अच्छे वक्ता की 7 पहचान - बोलना की कला

अच्छे वक्ता की 7 पहचान - बोलना की कला



बोलना हमारे जीवन की वह कला है जो हमे दुसरो के दिलो पर राज करना सिखाती है परन्तु जो लोग इस कला से अनजान है वह ना तो खुद के व्यक्तित्व को सँवार पाते है और ना ही अपने कार्य में सही मुकाम तक जा पाते है जबकि हर इंसान अपनी जिंदगी में सफलता पाना जरूर चाहता है अगर हम इस शक्ति पर कार्य करे तो हमारी पहचान लाखो की भीड़ में अलग होगी |आज कल दुनिया में कई ऐसे लोग है जो मंच पर भाषण देने के नाम से ही घबराने लग जाते है, भीड़ को देखकर डरने लगते है जिससे लोगो के बीच हमारा मजाक बन जाता है |

निम्नलिखित कुछ बिन्दुओ को ध्यान में रख कर हम अच्छे वक्ता बन सकते है |

कोमल मधुर और योग्य शब्द :- अगर कला के साथ-साथ आपके पास कोमल मधुर और योग्य शब्द का भंडार नहीं है तो सब गुण होते हुए भी आप दिलो के राजा नहीं बन पाते है फिर चाहे उसके पास धन सम्पदा ताकत आदि क्यों ना हो |

तैयारी :- एक अच्छे वक्ता की पहचान उसकी तैयारी से ही होती है| आप अपने विषय को कितना समय देते है और उसकी तैयारी कैसे करते है |अपनी तैयारी के लिए हर तरह के साधनो का उपयोग करे और अच्छा कंटेंट तैयार करे |आईने के सामने अपनी तैयारी करे अपनी बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान दे और अपने भाषण की रिकॉडिंग करके बार-बार सुने | बिना देखे बोलिए अगर भाषण ज्यादा लम्बी है तो मुख्य बिंदुओं को अवश्य लिख कर ले जाए |अगर आप बिना देखे सही नहीं भी बोल पा रहे है तो देख कर ही सही-सही बोले क्युकी बोलते समय आपका सहज होना बहुत जरुरी है |छोटे मोटे अवसर पर बिना देखे बोलने की कोशिश करते रहे |प्रतिदिन अभ्यास से कोई भी कार्य नामुमकिन नहीं है |जो भी श्रोताओ के सामने व्यक्त करना है उसकी छवि स्वयं के दिमाग में बना ले और निर्भय होकर के पुरे भाषण को प्रस्तुत करे|

स्वयं पर विश्वास :- हमेशा खुद पर विश्वास करे हमेशा अपने आप पर विश्वास रखे और सोचे की आप एक सफल वक्ता है आपका भाषण बहुत अच्छा है और ना मेरी तैयारी में कोई कमी है| क्युकी हम जैसा हमारे दिमाग में सोचते है परिणाम भी उसी के अनुसार आता है |अगर हम हमारे दिमाग को लगातार यह संकेत देंगे की हम असफल होंगे तो फिर आपको सफल कोई नहीं कर सकता |

कॉन्टेंट अच्छा होना :- हमारे भाषण का कंटेंट बहुत ही आकर्षक और शानदार होना चाहिए क्युकी आप कितने ही अच्छे वक्ता क्यों ना हो अगर आपका कंटेंट अच्छा नहीं है तो दर्शक को आनंद नहीं आएगा |

कंटेंट जितना छोटा होगा भाषण उतना आकर्षक होगा | और गलती से कभी घबराए नहीं दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिससे कोई गलती हुई हो, गलती होना स्वाभिक है परन्तु एक बात ध्यान रखे अगर कोई गलती हो भी जाती है भाषण देते वक़्त तो हमे होशियारी के साथ उस परिस्थिति को अपने बोलने के अंदाज से छुपाना आना चाहिए |

बार-बार बात को दोहराए नहीं :- वार्तालाप या भाषण के दौरान अगर हम बार-बार किसी बात को दोहराते है तो सुनने वालो को अच्छा नहीं लगता है|आप कम समय अवधि अगर बार-बार शब्दों को दोहराएंगे तो मुद्दे की बातो से भटक जाएंगे | मान लीजिए अगर आपको 10 मिनट का ही समय दिया है उसमे भी आप बार-बार उसी शब्दों को दोहराते रहेंगे तो आपका भाषण कैसे पूरा होगा और आपके व्यक्तित्व पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा |और अपनी निजी समस्याओ को दूर रखे कभी भी अपने भाषण में अपनी कोई भी समस्या का जिक्र ना करे |सभी का परहेज करते हुए पुरे जोश के साथ श्रोताओ को प्रोत्साहित कीजिए |

बात रोचक होना चाहिए :- इस बात पर विशेष ध्यान देना होगा वार्त या बात के दौरान बोलने का तौर तरीका बहुत ही रोचक होना चाहिए |भले ही छोटी हो परन्तु रोचक होना चाहिए | हमें जमींन से जुडी चीजों को अपने वार्ता में सम्मिलित करना चाहिए |अगर बात या भाषण रोचक नहीं होगी तो कोई भी आपकी बात अंत तक सुनेगा नहीं | हमें हमेशा हमारे भाषण से श्रोता को जोड़ने के लिए दिनचर्या की बाते और स्वभाव से आकर्षित रखना चाहिए | जो व्यक्ति बड़ी -बड़ी बाते करता है , उसकी बातो का श्रोताओ पर कुछ खास असर पड़ता नहीं है |

सकारात्मक सोच रखे : हमेशा यही सोचना चाहिए की हम सफल होंगे क्युकी हम हमारे दिमाग को जैसा इनपुट देते है उसका आउटपुट वैसा ही होता है और हम वैसा ही कार्य करने लगते है यदि हम दिमाग को लगातार असफलता और हार का संदेश देंगे तो हमारी हार निश्चित है|


अंत भला तो सब भला :- भाषण का अंत प्रभावशाली होना चाहिए | भाषण के अंत में लोगों में जोश पैदा होना चाहिए, कई नेता इसके लिए अंत में जय हिन्द या वन्दे मातरम जैसे नारे लगवा देते हैं। ऐसा हर जगह तो नहीं किया जा सकता पर आप कुछ शेरो-शयरी या कुछ प्रेरणादायक बातो का प्रयोग कर सकते हो |

भाषण को सकारात्मक भाव के साथ समाप्त करना उसे यादगार बना देता है और लम्बे समय तक लोग उसे याद रखते हैं | अतः भाषण का अंत कैसे हो इस पर विशेष ध्यान दें |

कुछ अच्छा करने के साथ -साथ अगर आप दिल से लोगों को धन्यवाद देते हैं तो ये सोने पे सुहागा जैसा काम करता है |ऐसा वक्ता समाज में अपने नाम के साथ-साथ हर वो मुकाम हासिल करता है जो वो करना चाहता है |


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