Pallavi Thakur
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अपने मन के भावों को काग़ज़ पर उकेर कर संजो लीजिए!

नमस्कार! मैं आकाशवाणी की युवा कलाकार हूँ। लेखन एवं हिंदी भाषा में मेरा अत्यधिक रुझान है। इस रुचि को एक ब्लॉगर के रूप में साकार करने के की कोशिश है।

"आज मेरा मन प्रसन्न है"

"मेरे मन में कई सवाल हैं"

कई वाक्यों में हम "मन" शब्द का प्रयोग करते हैं।

पर यह "मन" आखिर है क्या?

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मस्तिष्क मन नहीं है। मन हमारे मस्तिष्क की वह चेतना है, आत्मा है। मन वो हिस्सा है, जो तमाम तरह के विचारों का घर है।

शरीर स्थूल है, यह दिखाई देता है, छुआ जा सकता है। परंतु मन केवल महसूस किया जा सकता है। आप इसकी तुलना हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से कर सकते हैं। आईये इसे और अच्छे से समझते हैं।

मन विचारों का जन्म दाता है। परंतु यह मस्तिष्क से अलग है। मस्तिष्क तार्किकता के नियमों पर चलता है, किंतु मन स्वच्छंद है, यहाँ तर्क वितर्क नहीं होते। यह अपार शक्तियों का भंडार है । यही हमें इच्छा, चिंतन, स्मरण, भावना, चुनाव इत्यादि की चेतना प्रदान करता है। यदि शरीर रथ है, तो मन सारथी। इसी के दिखाये रास्ते पर हम चलते हैं। यह सारथी हमें सन्मार्ग, सफलता, सुख, शांति, विकास के पथ पर भी ले जा सकता है, या फिर दुःख, असफलता, रोग, आशांति एवं पतन के पथ पर ले जा सकता है। आप किस रास्ते चलना चाहते हैं, यह आप तय कर सकते हैं। कैसे? जवाब नीचे है।

कैसे साधे मन पर नियंत्रण

मित्रों, मन शक्तिशाली तो है, किंतु बहुत चंचल भी है। इसकी इच्छाएँ अनंत हैं। मन को नियंत्रण में रखना भी आवश्यक है। चंचलता और गंभीरता का मेल होना चाहिए। इसीलिए मन की शक्तियों, क्षमताओं, और चंचलता को पहचानिये। आपका जीवन सफलता और खुशियों से भर जाएगा।

मन को नियंत्रित करने के उपाय:

✴ ध्यान करें

✴ बुरी संगति से बचें

✴ सीमाओं को पहचाने

✴ सकरात्मक सोंचे

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