लोगों को उनके ज्ञान को कम करने, जोखिम को कम करने और घटनाओं को नियंत्रित करने की उनकी क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है।

4 कुछ वाक्य को हमें अंतर बताएंगे आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास मे:-

  • "मैं ऐसा कर सकता हूँ"( आत्मविश्वास)
  • "केवल मैं ही ऐसा कर सकता हूं"(अति आत्मविश्वास)
  • "मैं सही हूँ, लेकिन दूसरें भी सही हैं।" ( आत्मविश्वास)
  • "केवल मैं सही हूँ, दूसरों की राय से कोई फर्क नहीं पड़ता।"(अति आत्मविश्वास)
  • "मैं अपनी क्षमताओं में विश्वास करता हूँ।"( आत्मविश्वास)
  • "मेरी क्षमता दूसरों की क्षमताओं से बेहतर है" (अति आत्मविश्वास)

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